योगी की अटल को विशेष श्रद्धांजलि

महान विभूतियों को नयी पीढ़ी भी याद करे और उनसे प्रेरणा ले, इसी उद्देश्य से उनके स्मारक बनाये जाते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जिनकी तारीफ उनके राजनीतिक विरोधी भी किया करते थे। उनका जन्मदिन 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल जी को विशेष श्रद्धांजलि देते हुए लखनऊ में गोमती के किनारे पे्ररणा स्थल बनवाया है जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसंबर को करेंगे। इस प्रेरणा स्थल पर पंडित अटल बिहारी वाजपेयी के साथ ही दीनदयाल उपाध्याय और डा0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमाएं भी लगायी गयी हैं। निश्चित रूप से इनसे नयी पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। हालांकि लखनऊ में स्मारकों की सियासत भी जमकर हुई है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी सरकार के दौरान आम्बेडकर उद्यान ही नहीं कांशीराम स्मारक स्थल और कांशीराम के साथ स्वयं की प्रतिमा भी लगवा दी। इसी प्रकार समाजवादी पार्टी की सरकार ने लखनऊ में लोहिया पार्क के साथ जनेश्वर मिश्र पार्क बनवाया है। इस स्मारकों पर खर्च को लेकर उंगलियां भी उठी हैं। माना जाता है कि सपा के जनेश्वर मिश्र पार्क पर 900 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि बसपा के स्मारकों पर 6 हजार करोड़ से अधिक व्यय हो गया। इसके बावजूद स्मारकों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता।
उत्तर प्रदेश में हर सरकार ने अपनी विचारधारा और नेताओं को अमर करने के लिए भव्य स्मारक बनवाए हैं। समाजवादी पार्टी ने लोहिया पार्क और जनेश्वर मिश्र पार्क जैसे प्रतीक स्थलों का निर्माण करवाया, तो बहुजन समाज पार्टी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम जैसे नेताओं के सम्मान में 6 से अधिक स्मारक बनवाए। अब भारतीय जनता पार्टी भी इस दौड़ में शामिल हो चुकी है। आठ साल के लंबे इंतजार के बाद बीजेपी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट राष्ट्र प्रेरणा स्थल अंतिम चरण में है। 2019 में योगी सरकार ने लखनऊ में गोमती नदी के किनारे करीब 67 एकड़ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल के निर्माण की घोषणा की थी। इस स्मारक में बीजेपी के प्रेरणा स्रोत रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य मूर्तियां स्थापित की गयी हैं। इसके अलावा, सवा लाख लोगों की जनसभा के लिए विशाल ग्राउंड भी बनाया जा रहा है, जो बीजेपी के बड़े सियासी आयोजनों का केंद्र बन सकता है।
बसंतकुंज योजना में 65 एकड़ में बनाए गए कमल के आकार वाले राष्ट्र प्रेरणा स्थल के लोकार्पण की तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं। इस समय स्थल पर फूलों की सजावट तेजी से चल रही है। इसके लिए
आंध्र प्रदेश, नैनीताल, दिल्ली, पुणे से विशेष सजावटी फूल वाले डेढ़ लाख पौधे मंगाए गए हैं। वहीं, प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगी एसपीजी टीम ने 22 दिसंबर को पूरे स्थल की जांच की। डॉग स्क्वाॅयड ने भी चप्पे-चप्पे की पड़ताल की। सुरक्षा को देखते हुए पूरे आयोजन स्थल को सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी निगरानी में ले लिया है।राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। ऐसे में आयोजन की तैयारी में कोई खामी न रहे, इसके लिए सीएम योगी ने भी राष्ट्र प्रेरणा स्थल का दौरा किया था और तैयारियों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए थे। आयोजन में करीब 2000 बसों के आने का अनुमान है। इसके लिए 13 पार्किंगस्थल बनाए गए हैं, जिनमें 2600 बसें और 2000 कारें खड़ी हो जाएंगी।गुलाब, गुलदाउदी, जाफरी, मॉरिगोल्ड पैनसूटिया लाल व पीला, चांदनी, एरिका पॉम, सैल्विया, मैक्सिकन कारपेट ग्रास, माइको कार्पा, मधुकनी आदि के फूल और पौधों से परिसर को सजाया गया है। वार्टिकल गार्डन भी लगाए हैं। जहां प्रतिमाएं लगी हैं, वहां फौव्वारे भी लगाए गए हैं उसके लिए कमल की आकृति वाली डिजाइन बनाई गई जिसमें पानी भरा है और उसमें गुलाब डाले गए हैं।
