मोहम्मद यूनुस का असली चेहरा उजागर

बांग्लादेश के पूर्व खुफिया अधिकारी और राजनयिक अमीनुल हक पोलाश ने पहली बार मुहम्मद यूनुस का असली चेहरा उजागर किया है। पोलाश, शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद देश छोड़कर बाहर रह रहे हैं और उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें क्यों देश छोड़ना पड़ा।
पोलाश के मुताबिक, यूनुस के हाथ में ताकत और आर्थिक नेटवर्क है। उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा दुनिया के सामने दिखाई देने वाली छवि से बिल्कुल अलग है। पोलाश कहते हैं कि उन्होंने लगभग 10 साल राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश सेवा में काम किया। सब कुछ ठीक था लेकिन जैसे ही उनकी जांच यूनुस के आर्थिक नेटवर्क तक पहुंची, उन्हें चुप रहने की धमकियां मिलने लगीं। उनके मुताबिक, उनके खिलाफ न्यूट्रलाइज और गायब कर दो जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे थे। भारत में उनकी डिप्लोमैटिक पोस्ट अचानक वापस बुला ली गई। ऐसे में यह साफ संकेत था कि वापस जाना जान जोखिम में डालने जैसा होगा। इसलिए निर्वासन उनका मजबूरी का फैसला था। वे ऐसा कभी नहीं चाहते थे। अपने परिवार को बचाने और जिंदा रहने का एक यही तरीका था। उन्होंने कहा दुनिया यूनुस को संत मानती है, लेकिन बांग्लादेश के अंदर उनकी एक पूरी आर्थिक और संस्थागत पकड़ दिखती है। संस्थाओं को कैप्चर करने का, लोगों के पैसे को प्राइवेट करने का और ये तय करने का कि कभी भी कोई इस तक न पहुंच सके। ग्रामीण बैंक के पैसों को सामाजिक उन्नयन फंड से निकालकर निजी संस्था ग्रामीण कल्याण में भेजा गया। इसके बाद करीब 50 संस्थाओं का एक नेटवर्क बन गया, जिनका अंतिम नियंत्रण सिर्फ यूनुस के पास था। लोग समझते थे कि ये अलग संस्थाएं हैं लेकिन नहीं था। ग्रामीण टेलिकॉम ने 2022 तक 10,890 करोड़ टका डिविडेंड कमाए, पर मजदूरों को हिस्सा नहीं मिला। कई संस्थाएं अपना नुकसान दिखाती रहीं, पर पैसा उसी नेटवर्क में घूमता रहा। जिस आदमी को गरीबों का मसीहा माना जाता था, उसने बेसिक लेबर लॉ का भी पालन नहीं किया। ग्रामीण टेलिकॉम के कर्मचारियों को लेकर कानूनी मामला वर्षों चला और अदालत ने सबूतों के आधार पर यूनुस के खिलाफ फैसले दिए। जब साल 2024 में अंतरिम सरकार बनी तो यह निर्णय गायब हो गया।



