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बीमार सुप्रीम लीडर, मजबूत होती फौज

ईरान की सत्ता के केंद्र में इस समय एक असाधारण और जटिल स्थिति बनती दिख रही है। देश के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिसने न केवल उनकी व्यक्तिगत क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे शासन ढांचे को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल ही में हुए बम हमले में घायल होने के बाद उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर बताई जा रही है। हाथ की सर्जरी, चेहरे पर गंभीर जलन और एक कृत्रिम पैर की आवश्यकता जैसी परिस्थितियाँ उनके सामने हैं। हालांकि उनकी मानसिक स्थिति को स्थिर बताया जा रहा है, लेकिन शारीरिक सीमाओं ने उनकी सक्रिय भागीदारी को काफी हद तक प्रभावित किया है।
इस स्थिति का सबसे बड़ा प्रभाव ईरान की सत्ता संरचना पर पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई का अपने सैन्य अधिकारियों, खासकर युद्ध और कूटनीतिक वार्ताओं के दौरान, सीमित संपर्क रह गया है। इससे एक ऐसा सत्ता शून्य पैदा हुआ है, जिसे तेजी से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स भरता हुआ दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अब फैसले खामेनेई तक पूरी तरह से तैयार होकर पहुँचते हैं, जिनमें उनकी भूमिका केवल अंतिम स्वीकृति तक सीमित रह जाती है।
ईरान की अंदरूनी राजनीति के जानकारों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता अली खामेनेई की तरह पूर्ण नियंत्रण में नहीं हैं। उनके अनुसार, वास्तविक शक्ति अब काफी हद तक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हाथों में केंद्रित होती जा रही है, जो देश की सुरक्षा और विदेश नीति दोनों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। इस बदलते परिदृश्य का एक बड़ा उदाहरण तब देखने को मिला, जब अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता को अचानक रोक दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्णय सैन्य नेतृत्व द्वारा लिया गया, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे नागरिक नेताओं की भूमिका गौण रही। यह संकेत देता है कि ईरान में पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व की तुलना में सैन्य ढांचा अधिक प्रभावशाली होता जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि खामेनेई ने सत्ता संभालने के बाद से अब तक कोई सार्वजनिक उपस्थिति या भाषण नहीं दिया है। माना जा रहा है कि ऐसा उनकी कमजोर शारीरिक स्थिति को सार्वजनिक होने से बचाने के लिए किया जा रहा है। उनसे संवाद भी अब पारंपरिक माध्यमों के बजाय बंद लिफाफों में भेजे गए संदेशों के जरिए हो रहा है। पूर्व सलाहकार अब्दोलरेजा दवारी ने इस नई व्यवस्था को “बोर्ड-स्टाइल लीडरशिप” करार दिया है, जहाँ खामेनेई एक निदेशक की तरह भूमिका निभा रहे हैं और सैन्य जनरल्स बोर्ड के सदस्यों की तरह निर्णय ले रहे हैं। यह बदलाव ईरान की पारंपरिक केंद्रीकृत सत्ता से एक महत्वपूर्ण विचलन को दर्शाता है।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम तो बना हुआ है, लेकिन भविष्य की कूटनीति अनिश्चित दिखाई देती है। आंतरिक सत्ता संतुलन में हो रहे बदलाव और सैन्य प्रभाव के बढ़ते दायरे ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में ईरान की नीतियाँ और निर्णय किस दिशा में जाएंगे, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)

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