लेखक की कलम

शिक्षा व्यवस्था पर वाजिब सवाल

सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने देश के शिक्षा मंत्रियों के नाम एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों, टॉयलेट समेत कई मुद्दों का जिक्र है। इसी प्रकार बिहार में पहली बार विध्सायक बने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने भी बांकीपुर विधान क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की हालत सुधरवाने का वादा किया है। बांकीपुर विधायक ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है। पीके ने लोगों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि अगले साल दशहरा से पहले आपके इलाके का सरकारी विद्यालय अर्थात जो भी अगल बगल सरकारी विद्यालय है, यहां के गरीब बच्चे वहां पढ़ने जाते हैं। उस सरकारी विद्यालय में गुणात्मक सुधार होना चाहिए। अगर अगले साल दशहरा तक नहीं हुआ। उन्होंने साफ किया कि अगले साल दशहरा के बाद गरीब परिवार के लोग अपने बच्चे का नाम किसी प्राइवेट स्कूल में लिखवा दीजिए। फीस की चिंता अपने भाई और अपने बेटे प्रशांत किशोर पर छोड़ दीजिएगा। साल भर के अंदर। जब 2027 का अंत होगा। बांकीपुर बिहार का पहला ऐसा विधानसभा क्षेत्र बने, जहां रहने वाले हर परिवार के बच्चे को पढ़ने की सुविधा जरूर अच्छी करा दी जाए। हमने आपसे ये वादा किया है। इसके लिए आपको कोई प्रयास करने की जरूरत नहीं है। एक साल में आपको ये होगा। नीट परीक्षा का पेपर आउट होना भी शिक्षा व्यवस्था की खामी से जुड़ा है। इसलिए चारों से तरफ शिक्षा व्यवस्था को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं , वे वाजिब और समीचीन भी हैं। अंग्रेजों ने भी भारतीय समाज को मानसिक रूप से गुलाम बनाने के लिए मैकाले की शिक्षा पद्धति लागू की थी। सीजेपी के संस्थापक ने ये भी साफ किया कि यह कोई राजनीति का हिस्सा नहीं है और न ही ये किसी एक सरकार के बारे में है, यह हमारे बच्चों के भविष्य के बारे में है। स्कूल तक वारिश में जाने का अगर रास्ता ठीक नहीं है अथवा बालकों और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं हैं तो यह देखना शिक्षा विभाग का दायित्व है। शिक्षा विभाग और सरकार को इसकी याद दिलानी पडे तो यह शर्मनाक है। हालांकि सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के प्रति राज्यों के शिक्षा मंत्री जवाब देह नहीं हैं, इसलिए दीपके को उनकी चिट्ठी का जवाब मिलेगा, इसमें भी संदेह है।
कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के नाम एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में उन्होंने शिक्षा मंत्रियों से छह जानकारी देने की अपील की है। इसमें उन्होंने स्कूलों के मरम्मत कार्य, खाली पदों की संख्या, स्कूलों के लिए पैसे का आवंटन समेत कई अन्य जानकारी देने का आग्रह किया है। अभिजीत दीपके ने देश के शिक्षा मंत्रियों को लिखी चिट्ठी में इस बात का भी जिक्र किया है कि भारत को आजाद हुए 80 साल हो चुके हैं, फिर भी कई सरकारी स्कूलों में बच्चों के पीने के लिए साफ पानी, वॉशरूम, अच्छे क्लासरूम या बैठने के लिए बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। दीपके ने पूछा है कि राज्य में पिछले पांच सालों में कितने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया गया है और मौजूदा समय में कितने स्कूलों को मरम्मत या पूरी तरह से कायाकल्प की जरूरत है? मौजूदा समय में कितने शिक्षण पद स्वीकृत हैं, कितने भरे हुए हैं और कितने खाली हैं? पिछले पांच सालों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना पैसा आवंटित किया गया है और उसमें से कितना खर्च किया गया है? यह सुनिश्चित करने के लिए कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की जरूरत है? पढ़ाने के अलावा सरकारी स्कूल के शिक्षकों को कौन-कौन से नॉन-टीचिंग काम और जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं? मौजूदा समय में कितने सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग सुविधाओं, स्वच्छ और उपयोग में लाए जा रहे शौचालयों और बच्चों के लिए खेल सुविधाएं और उपकरण हैं?
