लेखक की कलम

नक्सली कमांडर देव जी का समर्पण

देश से नक्सलवाद का समापन होने के आसार अब साफ-साफ दिखने लगे हैं। अभी 22 फरवरी को छत्तीसगढ़ का नक्सली कमांडर देव जी ने आत्म समर्पण किया है। देव जी ने तेलंगाना पुलिस के सामने अपने हथियार डाले। नक्सलवाद की समस्या अब छत्तीसगढ़ तक ही मुख्य रूप से सीमित है। वहां भाजपा की सरकार है। नक्सली कमांडर देव जी जिसे मल्लव राजू रेड्डी, मुरली और संग्राम के नाम से भी जाना जाता है, मूल रूप से आंध्र प्रदेश का ही निवासी है। आंध्र प्रदेश का एक हिस्सा काटकर तेलंगाना राज्य बना है जहां अब कांग्रेस की सरकार है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसी साल के अंत तक नक्सलवाद के सफाए का लक्ष्य तय कर रखा है। इसके तहत कड़ी कार्रवाई भी हो रही है लेकिन हथियार डालने वालों को पुनर्वासित भी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा नक्सलवाद के समापन की कमान संभाले हुए हैं। वह कहते हैं कि नक्सली संगठन के महासचिव देव जी का पुनर्वासन सशस्त्र माओवाद के अंत की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक घटना है। उन्होंने कहा नक्सलवादी समाज की मुख्यधारा से जुड़ें, इस दिशा में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। नक्सली नेता बसवराजू के बाद देव जी ही सबसे बड़ा नक्सली नेता था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हिस्से में यह बहुत बड़ी सफलता मानी जाएगी। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश का हिस्सा हुआ। इस बार सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। एक तरफ समर्पण करने वालों को पुनर्वासित किया गया तो दूसरी तरफ उनको मुठभेड़ में मार गिराया गया। अभी बजट पेश करते समय राज्यपाल रमेन डेका ने अपने अभिभाषण में भी इसका उल्लेख किया। उन्होंने कहा दो साल के अंदर 532 माओवादी ढेर किये गये, और 2700 से ज्यादा ने आत्म समर्पण किया और 2004 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। निश्चित रूप से यह बदलाव छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है। छत्तीसगढ़ नक्सली कमांडर देवजी ने सरेंडर कर दिया है। उसने तेलंगाना में पुलिस के सामने अपने हथियार डाले। उसे मल्लव राजू रेड्डी, मुरली और संग्राम नाम से भी जाना जाता था। एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि शीर्ष माओवादी कमांडर और संगठन के प्रमुख रणनीतिकार थिप्पिरी तिरूपति उर्फ देवजी ने आत्मसमर्पण कर दिया है। देवजी को राज्य में नक्सलियों का बड़ा लीडर माना जाता था। वह तेलंगाना के जगतियाल जिले का रहने वाला हैं। देवजी के साथ कई अन्य नक्सलियों ने सरेंडर किया है। उसका आत्मसमर्पण देश में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की मार्च 2026 की समय सीमा से कुछ दिन पहले हुआ है। जानकारी के अनुसार उस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम भी था और उसने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बनाई थी। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि वह छत्तीसगढ़ में सक्रिय था। बसव राजू के न्यूट्रलाइज होने के बाद वह बड़ा नक्सली था। उन्होंने बताया कि तेलंगाना में देवजी ने सरेंडर किया है। डिप्टी सीएम ने कहा कि नक्सली समाज की मुख्य धारा से जुड़े इस दिशा में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जो भी नक्सली सरेंडर कर रहे हैं या करेंगे उनके लिए सभी इंतजाम किए जाएंगे।
इस आत्मसमर्पण को क्षेत्र में चल रहे माओवादी विरोधी अभियानों में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सफलता बताया जा रहा है। सुरक्षा बल छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रहा है। डिप्टी सीएम ने कहा कि हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करना है। वहीं सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे संघर्ष प्रभावित जिलों में शांति प्रयासों में तेजी आ सकती है और अधिक नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्यपाल रमेन डेका ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य अब वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद के खात्मे की कगार पर है। पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में स्पष्ट आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 532 माओवादी मारे गए। इसके अलावा 2,704 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया और 2,004 को गिरफ्तार किया गया। सरकार की सख्त कार्रवाई और बेहतर रणनीति के कारण यह संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से नक्सल नेटवर्क कमजोर हुआ है। यह राज्य में शांति स्थापना की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य की आकर्षक सरेंडर और पुनर्वास नीति का सकारात्मक असर पड़ा है। भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया गया है। सरकार उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। इससे कई युवाओं ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाया। उन्होंने कहा कि जब आतंक का का साया हटता है, तो विकास की रोशनी खुद-ब-खुद फैलती है और लोगों का जीवन बेहतर होता है। छत्तीसगढ़ सरकार में वित्त मंत्री ओपी चैधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा में बजट पेश किया है। इस बार छत्तीसगढ़ के लिए 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वित्त मंत्री ओपी चैधरी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट पेश करते हुए किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज देने की घोषणा की। इस बजट में लड़कियों के 18 साल पूरे होने पर डेढ़ लाख रुपये देने का प्रावधान भी रखा गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद प्रभावित बस्तर में एजुकेशन सिटी बनाने के लिए तैयार है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। बजट में पांच नालंदा लाइब्रेरी के लिए 22 करोड़ रुपये का प्रावधान भी रखा गया है। बस्तर में इंद्रावती नदी पर मतनार और देउरगांव बैराज बनाने के लिए बजट में 2,024 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये जगह कभी नक्सलियों का गढ़ कही जाती थी। बस्तर इलाके के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये दिए गए। बस्तर और सरगुजा ओलंपिक इवेंट्स के लिए 10 करोड़ रुपये दिए गए हैं। बस्तर और सरगुजा में डॉक्टरों की भर्ती होगी। इस जगह को रोड नेटवर्क कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए भी बजट में प्रावधान रखा गया है। उधर सीपीआई (माओवादी) के पूर्व नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू भूपति ने जंगलों में सक्रिय माओवादी कार्यकर्ताओं से हथियार डालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्हें वास्तविकता को समझना होगा और रूढ़ियों में फंसे नहीं रहना चाहिए। अपनी असफलताओं को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सशस्त्र संघर्ष में शामिल लोगों के लिए मुख्यधारा में लौटने और जनता के बीच काम करने का समय आ गया है। 15 अक्टूबर, 2025 को प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के 60 सदस्यों के साथ सोनू भपति ने आत्मसमर्पण किया था। उन्होंने कहा कि बदलती जमीनी परिस्थितियों ने निरंतर सशस्त्र संघर्ष को अव्यावहारिक बना दिया है और बचे हुए नक्सलियों से भी इसी मार्ग का अनुसरण करने का आग्रह किया। इस प्रकार छत्तीसगढ़
में एक नया इतिहास करवट ले रहा है। (हिफी)

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