शांति वार्ता के बीच यूक्रेन में अंधेरी रात

यूक्रेन की राजधानी कीव से आई खबरों ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि युद्ध के मैदान में कूटनीति कितनी नाजुक और असुरक्षित होती है। शांति वार्ता के नए दौर से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर भीषण हमले किए, जिनमें तीन ऊर्जा कर्मियों की मौत हो गई और हजारों लोग बिजली व हीटिंग से वंचित हो गए। यह हमला ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका के समर्थन से यूक्रेन और रूस के बीच त्रिपक्षीय बातचीत शुरू होने वाली थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इन हमलों की तीखी निंदा की। उन्होंने बताया कि रात भर में यूक्रेन के 12 क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। जेलेंस्की के अनुसार यह हमला “जानबूझकर और योजनाबद्ध” था, जिसका मकसद यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र को अधिकतम नुकसान पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि शांति की बात तभी सार्थक हो सकती है, जब उसके पीछे न्याय और शक्ति दोनों का सहारा हो। रूस, जिसने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण शुरू किया था, सर्दियों के दौरान लगातार यूक्रेन के बिजली और हीटिंग ढांचे को निशाना बनाता रहा है। इन हमलों का असर आम नागरिकों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। ठंड के मौसम में बिजली और गर्मी की आपूर्ति बाधित होना केवल असुविधा नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल बन जाता है। यूक्रेन के उप-ऊर्जा मंत्री के अनुसार, तीनों ऊर्जा कर्मियों की मौत तब हुई, जब एक रूसी ड्रोन ने स्लोवियांस्क पावर प्लांट के पास उनकी कार को निशाना बनाया। यह इलाका अग्रिम मोर्चे के पास स्थित है, जिसे रूस शांति समझौते के बदले यूक्रेन से छोड़ने की मांग करता रहा है। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि युद्ध में तकनीकी ढांचे के साथ-साथ उन लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जो देश को चलाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। दक्षिणी यूक्रेन में स्थित काला सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर ओडेसा की बिजली आपूर्ति को “अत्यंत गंभीर” नुकसान पहुंचा है। निजी ऊर्जा कंपनी डीटीईके ने कहा कि क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत में लंबा समय लगेगा। इसके अलावा उत्तरी यूक्रेन के सुमी क्षेत्र में भी हीटिंग व्यवस्था प्रभावित हुई है। इस हमले से यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि रूस ने लगभग 400 ड्रोन और 29 मिसाइलें दागीं। हालांकि इनमें से अधिकांश को मार गिराया गया, फिर भी 13 ठिकानों को नुकसान पहुंचा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हमले की तीव्रता कितनी अधिक थी और उसका उद्देश्य केवल सैन्य नहीं, बल्कि नागरिक ढांचे को पंगु बनाना भी था।यह सब उस वक्त हुआ, जब स्विट्जरलैंड के जिनेवा में यूक्रेन और रूस के बीच अमेरिका समर्थित बातचीत शुरू होने वाली थी। सवाल यह है कि शांति वार्ता से पहले ऐसे हमले किस तरह का संदेश देते हैं। क्या यह दबाव बनाने की रणनीति है, या यह संकेत कि युद्ध की भाषा अभी भी कूटनीति पर हावी है? यूक्रेन के लिए यह संघर्ष केवल सीमाओं का नहीं, बल्कि अस्तित्व और भविष्य का सवाल बन चुका है। ऊर्जा संयंत्रों पर हमले देश की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने की कोशिश हैं। इन अंधेरी रातों के बीच यूक्रेन यह उम्मीद लगाए बैठा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाएगा, ताकि शांति वार्ता शब्दों से आगे बढ़कर वास्तविक राहत बन सके।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



