विदेश

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निर्णायक पहल

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग ने एक नया और महत्वपूर्ण चरण प्राप्त किया है। बेंगलुरु में आयोजित छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद के दौरान दोनों देशों ने भारत में ‘हैमर’ प्रक्षेपास्त्रों के संयुक्त निर्माण के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांस की रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी सैफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के बीच संपन्न हुआ।यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय वायुसेना की घटती लड़ाकू क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को स्वीकृति प्रदान की है। लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये की यह योजना वायुसेना की सामरिक शक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस वार्षिक रक्षा संवाद की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की सशस्त्र बल मंत्री कैथरीन वॉत्रां ने की। यह संवाद दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग की समीक्षा करने तथा भविष्य की रणनीति तय करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। यह बैठक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के समानांतर आयोजित हुई। बैठक के दौरान रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-निर्माण को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। इसके साथ ही भारतीय थलसेना और फ्रांसीसी थलसेना के बीच अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती की घोषणा की गई। दोनों देशों ने दस वर्षीय रक्षा सहयोग समझौते का नवीनीकरण भी किया, जो दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और फ्रांस की साझेदारी केवल हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को जोड़ना और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने में एक जिम्मेदार भूमिका निभा रहा है। फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉत्रां ने भारतीय सेना के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास शक्ति को दो वर्ष में एक बार से बदलकर प्रत्येक वर्ष किए जाने की सराहना की। उन्होंने इसे दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक बताया। आतंकवाद के विषय पर राजनाथ सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान द्वारा पोषित सीमा-पार आतंकवाद क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक ‘पहला सहायक’ और ‘शुद्ध सुरक्षा प्रदाता’ के रूप में लगातार सहयोग करता रहा है। कुल मिलाकर, हैमर प्रक्षेपास्त्रों के संयुक्त निर्माण का यह समझौता भारतदृफ्रांस रक्षा संबंधों को नई मजबूती देता है और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होता है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)

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