विदेश

जर्मन के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पहली भारत यात्रा

जनवरी 2026 की शुरुआत भारत-यूरोप संबंधों के लिए कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज 12-13 जनवरी को अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय(एम ई ए) के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर मर्ज अहमदाबाद और बेंगलुरु का दौरा करेंगे। यह यात्रा न केवल भारत-जर्मनी द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देगी, बल्कि भारत और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक संवाद को भी रेखांकित करती है।
चांसलर मर्ज 12 जनवरी को अहमदाबाद पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री मोदी उनका स्वागत करेंगे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा होगी। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच यह रणनीतिक साझेदारी पिछले वर्ष 25 साल पूरे कर चुकी है। बातचीत में व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ रक्षा, सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार, हरित एवं सतत विकास तथा लोगों से लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब यूरोपीय संघ की शीर्ष नेतृत्व यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टाकृभी गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने भारत आने वाले हैं। लगातार हो रही ये उच्चस्तरीय यात्राएं यह संकेत देती हैं कि भारत और यूरोप आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यूरोपीय संघ में जर्मनी की अहम भूमिका और भारत के साथ उसके मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए, जर्मनी भारत का एक प्रमुख यूरोपीय साझेदार है।
प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज की पहली मुलाकात 17 जून 2025 को कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस समय, पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि में दोनों नेताओं ने आतंकवाद को वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बताया था। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाइयों के प्रति जर्मनी द्वारा जताई गई एकजुटता और समर्थन के लिए चांसलर मर्ज का आभार भी व्यक्त किया था।
भारत और जर्मनी के बीच मई 2000 से रणनीतिक साझेदारी कायम है, जिसे 2011 में सरकारों के प्रमुखों के स्तर पर अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) की शुरुआत से और मजबूती मिली। आज दोनों देश दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और आर्थिक तथा विकासात्मक सहयोग के मजबूत स्तंभ साझा करते हैं। इसके साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, बहुपक्षवाद और वैश्विक संस्थानों में
सुधार को लेकर भी दोनों देशों की सोच समान है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)

 

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