सुपर टैंकरों से भारत पहुँचेगा वेनेजुएला का तेल

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है और इस बार उसकी निगाह भारत पर टिकी है। हाल के महीनों में वेनेजुएला ने अपने कच्चे तेल के निर्यात को बड़े पैमाने पर बढ़ाया है और अब विशालकाय टैंकरों, वीएलसीसी (वेरी लार्ज क्रूड कैरियर) के जरिए लगभग 20 लाख बैरल तक की खेप सीधे भारतीय तटों की ओर भेजी जा रही है। यह बदलाव केवल परिवहन का तकनीकी विस्तार नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति, प्रतिबंधों में ढील और ऊर्जा कूटनीति के नए समीकरणों का परिणाम है। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के बाद वेनेजुएला पर लगे कुछ प्रतिबंधों में नरमी आई है, जिससे उसकी सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए को निर्यात बढ़ाने का अवसर मिला है। अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियाँ विटोल और ट्रैफिगुरा जैसे बड़े नाम अब वेनेजुएला से तेल लोड कर भारत भेजने के लिए सुपरटैंकर चार्टर कर रहे हैं। पहले अधिकतर तेल मध्यम आकार के टैंकरों से अमेरिका या कैरिबियाई भंडारण केंद्रों तक जाता था, लेकिन अब सीधे भारत की ओर बड़े जहाजों की आवाजाही लॉजिस्टिक व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है।इन विशाल टैंकरों का सबसे बड़ा लाभ परिवहन लागत में कमी है। एक वीएलसीसी पारंपरिक सुएजमैक्स या अफ्रामैक्स टैंकरों की तुलना में दोगुनी से भी अधिक मात्रा में तेल ले जा सकता है। इससे प्रति बैरल ढुलाई खर्च घटता है और डिलीवरी की गति तेज होती है। वेनेजुएला के भंडारण टर्मिनलों पर जमा लाखों बैरल कच्चे तेल को निकालने में भी इससे मदद मिलेगी, जिससे उसकी निर्यात आय में वृद्धि संभव है। भारत के लिए यह घटनाक्रम रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। वर्ष 2019 से पहले भारत वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात लगभग बंद हो गया था। अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं। देश की प्रमुख निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाल में वेनेजुएला का भारी ग्रेड कच्चा तेल खरीदा है। इसके अलावा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और एचपीसीएल मित्तल एनर्जी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ भी खरीद में रुचि दिखा रही हैं। भारत की ऊर्जा नीति का प्रमुख उद्देश्य आयात स्रोतों में विविधता लाना और किसी एक देश पर निर्भरता कम करना है। रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदने पिछले वर्षों में राहत दी, लेकिन वैश्विक बाजार की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए नई आपूर्ति श्रृंखलाएँ बनाना आवश्यक हो गया है। वेनेजुएला का ‘मेरे’ जैसे भारी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट भारतीय रिफाइनरियों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हो सकती है, विशेषकर तब जब बड़े टैंकरों के जरिए ढुलाई सस्ती पड़े। वेनेजुएला का तेल निर्यात हाल में लगभग आठ लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुँच चुका है, जो पिछले महीनों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। यदि यह रफ्तार कायम रहती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। भारत और वेनेजुएला के बीच बढ़ता यह ऊर्जा सहयोग केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच एक व्यावहारिक साझेदारी का उदाहरण है, जो दोनों देशों के आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा दे सकता है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



