पाक को रूस की चैखट से भी जिल्लत

आतंकियों के पनाहगार पाकिस्तान को अब रूस की चैखट से भी जिल्लत मिली है। रूस ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए साफ कर दिया है कि वह मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाएगा। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि विवाद को दोनों देशों को खुद द्विपक्षीय रूप से सुलझाना चाहिए और रूस केवल तभी मदद करेगा जब कोई देश विशेष रूप से अनुरोध करे। रूस के इस बयान को भारत के लिए कूटनीतिक सहारा माना जा रहा है। वहीं पाकिस्तान के लिए सख्त संदेश है कि तनाव का समाधान खुद बातचीत से निकाले, ना कि मदद के लिए दूसरे देशों की चैखट पर जाए।
दरअसल पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में तनाव कम करने में मध्यस्थ की भूमिका को लेकर रूस की क्या राय है, इस प्रश्न के उत्तर में रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने वेब पोर्टल पर कहा, रूस मध्यस्थ के रूप में कार्य नहीं करता है। इसमें आगे कहा गया, हालांकि, यदि ये देश अनुरोध करते हैं, तो हम उनके बीच किसी भी मतभेद को सुलझाने में हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए हमेशा तैयार हैं। मॉस्को इस बात पर जोर देता रहा है कि इस्लामाबाद को 1972 के शिमला और 1999 के लाहौर घोषणापत्र की भावना के अनुरूप द्विपक्षीय रूप से अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि 2025 में, रूस और पाकिस्तान के नेतृत्व स्तर पर कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें हुईं, जिनमें चीन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बैठक भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, राजनीतिक संपर्कों की यह सघनता निस्संदेह दोनों देशों की पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का विस्तार करने की इच्छा को दर्शाती है। आर्थिक मोर्चे पर, 2025 की सबसे महत्वपूर्ण घटना व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर रूसी-पाकिस्तानी अंतर-सरकारी आयोग की 10वीं बैठक थी।



