भारतीय अर्थव्यवस्था का ग्रोथ आउट लुक बहुत मजबूत

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वित्त वर्ष 2025-26 का विकास परिदृश्य (ग्रोथ आउटलुक) अत्यंत मजबूत बना हुआ है। यह मजबूत गति मुख्य रूप से सशक्त घरेलू मांग, नियंत्रित मुद्रास्फीति और संरचनात्मक सुधारों के सकारात्मक प्रभावों पर आधारित है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी देश की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक नीतिगत अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2025-26 की दूसरी तिमाही में उल्लेखनीय गति पकड़ी है। खबर के मुताबिक, यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह उस समय आई है जब अमेरिका ने अगस्त में भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे। उच्च-आवृत्ति संकेतकों ने सप्लाई-साइड में लगातार सकारात्मक रुझान दिखाए हैं, जबकि त्योहारी सीजन की बेहतर भावनाओं और जीएसटी सुधारों के चलते मांग की स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है।
भारत की मजबूत नींव और प्रदर्शन को देखते हुए, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और आरबीआई ने भी अपने विकास अनुमानों को बढ़ाया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने अनुमान को 6.4 फीसद से बढ़ाकर 6.6 फीसद कर दिया है। जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने अनुमान को 6.5 फीसद से बढ़ाकर 6.8 फीसद कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि मजबूत सेवा निर्यात ने माल व्यापार घाटे की सफलतापूर्वक भरपाई की है, जिससे भारत का समग्र व्यापार प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा, सितंबर 2025 के माल व्यापार डेटा में निर्यात गंतव्यों के विविधीकरण के प्रारंभिक संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के सकल प्रवाह में वृद्धि का हवाला दिया गया है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि भारत वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। जीएसटी दरों का युक्तिकरण जैसे हालिया नीतिगत कदम, मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और उपभोग मांग को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