उन्होंने नसीहत देते हुए ये भी कहा कि सरकारी स्कूलों से आ रही और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें हम सभी के लिए गहरी चिंता का विषय होनी चाहिए। इन बच्चांे को स्कूली की ऐसी स्थिति में पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। दीपके का ये भी कहना है कि स्कूल में बच्चों के साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव किया जा रहा है, जो बेहद ही चिंताजनक है। इसके साथ ही सीजेपी के संस्थापक ने ये भी साफ किया कि यह कोई राजनीति का हिस्सा नहीं है और न ही ये किसी एक सरकार के बारे में है, यह हमारे बच्चों के भविष्य के बारे में है। बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी सरकारी स्कूलों के खस्ताहाल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए देशव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान चला रही है।
इसी प्रकार का अभियान चलाने का वादा जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी किया है। जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने घोषणा की है कि यदि अगले साल दशहरा तक सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो गरीब परिवारों के बच्चे अपनी पसंद के प्राइवेट स्कूल में पढ़ सकेंगे और उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उनका कार्यालय उठाएगा।प्रशांत किशोर ने सरकारी व्यवस्था को सुधारने के लिए एक साल (अगले साल दशहरा तक) का वक्त मांगा है। यदि निर्धारित समय में सरकारी स्कूलों की पढ़ाई ठीक नहीं होती है, तो अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला किसी भी प्राइवेट स्कूल में करवा सकते हैं। प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की फीस और पढ़ाई का सारा खर्च प्रशांत किशोर और उनका जन सुराज कार्यालय उठाएगा। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीब बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, चाहे वह बेहतर सरकारी स्कूल के जरिए हो या फिर निजी स्कूल के माध्यम से।
बांकीपुर के सभी वार्डों में लगातार भ्रमण कर रहे स्थानीय विधायक प्रशांत किशोर लगातार नये- नये दावे कर रहे हैं। उन्होंने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में चलने वाले प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर भी लगाम लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि उनकी वसूली अब नहीं चलेगा। वे निजी स्कूलों से बातचीत कर उनके साथ बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि एक और बात जो हमने बांकीपुर में देखी। 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं। प्राइवेट स्कूल वाले मनमानी फीस ले रहे हैं। फीस लेने के बाद हर साल दोबारा नामांकन के नाम पर। उन्होंने कहा कि स्कूल वाले कभी कपड़ा के नाम पर। कभी कुछ के नाम पर। लोगों का दोहन किया जा रहा है। प्रशांत कहते हैं ये जो प्राइवेट स्कूल हैं, जो जनवरी में या मार्च में आपसे री एडमिशन के नाम पर ज्यादा पैसा ले रहा है। नवंबर तक इस चीज को सुधारने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। आपके बच्चों के प्राइवेट स्कूल का फीस कम होने जा रहा है। अगले वर्ष इस साल के मुकाबले कम होगा ही होगा। जो लोग भी स्कूल चला रहे हैं उनके साथ हम बैठक करने वाले हैं। उनके साथ मिलकर ये व्यवस्था बनाई जाएगी।
उन्होंने कहा हमारा सारा फोकस पढ़ाई पर है। दूसरी बात हमने कहा। जो गरीब परिवार के बच्चे हैं वो प्राइवेट में पढ़ ही नहीं रहा है। सरकारी स्कूल में पढ़ने जा रहा है। वहां जो सरकारी स्कूल में पढ़ने जा रहा है। वो पढ़ नहीं रहा है। उन्होंने सरकारी स्कूलों पर तंज कसते हुए कहा कि खाली नाम लिखवा लिया है। वहां टीचर भी नहीं पढ़ाता है। वहां बैठने का कोई जगह है, न पढ़ाने का उपाय है। खिचड़ी खिलाया और घर भेज दिया।
बहरहाल, प्रयास कहीं से हों लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। दुष्यंत कुमार के शब्दों में- पीर पर्वत हो गयी है, अब पिघलनी चाहिए।
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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