गोमती के तट पर बने प्रेरणा स्थल पर पीएम नरेन्द्र मोदी 25 दिसंबर को हेलीकॉप्टर से पहुंचेंगे। आयोजन स्थल पर तीन हेलीपैड भी बने हैं। एसपीजी की टीम ने यहां भी जांच की। हेलीकाॅप्टर से पहुंचने से शहर में आवागन प्रभावित नहीं होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा, राष्ट्र प्रेरणा स्थल केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला एक प्रतीक होगा। इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि, 2025 के अंत तक इस स्मारक को जनता के लिए खोलने की योजना है।
सपा ने अपनी सरकार के दौरान लखनऊ में लोहिया और जनेश्वर मिश्र पार्क का निर्माण करवाया था। लोहिया पार्क, जो समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया के नाम पर बनाया गया, न केवल एक हरा पार्क है, बल्कि सपा की समाजवादी विचारधारा का प्रतीक भी है। इसका निर्माण करीब 70 एकड़ में किया गया है। वहीं, जनेश्वर मिश्र पार्क, जो 376 एकड़ में फैला है, एशिया के सबसे बड़े पार्कों में से एक माना जाता है। इस पार्क को सपा ने अपने प्रमुख नेता जनेश्वर मिश्र की स्मृति में बनवाया था। सपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अक्सर इन पार्कों को अपनी सरकार की उपलब्धि के रूप में पेश किया है। गत 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान अखिलेश ने कहा था कि हमने पार्क बनाए ताकि लोग प्रकृति के बीच सुकून पाएं और समाजवादी विचारधारा से प्रेरणा लें। हालांकि, विपक्षी दलों, खासकर बीजेपी ने इनके निर्माण पर हुए खर्च की आलोचना की थी।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बताया कि जो पार्क सपा सरकार में बनवाए गए। वह आज भी इस सरकार के अधिकारियों के घूमने फिरने में काम आ रहे हैं। हर साल लाखों लोग इन पार्कों में आकर अखिलेश यादव की इस उपलब्धि से दो-चार होते हैं। भाजपा ने इस दौरान कुछ भी नहीं किया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने शासनकाल में लखनऊ और नोएडा में कई स्मारक बनवाए, जिनमें डॉ। भीमराव आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, कांशीराम स्मारक स्थल और रमाबाई आंबेडकर मैदान प्रमुख हैं। इन स्मारकों का उद्देश्य दलित वर्ग के बीच बसपा की विचारधारा को मजबूत करना था। लखनऊ का आंबेडकर पार्क, जिसमें भव्य मूर्तियां और संगमरमर का व्यापक उपयोग किया गया है, बसपा की सत्ता के दौरान दलित गौरव का प्रतीक बन गया। हालांकि, इन स्मारकों के निर्माण पर भारी-भरकम खर्च को लेकर मायावती की आलोचना भी हुई।
वर्ष 2007-2012 के अपने कार्यकाल में बसपा ने इन स्मारकों पर अरबों रुपये खर्च किए, जिसे विपक्ष ने जनता के पैसे का दुरुपयोग करार दिया। फिर भी, मायावती ने इन स्मारकों को दलित अस्मिता और सामाजिक न्याय का प्रतीक बताते हुए अपने फैसले का बचाव किया। सन् 2024 में एक सभा में मायावती ने कहा था कि ये स्मारक केवल पत्थर की मूर्तियां नहीं, बल्कि दलितों और वंचितों के आत्मसम्मान का प्रतीक हैं। इसलिए योगी आदित्यनाथ के शब्दों में राष्ट्र प्रेरणा स्थल केवल एक स्मारक नहीं बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला एक सुन्दर प्रतीक होगा। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



