लेखक की कलम

महाराष्ट्र में सफल रहे फडणवीस

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)
विधानसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र मंे महानगर पालिका चुनाव राजनीतिक तिकड़म से लड़े गये। इनमंे कहीं पर भाजपा ने कांगे्रस से तालमेल किया तो चाचा शरद पवार ने अपने भतीजे अजित पवार को गले लगा लिया। उद्धव ठाकरे और राजठाकरे तो पहले ही हाथ मिला चुके थे लेकिन सफलता भाजपा को ही मिली। देवेन्द्र फडणवीस की रणनीति से भाजपा ने 29 महानगर पालिकाओं मंे ही बढ़त नहीं बनायी बल्कि शिवसेना से वृहन्न मुंबई कारपोरेशन अर्थात् बीएमसी भी छीन ली है। एकनाथ शिंदे ने भी साबित कर दिया कि उनका गुट मजबूत है। मुंबई मंे मुकाबला सबसे ज्यादा टक्कर का था। यहां भाजपा ने 227 मंे से 89 सीटें जीतकर पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना रही जिसे 65 सीटें मिली हैं। एकनाथ शिंदे की शिवसेना तीसरे स्थान रही है जिसको 29 कार्पोरेटर मिले। राजठाकरे की मनसे को भी 6 पार्षद मिले हैं। कांग्रेस ने भी बीएमसी मंे 24 सीटें जीती हैं। सबसे ज्यादा नुकसान यहां शरद पवार की एनसीपी को हुआ। उनको सिर्फ एक कार्पोरेटर मिल पाया जबकि उनके भतीजे अजित पवार को भी 3 ही सीटें मिली हैं। दूसरी प्रतिष्ठापूर्ण महानगर पालिका ठाणे थी जिसमंे एकनाथ शिंदे सबसे आगे रहे हैं। शिंदे की शिवसेना को 131 पार्षदों मंे 75 पार्षद मिले हैं, जबकि भाजपा यहां 28 सीटों पर ही भगवा फहरा सकी। यहां पर एनसीपी ने भी अपना प्रभाव दिखाया। शरद पवार के गुट को 12 सीटें मिलीं जबकि अजित पवार ने 9 सीटों पर सफलता प्राप्त की है। ठाणे मंे उद्धव ठाकरे को एक ही पार्षद मिल पाया है।
महाराष्ट्र के महानगरपालिका चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं और इसमें बीजेपी का बिगुल बजा है। शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा सीटें बीजेपी ने जीती हैं। दूसरे नंबर पर शिवसेना शिंदे गुट रहा और तीसरे स्थान पर सबसे ज्यादा सीटें कांग्रेस ने हासिल की हैं। ज्यादातर बड़े शहरों में बीजेपी ने अपना कमल खिलाया। मुंबई में मुकाबला टक्कर का था, लेकिन 89 सीटों जीतकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं, ठाणे और कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना-शिंदे गुट का जादू चला। ठाणे में शिंदे गुट ने 75 सीटें और कल्याण में 53 सीटें हासिल कीं।
इसके अलावा, पुणे और पश्चिम महाराष्ट्र में भाजपा की आंधी चली। पुणे में भाजपा ने 119 सीटें, पिंपरी-चिंचवड़ में 84 और सोलापुर में 87 सीटें जीतीं। हालांकि, कांग्रेस कोल्हापुर में अपनी साख बचाने में कामयाब रही। यहां उसने 34 सीटें पाईं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, सांगली में भाजपा ही 39 सीटों के साथ आगे रही।
वहीं, नागपुर में भाजपा ने 102 सीटों पर बड़ी जीत हासिल की। अमरावती और अकोला में भी भाजपा सबसे ज्यादा सीटें जीती। हालांकि, चंद्रपुर में बाजी पलट गई और कांग्रेस ने 27 सीटें हासिल कर लीं। नासिक, धुले और जलगांव में भी तीनों जगह भाजपा की विजय पताका लहराई। नासिक में 72 सीटें बीजेपी ने जीत लीं। हालांकि, मालेगांव में दिलचस्प मामला था, यहां लोकल पार्टी और एआईएमआईएम का बोलबाला रहा। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर और नांदेड़ में ठाकरे की पार्टी सबसे आगे रही।
परभणी से उद्धव ठाकरे गुट के लिए अच्छी खबर आई, जहां यूबीटी 25 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं, अहिल्यानगर में एनसीपी ने बाजी मारी और 27 सीटें जीत लीं। इस चुनाव में वसई-विरार की कहानी सबसे अलग थी। यहां न भाजपा चली, न शिवसेना और ना ही कांग्रेस। यहां बहुजन विकास अघाड़ी ने 70 सीटें जीतकर अपना जलवा कायम रखा।
यहां भी भाजपा ही आगे रही लेकिन अपने पुराने किले लातूर में कांग्रेस ने 43 सीटें जीत लीं।
