अध्यात्म

आत्म शक्ति देती है मौनी अमावस्या

भारतीय संस्कृति में हिन्दू महीना माघ बहुत पुण्यदायी माना जाता है। इसी महीने में भगवान सूर्य उत्तरायण में गमन करते हैं। प्रयागराज में पूरे महीने कल्पवास कर आस्था की डुबकी लगाई जाती है। इसी महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या की डुबकी लगाई जाती है। इसी महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। श्रीमद्भागवत मंे मौन धारण करने का भी महत्व बताया गया है। इसीलिए मौनी अमावस्या को मौन रखकर स्नान किया जाता है। मौन रखने से वाणी शुद्ध होती है और व्यक्ति के क्रोध का दमन हो जाता है। अमावस्या के दिन मौन रहने से चंद्रमा जनित दोष दूर होते हैं और मानसिक तनाव कम होता है। चिकित्सक भी मानते हैं कि हमारे शरीर की 70 फीसद से ज्यादा बीमारियां मानसिक तनाव के कारण होती हैं। इसलिए हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या को भी एक व्रत एवं पर्व के रूप में मनाते हैं। इस दिन भी खिचड़ी खाने और दान करने का विधान है। इस बार 18 जनवरी रविवार को मौनी अमावस्या होगी। श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर दान-दक्षिणा देकर पुण्य कमाएंगे। प्रयागराज मंे माघ मेले का यह तीसरा महत्वपूर्ण स्नान होगा।
हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का दिन आत्म-मंथन और आध्यात्मिक शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। साल 2026 में यह तिथि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इस दिन ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है। मत्स्य पुराण के अनुसार, मौन केवल चुप रहना नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा को भीतर की ओर मोड़ना है। मौनी अमावस्या के दिन चंद्रमा का प्रभाव क्षीण होता है, जिससे मन विचलित रह सकता है। मौन धारण करने से मन की चंचलता नियंत्रित होती है और मनुष्य अपनी अंतरात्मा के करीब आता है। माना जाता है कि मुख से बोलने वाले हजारों शब्दों से अधिक शक्तिशाली वह एक प्रार्थना होती है, जो मन के सन्नाटे में की जाए।
मौनी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए और साथ ही अपने इष्ट देवी-देवता की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से जीवन की सभी परेशानियां दूर होने लगती हैं। पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान करना और पितरों की आराधना अगर इस दिन करते हैं तो आपको पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इस दिन आपको जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, धन का दान करना चाहिए। ऐसा करना पुण्य फलदायक होता है। पितरों के निमित्त इस दिन आपको दक्षिण दिशा में चैमुखी दीपक जलाना चाहिए। इस दिन पंचबली देने से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं। पंचबली का अर्थ है कि घर में बनाए गए भोजन को गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और किसी ब्राह्मण को खिलाना। मौनी अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की आराधना करनी चाहिए और साथ ही इसकी परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा करना पितरों को प्रसन्न करता है। इस दिन मौन व्रत रखना भी शुभ माना जाता है, ऐसा करने से आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इसके साथ ही ध्यान और प्राणायाम भी आप इस दिन अवश्य करें।
मौनी अमावस्या के दिन आपको गलती से भी मांस, मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन जानवरों पर अत्याचार करने से बचें नहीं तो पितृ दोष लग सकता है। इस दिन किसी के भी साथ वाद-विवाद और झगड़ा आपको नहीं करना चाहिए। काम, क्रोध और लोभ को इस दिन खुद पर हावी न होने दें। माघ अमावस्या के दिन घर में गलती से भी गंदगी न रखें।
मौनी अमावस्या माघ स्नान का सबसे बड़ा दिन भी होता है। कहते हैं इसी दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था। इस दिन मौन व्रत रखने की भी परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन त्रिवेणी या गंगा जैसे पवित्र नदियों मंे स्नान-दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
इस साल की दूसरी अमावस्या 17 फरवरी दिन मंगलवार को पड़ रही है। फाल्गुन महीने में पड़ने वाली इस अमावस्या को फाल्गुनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। फाल्गुनी अमावस्या के दिन शिव योग और धनिष्ठा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस संयोग में किसी तीर्थ स्थल पर स्नान-दान करना बहुत ही लाभदायक रहेगा। चैत्र महीने की अमावस्या को दर्श अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह 19 मार्च दिन गुरुवार को पड़ेगी। इस दिन शुक्ल योग और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन व्रत रख स्नान-दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार वैशाख महीने की अमावस्या 17 अप्रैल, दिन शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन अमावस्या तिथि शाम 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। वैशाख अमावस्या पर सत्तू का दान
करना उत्तम माना जाता है। इसलिए इसे सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है।
इस वर्ष अधिक मास पड़ने के कारण ज्येष्ठ मास की दो अमावस्या पड़ रही है पहली तो 16 मई दिन शनिवार को पड़ेगी और दूसरी अमावस्या 15 जून, दिन सोमवार को पड़ रही है। इस दिन पवित्र नदी और तीर्थ स्थलों पर स्नान का कई गुना फल मिलता है। 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या है। इस अमावस्या पर स्नान-दान का विशेष महत्व माना जाता है। इसी क्रम में 12 अगस्त को श्रावण महीने में पड़ने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या या चितलगी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता हैं। श्रावण के महीने में चारों तरफ हरियाली होती है। इसलिए पुराणों में भी हरियाली अमावस्या को पर्यावरण संरक्षण के रूप में मनाने की बात कही गयी है। व्यक्ति को इस दिन कोई न कोई पौधा अवश्य लगाना चाहिए। इस तरह हर अमावस्या का अपना महत्व होता है।
(मोहिता-हिफी फीचर)

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