लेखक की कलम

नक्सलियों पर सीएम की अपील का प्रभाव

समाज से भटक कर हिंसा का रास्ता अपनाने वाले नक्सलियों से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपील की थी कि वे सरकार की पुनर्वास नीति अपनाएं। हालांकि सीएम ने इसके साथ चेतावनी भी दी थी कि किसी को भी हथियार उठाने की अनुमति नहीं है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अपील का प्रभाव गत दिनों (7 दिसंबर 2025) बालाघाट में दिखाई दिया। यहां 10 इनामी नक्सलियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष समर्पण किया। ये सभी गोंड जनजाति के हैं। इन पर सरकार ने ईनाम घोषित कर रखा था। इनमें चार महिला नक्सली हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य के तहत राज्य को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लेकर काम कर रहे हैं। अच्छी बात है कि नक्सली कई राज्यों में समर्पण कर रहे हैं लेकिन अभी बीते दिन छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों का आतंक दिखा था। यहां सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। हालांकि रोजगार और पुनर्वास के प्रयासों से प्रभावित होकर कई नक्सली समर्पण कर रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि देश को शीघ्र ही नक्सली समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नक्सलियों ने नवम्बर में समर्पण करने के लिए तीनों मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी भी लिखी थी।
देश में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत कई बड़े और इनामी नक्सली मारे जा चुके हैं और कई ने सरेंडर किया है। ताजा मामला मध्य प्रदेश के बालाघाट का है। यहां 10 इनामी नक्सलियों ने सीएम मोहन यादव के सामने सरेंडर किया है, जिसमें 4 महिला नक्सली भी शामिल हैं। सीएम मोहन ने उन्हें संविधान की प्रति सौंपी और मुख्यधारा से जोड़ा।
इससे पूर्व छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले बीजापुर में नक्सलियों का आतंक दिखा था। जहां सड़क निर्माण ठेकेदार की नक्सलियों ने हत्या कर दी। पुलिस ने कहा कि ठेकेदार इम्तियाज अली का शव पामेड पुलिस थाना क्षेत्र में एक सुरक्षा शिविर के पास मिला। ठेकेदार अली को इलाके में सड़क निर्माण का काम सौंपा गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, माओवादी मिलिशिया के सदस्यों के एक समूह ने मेटागुडा सुरक्षा शिविर के पास मिला। अली से मारपीट की और उसे अगवा कर लिया। अली का सहायक सुरक्षा शिविर पहुंचा और पुलिस को घटना की जानकारी दी। इसके बाद इलाके में तलाश अभियान शुरू किया। राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सली अक्सर सड़क निर्माण ठेकेदारों पर हमला कर निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों व मशीनों को नुकसान पहुंचाकर सड़क निर्माण कार्यों में बाधा डालने की कोशिश करते हैं। नक्सलियों से आह्वान किया कि वे सरकार की पुनर्वास नीति अपनाएं। सरकार उनके जीवन को सुरक्षित करने, विकास सुनिश्चित करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों और जवानों की तारीफ की और कहा कि एंटी नक्सल अभियान को लगातार सशक्त और सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश में 15 नवीन अस्थायी कैंप और विशेष सहयोगी दस्ता के 882 पद स्वीकृत किए गए हैं। सतत निगरानी, सघन जांच और कार्रवाइयों से प्रदेश में नक्सली दायरा तेजी से घटा है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पिछले वर्ष 46 एकल सुविधा केंद्र खोले गए। इन केंद्रों के माध्यम से रोजगार, वन अधिकार पत्र और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
डीजीपी कैलाश मकवाना ने कहा कि सीएम मोहन यादव के नेतृत्व में एंटी नक्सल अभियान को सशक्त किया गया है। नए कैंप स्थापित किए गए हैं, हॉक फोर्स और पुलिस बल में वृद्धि की गई है। साथ ही अधिकारियों और जवानों को सतत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन कार्रवाइयों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी नक्सल समर्पण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं और नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मध्य प्रदेश पुलिस, निर्धारित समय-सीमा में नक्सल मुक्ति के लिए प्रतिबद्ध है। नक्सल आंदोलन को पिछले कुछ महीनों में मिले सबसे बड़े झटकों में से एक और झटका तब लगा है जब सीपीआई (माओवादी) के स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य अनंत उर्फ विकास नागपुरे ने अपने 11 साथियों के साथ गोंदिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह सरेंडर महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर इलाके में चल रहे सुरक्षा अभियानों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक यह ग्रुप कई जिलों में सक्रिय था और बड़े-बड़े हिंसक वारदातों, भर्ती अभियान और उगाही के नेटवर्क में शामिल रहा था। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री भी बरामद हुई है। समर्पण करने वाले डीवीसीएम कमांडर नागासु गोलू वड्डे, रानो पोरेती, संतु पोरेती, संगीता पंधारे, प्रताप बंटुला, अनुजा कारा, पूजा मुडियम, दिनेश सोत्ती, शीला मड़ावी, अर्जुन डोडी शामिल थे।
पुलिस का कहना था कि टॉप नक्सली लीडर हिड़मा के मारे जाने के बाद संगठन में पैदा हुए नेतृत्व के खालीपन के बाद यह पहला बड़ा सामूहिक सरेंडर है। माना जा रहा है कि इनका सरेंडर गढ़चिरौली और आसपास के इलाकों में नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने की दिशा में एक अहम कदम है। सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों को महाराष्ट्र सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बताया गया। गढ़चिरौली रेंज के डीआईजी अंकित गोयल ने बताया, श्लगभग 7-8 दिन पहले माओवादी के एमएमसी जोन
(मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) के प्रवक्ता ने सरेंडर करने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दो चिट्ठियां भी लिखी थीं। उनकी इस इच्छा को ध्यान में रखते हुए हमने उनसे संपर्क साधा। इसके बाद वे अपने 10 साथियों सहित सरेंडर करने पहुंच गए। इन लोगों ने 7 हथियार भी जमा कराए। सभी पर महाराष्ट्र सरकार ने कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। ये सभी सीपीआई (माओवादी) के सदस्य हैं। डीआईजी अंकित गोयल ने कहा कि यह घटना समन्वित पुलिसिंग और नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए चलाए जा रहे आउटरीच प्रोग्राम की बढ़ती कामयाबी को दिखाती है।
माओवादियों की महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी यानी एमएमसी जोन कमेटी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को एक लेटर लिखा था। इस लेटर में, उन्होंने अपने दो सीनियर साथियों, महाराष्ट्र में सरेंडर करने वाले भूपति और छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने वाले सतीश के नक्शेकदम पर चलते हुए सरेंडर करने की इच्छा जताई है थी। एमएमसी जोन के सभी माओवादी सब मिलकर सरेंडर करेंगे। हालांकि, एमएमसी जोन के माओवादियों ने इस लेटर के जरिए एक-दूसरे से बात करने के लिए 15 फरवरी, 2026 की डेडलाइन मांगी थी।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button