महाराष्ट्र में सभी 29 महानगरपालिका के चुनाव संपन्न हो गए हैं। हालांकि सभी की निगाहें देश की सबसे अमीर नगर पालिका बीएमसी पर टिकी हुई है। बीएमसी में अभी मेयर नहीं चुना जा सका है। ऐसे में अब मेयर का चुनाव होने से पहले ही मुंबई में होटल पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। दरअसल, यहां मेयर चुने जाने के लिए 114 का जादुई आंकड़ा पार करना जरूरी है। हालांकि बीजेपी को यहां 89 वार्डों में जीत हासिल हुई है वहीं शिवसेना (यूबीटी) 65 वार्डों में जीती है। इसके अलावा शिवसेना (शिंदे) 29 वार्डों में, कांग्रेस 24 वार्डों में, एआईएमआईएम 8 वार्डों में एमएनएस 6 वार्डों में और एनसीपी 3 वार्डों में जीती है। ऐसे में भाजपा को मेयर पद के लिए शिवसेना का सहयोग जरूरी है।एक तरफ जहां चुनाव के दौरान बीजेपी और शिवसेना ने साथ मिलाकर चुनाव लड़ा तो वहीं अब मेयर चुने जाने से पहले शिवसेना एक्शन मोड में आ गई है। मेयर चुनने के लिए बीजेपी के पास भी बहुमत का आंकड़ा नहीं है। ऐसे में मेयर चुनाव से पहले शिवसेना के सभी नगरसेवकों को बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल पहुंचने के आदेश दिए गए थे। एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सभी निर्वाचित नगरसेवकों को बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में ले जाया गया। शिवसेना ने ऐसा इसलिए किया कि उसके नगर सेवकों को खरीदा या तोड़ा न जा सके। वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट बैठक में आज दोनों उपमुख्यमंत्री नहीं पहुंचे, जिसके बाद सियासी चर्चाएं और तेज हो गई थी। चुनाव से पहले ही अजित पवार ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था, वहीं कैबिनेट बैठक से पहले शिवसेना की ओर से कहा गया है कि एकनाथ शिंदे बीमार चल रहे हैं, जिस वजह से वह कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंच पाए। एक तरफ एकनाथ शिंदे मुंबई में हैं तो अजित पवार भी पुणे में होकर भी कैबिनेट बैठक में नहीं पहुंचे। माना जा रहा है कि चुनाव नतीजों में उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिलने से, दोनों डिप्टी सीएम निराश हैं।
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में जीत के बाद एआईएमआईएम के पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने संभाजीनगर में जश्न मनाया। इस दौरान उन्होंने जमकर भड़काऊ भाषण दिया। बता दें कि संभाजीनगर महानगरपालिका चुनाव के नतीजों में बीजेपी के बाद एआईएमआईएम दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यहां बीजेपी ने कुल 57 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि एआईएमआईएम के 33 उम्मीदवार विजयी हुए हैं। इस प्रकार 33 सीटें मिलने के बाद शहर में एआईएमआईएम कार्यकर्ताओं ने जोरदार जश्न मनाया। हालांकि, कांग्रेस के कुछ उम्मीदवारों द्वारा एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील को काले झंडे दिखाए भी दिखाए। संभाजीनगर में जीत के जश्न के दौरान एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने विवादित बयान भी दिया। उन्होंने मंच से बाप तो बाप होता है के नारे लगवाए। साथ ही कहा कि संभाजीनगर में सबको गाड़कर मरकज का झंडा लहराया है। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि जो लोग बहुत फड़फड़ा रहे थे, सबका हिसाब लिया जाएगा। आपको बता दें कि ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। छत्रपति संभाजीनगर में ओवैसी की पार्टी ने महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 30 सीटें जीती हैं तो वहीं मालेगांव 20 सीट, अमरावती में 15, नांदेड़ में 14, बीएमसी में 8 और नागपुर में 6 सीटें जीती है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button