लेखक की कलम

छत्तीसगढ़ में पीएम आवासों पर घमासान

भाजपा शासित राज्य छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी कांग्रेस सरकार को कदम-कदम पर घेरने का प्रयास कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भले ही पंजाब के प्रभारी का दायित्व संभाल रहे हैं लेकिन उनकी नजरें अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ पर ही टिकी हुई हैं। गत दिनों विष्णु देव साय की सरकार ने प्रधानमंत्री आवासों को लेकर आंकड़े दिये। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह पंचायत मंत्री विजय शर्मा के दावों को भूपेश बघेल ने खुली चुनौती दी। भूपेश बघेल का दावा है कि उनकी सरकार के कार्यकाल मंे ही 7 लाख आवास स्वीकृत कराये गये थे। अब डिप्टी सीएम विजय शर्मा उन आवासों को भी अपनी सरकार की उपलब्धि बता रहे हैं। इस पर दोनों तरफ से बहस करने की चुनौती भी दी गयी है। उधर, विष्णुदेव साय सरकार माओवादियों के ठिकानों पर छापामारी कर हथियार और विस्फोटक बरामद कर रही है ताकि नक्सलवाद फिर से जीवित न हो सके।
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए आवासों के आंकड़ों पर सियासत तेज है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार द्वारा बताए गए आंकड़े और संसद में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में बताए गए आंकड़ों में अंतर का आरोप लगाया और बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। इस पर राज्य के उपमुख्यमंत्री सह पंचायत मंत्री विजय शर्मा ने दावा किया कि सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया था। अब तक 11 लाख से अधिक पीएम आवास-ग्रामीण पूरे किए जा चुके हैं। उपमुख्यमंत्री ने भूपेश बघेल पर पीएम आवास को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए किसी भी मंच पर बहस की चुनौती भी दे दी। उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा- सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख आवास बनाने की फाइल पर हस्ताक्षर किया था। हमारी सरकार में 11 लाख आवास बनाकर पूरे कर लिये गए हैं। मैं भूपेश बघेल को चुनौती देना चाहता हूं कि वो कहीं पर भी किसी मंच पर इस मामले में बहस कर सकते हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के इस बयान के बाद सियासत और तेज हो गई। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने विजय शर्मा की चुनौती को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा- समय और स्थान तय कर लिया जाए, वे बहस के लिए तैयार हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि पीएम आवास के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग जगह अलग आंकड़े दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में 18 लाख 50 हजार आवास स्वीकृत होने की बात कही गई है, जबकि संसद में अलग आंकड़े बताए जाते हैं। भूपेश बघेल ने कहा- प्रदेश में 11 लाख से अधिक आवास पहले ही बन चुके थे, इनमें पहले की सरकारों के कार्यकाल के आवास भी शामिल हैं। हमारे कार्यकाल में करीब 7 लाख आवास स्वीकृत कराए गए थे। मौजूदा सरकार ने कितने आवास स्वीकृत किए और उनमें से कितने पूरे किए हैं, सरकार को यह स्पष्ट बताना चाहिए।
उधर, विष्णुदेव साय सरकार इस बात से निश्चिंत होकर नहीं बैठी है कि राज्य में नक्सलवाद खत्म हो गया तो अब कुछ करने की जरूरत नहीं है। यह सही है कि नक्सलियों ने बड़ी संख्या मंे या तो समर्पण कर दिया है अथवा वे मुठभेड़ में मारे गये हैं। सरकार उन नक्सलियों के ठिकाने से गोला-बारूद और हथियार बरामद करने का प्रयास कर रही है जो मुठभेड़ में मारे गये हैं। इसी प्रक्रिया के तहत गत 24 अगस्त को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र में माओवादियों के एक ठिकाने से सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए हैं। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर, जिला सुरक्षा बल, जिला रिजर्व गार्ड और बस्तर लड़ाकों ने 24 अगस्त को भंडारपदर और मुनुरकोंडा के वन और पहाड़ी क्षेत्रों में संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान, एसएलआर, राइफल, बीजल लॉन्चर और थूथन-लोडिंग बंदूकों सहित 23 हथियार बरामद किए गए। इसके अलावा, विभिन्न कैलिबर के चार सौ 92 जिंदा कारतूस, दो सौ 40 जिलेटिन स्टिक, 18 किलोग्राम बारूद, पांच
देसी हथगोले और बड़ी मात्रा में
बीजल सेल जब्त किए गए। पुलिस ने कहा कि क्षेत्र में माओवादियों के
ठिकानों और विस्फोटक सामग्री का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान जारी रहेगा।
छत्तीसगढ़ में यह अभियान उस समय और तेज हो गया जब नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी एजेंसियों को घुसपैठ को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है। नई दिल्ली में नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन-2026 का उद्घाटन करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने निर्देश दिया कि विभिन्न राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को तैयार करने के लिए बहु-एजेंसी केंद्र- एमएसी मंचों पर उपलब्ध सूचनाओं का एआई-आधारित विश्लेषण किया जाना चाहिए। आतंकवाद और कट्टरपंथ से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए श्री शाह ने गृह मंत्रालय की प्रहार योजना के कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षण, भगोड़ों को वापस लाकर और अनुपस्थिति में सुनवाई के प्रावधानों का उपयोग करके मुकदमों में तेजी लाने तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम- यूएपीए मामलों की जांच करते समय एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। इनमें आतंकवाद विरोधी चुनौतियों का सामना करने, बहु-एजेंसी केंद्र के माध्यम से खुफिया जानकारी के एकीकरण, विश्लेषण और संचालन, मादक पदार्थों पर नियंत्रण के लिए एक रणनीतिक दस्तावेज, अवैध प्रवासियों का पता लगाकर उन्हें निर्वासित करने, साइबर अपराध से निपटने के लिए एक नीतिगत ढांचा और पाकिस्तान द्वारा परोक्ष युद्ध को लेकर चर्चा की गई।
नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा पर दो दिवसीय सम्मेलन हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित किया गया। इसमें देश भर से 850 से अधिक प्रतिभागी शामिल थे। दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में गृह राज्य मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख शामिल हुए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के महानिदेशक पुलिस अधिकारी, अत्याधुनिक स्तर पर कार्यरत युवा पुलिस अधिकारी और विशिष्ट क्षेत्रों के विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन में शामिल हुए। यह संदेश छत्तीसगढ़ मंे भी पहुंचा जहां नक्सलियों की घुसपैठ एक राज्य से दूसरे राज्य में होती रही है।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button