लेखक की कलम

साय बना रहे छत्तीसगढ़ के विकास का रोडमैप

पिछले दिनों नई दिल्ली में सम्पन्न हुई वल्र्ड लीडर्स फोरम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने राज्य का विकास रोडमैप प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय मंे छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहां प्राकृतिक संसाधन हैं, पर्याप्त ऊर्जा, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इस प्रकार निवेश के अनुकूल परिस्थितियां हैं। यह राज्य अब अपनी खनिज आधारित पहचान से काफी आगे बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सिर्फ निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है बल्कि निवेश को रोजगार और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ना भी है। सीएम साय ने कहा कि राज्य की मौजूदा समय मंे 6.31 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था है। राज्य में सड़क, रेल और ऊर्जा का भंडार है। कामकाज की पारदर्शी व्यवस्था है और सबसे महत्वपूर्ण यह कि नक्सलवाद से राज्य पूरी तरह मुक्त हो चुका है। बदलता हुआ बस्तर राज्य विकास यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। सुरक्षा की स्थिति में तेजी से हुए सुधार के बाद अब बस्तर में निवेश विकास, रोजगार और उद्यमिता के नये अवसर पैदा हुए हैं। ध्यान रहे बस्तर मंे 421 बंद हो चुके स्कूलों को विष्णु देव साय सरकार ने पुनः प्रारम्भ कराया है। इस प्रकार राज्य में अब युवाओं को जाॅ सीकर की जगत जाॅब टेकर बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव की यह रणनीति सत्ता पर पकड़ को बनाए रखने की भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 लागू किया गया है। कम जोखिम वाले उद्योगों के प्रकरणों में निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत आठ विभागों की 43 सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनुमति और प्रक्रियाओं में अनावश्यक समय न लगे और वे अपना ध्यान उद्योग तथा रोजगार सृजन पर केंद्रित कर सकें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है लेकिन राज्य की नई आर्थिक नीति का लक्ष्य केवल इन संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि प्रदेश के भीतर ही उनका अधिकतम वैल्यू एडिशन करना है। इसी दिशा में नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा रही है। राजनांदगांव में प्रस्तावित स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, 142 एकड़ का फार्मा पार्क तथा टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट पार्क भविष्य के औद्योगिक विकास को नई गति देंगे। कोरबा में लिथियम की खोज से प्रदेश में बैटरी निर्माण, ऊर्जा भंडारण और न्यू एनर्जी सेक्टर में भी नई संभावनाएं खुली हैं।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब पारंपरिक ऊर्जा में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में प्रदेश में करीब 4 हजार मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 90 हजार से अधिक घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। भिलाई में प्रदेश का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट भी स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी का विस्तार राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ नए निवेश और ग्रीन जॉब्स के लिए भी महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और सिरपुर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को विश्वस्तरीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से इस क्षेत्र में निजी निवेश के साथ होटल, हॉस्पिटैलिटी, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के वनांचलों में मिलने वाले लघु वनोपज, औषधीय पौधों, मिलेट और कृषि उत्पादों की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि छत्तीसगढ़ केवल कच्चे माल का उत्पादक न रहे, बल्कि यहीं तैयार उत्पाद बनें और उनकी अधिकतम आर्थिक मूल्य स्थानीय लोगों को मिले।
उधर, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी सत्ता में वापसी का जी जान से प्रयास कर रही है। नई दिल्ली के इंदिरा भवन में 19 अगस्त को हुई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में केंद्र की नीतियों के खिलाफ पार्टी ने कई मुद्दे उठाए। बैठक में पेपर लीक, बेरोजगारी, अयोध्या चंदा, चीन सीमा, कृषि-ऊर्जा सुरक्षा और ई20 पेट्रोल पर चर्चा हुई। इन मुद्दों का असर छत्तीसगढ़ से भी जुड़ता है, क्योंकि राज्य में बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और कृषि अर्थव्यवस्था में ईंधन की कीमत व फसल उपयोग जैसे विषय सीधे किसानों से जुड़े हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में पेपर लीक बड़ी समस्या बन गया है। छत्तीसगढ़ में भी पीएससी, व्यापमं और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद और युवाओं के आंदोलन समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
सीडब्लयूसी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी से सबसे ज्यादा नुकसान उन युवाओं को होता है, जो वर्षों तक तैयारी करते हैं। राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था में निजीकरण और केंद्रीकरण का विरोध किया। कांग्रेस कार्यसमिति ने ई20 पेट्रोल से माइलेज कम होने, पुराने वाहनों की अनुकूलता और उपभोक्ताओं के सीमित विकल्पों पर चिंता जताई।
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में पार्टी का यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि और ग्रामीण परिवहन की बड़ी भूमिका है। कांग्रेस ने गन्ने और मक्के को ईंधन उत्पादन में इस्तेमाल किए जाने से खाद्य और पर्यावरण संबंधी संभावित असर पर भी सवाल उठाए।
सीडब्ल्यूसी ने केंद्र पर अमेरिकी दबाव में कृषि और ऊर्जा सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया। इसका असर छत्तीसगढ़ के किसानों पर भी पड़ने की बात कांग्रेस ने उठाई। पार्टी ने कहा कि कृषि नीति बनाते समय किसानों की आय, फसलों की मांग और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। महिला आरक्षण पर भी जोर। कांग्रेस ने 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की मांग दोहराई। छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा और लोकसभा राजनीति में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का मुद्दा इस मांग से सीधे जुड़ता है। पार्टी ने लोकसभा सीटों के मौजूदा राज्योंवार आवंटन पर संवैधानिक रोक को
अगले 25 सालों तक जारी रखने की मांग भी रखी। इस प्रकार कांग्रेस भी चुनाव की तैयारी जोर-शोर से कर रही है।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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