लेखक की कलम

2026 भारत की प्रगति का लिखेगा नया अध्याय

भारत 2026 में भी दुनिया की चैथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने की राह पर है। इसके पीछे मजबूत आर्थिक वृद्धि, कम मुद्रास्फीति और बैंकिंग सेक्टर का सुदृढ़ प्रदर्शन जैसे कारक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 में जिस गति से अर्थव्यवस्था ने बढ़त दिखाई, उसे बनाए रखने के लिए सरकार नई सुधार योजनाओं पर काम कर रही है। केंद्र सरकार आगामी बजट में पूंजीगत व्यय और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि जीवन सुगमता और कारोबार सुगमता को बढ़ाकर भारत को निवेश के लिए और आकर्षक बनाना। इससे शुल्क और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। नए साल 2026 की शुरुआत शेयर बाजार के लिए उत्साह भरी रही। साल के पहले ही कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ आगाज किया, जिससे निवेशकों के चेहरे खिल उठे। घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। खास बात यह रही कि ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली। शेयर बाजार ने किया नए साल का स्वागत! 2026 के पहले दिन सेंसेक्स-निफ्टी में दिखा जोश, ऑटो सेक्टर के स्टॉक्स चमके
नए साल 2026 की शुरुआत शेयर बाजार के लिए उत्साह और उम्मीदों से भरी रही। बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स 186 अंकों की तेजी के साथ 85,406 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 65 अंक चढ़कर 26,194 के आसपास कारोबार करता दिखा।

भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ आगाज किया, जिससे निवेशकों के चेहरे खिल उठे। घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। खास बात यह रही कि ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली, जिसने बाजार को मजबूती दी।

बीएसई सेंसेक्स 1 जनवरी 186.17 अंकों की बढ़त के साथ 85,406.77 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, एनएसई निफ्टी 64.95 अंक चढ़कर 26,194.55 पर पहुंच गया। बाजार की चैड़ाई भी मजबूत रही, जहां कुल 1,284 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 728 शेयरों में गिरावट रही और 151 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह आंकड़े साफ तौर पर बाजार में सकारात्मक सेंटिमेंट की ओर इशारा करते हैं।सुबह के कारोबार में एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, टाटा स्टील, हिंदाल्को इंडस्ट्रीज और कोटक महिंद्रा बैंक भी प्रमुख मूवर्स के तौर पर उभरे। मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में आई मजबूती ने निवेशकों का ध्यान खींचा, जिससे इन सेक्टर्स में खरीदारी बढ़ी। भारतीय अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2025 में हर मोर्चे पर सफलता हासिल की और सबसे तेज गति से आगे बढ़ती रही। हाल ही में जापान को पछाड़कर भारत दुनिया की चैथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। अब भारत से आगे सिर्फ जर्मनी, चीन और अमेरिका ही हैं। वहीं,दुनिया की बड़ी आर्थिक संस्थाओं ने भारत की जीडीपी की चमकीली तस्वीर दिखाई है। अगर इसी गति से भारत आगे बढ़ता रहा तो अगले ढाई से तीन साल में जर्मनी को पछाड़ देगा और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातार बढ़ी है। 2025-26 की दूसरी तिमाही में यह 8.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। खुदरा मुद्रास्फीति साल के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक की निचली सीमा से दो प्रतिशत से भी कम रही। सरकार ने बताया कि भारत ने 4180 अरब डॉलर की जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़ते हुए चैथा स्थान हासिल कर लिया है। अनुमान है कि 2030 तक 7300 अरब डॉलर की जीडीपी के साथ भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है। बता दें 2025 में आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत घरेलू मांग, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोग, कम मुद्रास्फीति और स्थिर निवेश के कारण हुई। सेवा क्षेत्र का विस्तार लगातार बना रहा, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में भी वापसी हुई। कृषि में बेहतर खरीफ उत्पादन और पर्याप्त खाद्यान्न भंडार ने कीमतों को स्थिर रखने में मदद की। इन सभी कारकों ने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखा। आप को बता दें कि साल 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ बढ़कर 8.2 फीसद रही है। यह दिखाता है कि भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। भारत ने महंगाई पर काबू पाया। वहीं, बेरोजगारी दर भी कम हुई। जीएसटी में छूट देने से लोगों के पास पैसा आया और भारतीय अर्थव्यवस्था ने नया मुकाम हासिल किया। तमाम रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि 2026 में भी भारत जी-20 देशों में सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा। नवंबर में खुदरा महंगाई दर गिरकर 0.71 फीसद पर आ गई।

वहीं, नवंबर में बेरोजगारी दर कम होकर 4.7 फीसद रह गई है, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तरहै। देश में ग्रोथ रेट ऊंची है और महंगाई बेहद कम, इसे श्गोल्डिलॉक्सपीरियडश् कहा जाता है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में 6.5 फीसद और 2026-27 में 6.7 फीसद की रफ्तार सेबढ़ेगी। यह वृद्धि घरेलू मांग, कर कटौती और ब्याज दरों में कमी से प्रेरित होगी। मूडीज ने भी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक अनुमान लगाया है। एजेंसी का अनुमान है कि 2026 में 6.5 फीसद की वृद्धि दर रहेगी। यह वृद्धि घरेलू मांग, निर्यात बाजारों में विविधीकरण और अनुकूल मौद्रिक नीति रुख से समर्थित होगी।

मूडजी का अनुमान है कि भारत जी-20
अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। फिच ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.4 फीसद ग्रोथ का अनुमान जताया है। एडीबी ने भीभारत की अर्थव्यवस्था के लिए अपना अनुमान बढ़ाकर 7.2 फीसद कर दिया है,जो मजबूत मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और बढ़ते निवेश के कारण है।
वहीं, विश्व बैंक का अनुमान है कि भारत की जीडीपी बढ़ोतरी 2026 में 6.5फीसदी हो सकती है। बता दें कि भारत की जीडीपी का कुल वैल्यूएशन अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर (करीब 350 लाख करोड़) हो गया है। जापान को पीछे छोड़ने के बाद अगले 2.5 से 3 साल में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगाऔर साल 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर (655 लाख करोड़) की इकोनॉमी के साथ दुनिया में तीसरे नंबर पर आ जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई) ने ग्रोथ ट्रेंड को देखते हुए पूरे साल के लिए इसका अनुमान
6.8 फीसद से बढ़ाकर 7.3 फीसद कर दिया है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियां होने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकास करने को तैयार है। वहीं सरकार का कहना हैकि भारत 2047 तक उच्च मध्यम आय वाला देश बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। महंगाई अभी नियंत्रण में है और तय सीमा से नीचे है। बेरोजगारी धीरे-धीरे कम हो रही है और देश के निर्यात में लगातार सुधार हो रहा है। 2026 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर साबित होगा और रूपये का अवमूल्यन खत्म हो कर सकारात्मक रुख की ओर बढेगा।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)

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