भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती

रूस और भारत के बीच ऊर्जा, उर्वरक और रणनीतिक सहयोग के नए आयाम खुलते नजर आ रहे हैं। हाल ही में रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव की भारत यात्रा ने दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों को एक बार फिर रेखांकित किया है। इस दौरान उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हुई, जिसमें ऊर्जा, व्यापार, उर्वरक और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात को “पारस्परिक रूप से लाभकारी” बताते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। खासतौर पर व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर दोनों पक्षों ने जोर दिया।
यह बैठक पिछले वर्ष दिसंबर में नई दिल्ली में हुई भारत-रूस शिखर वार्ता के परिणामों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपने बयान में कहा कि दोनों देशों ने ऊर्जा, उद्योग, उर्वरक और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में नए अवसरों की तलाश की है। साथ ही, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई, जो वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह है कि रूस ने भारत को अधिक मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। रूसी दूतावास के अनुसार, रूसी कंपनियां भारतीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, रूस ने यह भी बताया कि उसने 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 फीसद की वृद्धि की है और आगे भी यह सहयोग जारी रहेगा।यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में बाधाओं का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। ऐसे में रूस का यह कदम भारत के लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
रूस और भारत के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में रिएक्टर निर्माण परियोजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ रही है। इसके अलावा, रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। भारत द्वारा एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद इसका एक बड़ा उदाहरण है, जिसने दोनों देशों के रणनीतिक विश्वास को और मजबूत किया है।
कुल मिलाकर, यह यात्रा न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और रूस अपने संबंधों को और गहरा करने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। आने वाले समय में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम साबित हो सकती है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



