विश्व-लोक

भारत लेगा इजरायल से सुरक्षा कवच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तेल अवीव पहुंचने के साथ ही भारत और इजरायल के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि इस बार किसी हथियार की सीधी बिक्री नहीं होगी, बल्कि भारत की नजर एडवांस रक्षा तकनीक के हस्तांतरण पर रहेगी। भारत चाहेगा कि इजरायल उसे ऐसी तकनीक दे, जो उसने अब तक किसी अन्य देश को उपलब्ध नहीं कराया है।
इजरायली संसद कनेस्सट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में भारत और इजरायल जैसे भरोसेमंद साझेदारों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग बेहद जरूरी है। पीएम मोदी का इशारा यहां डिफेंस सेक्टर की ओर था, जिसे लेकर भारत की काफी उम्मीदें इजरायल से हैं। रूस और फ्रांस के साथ इजरायल भारत का बड़ा डिफेंस पार्टनर बन चुका है। इजरायल के उन्नत हथियारों के बारे में पूरी दुनिया जानती है। भारत चाहेगा कि वो सिर्फ हथियार नहीं, तकनीक दे ताकि उसका प्रोडक्शन भारत में ही हो सके। खबरों के मुताबिक यह नया रक्षा समझौता दो हिस्सों में हो सकता है-पहला रक्षा प्रणालियों में सहयोग और दूसरा आक्रामक हथियार प्रणालियों के विकास में साझेदारी।
रक्षा प्रणालियों के क्षेत्र में इजरायल की प्रमुख कंपनियों के सिस्टम पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज का एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम, राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स का डेविड्स स्लिंग और आयरन डोम शामिल हैं। इसके अलावा राफेल और एल्बिट सिस्टम्स का आयरन बीम सिस्टम भी चर्चा में है, जो लेजर तकनीक से लगभग 10 किलोमीटर तक के हवाई खतरों को खाक करने के लिए बनाया गया है। पिछले साल पाकिस्तान के साथ तनाव के दौरान तुर्की ड्रोन और चीनी पीएल-15 लंबी दूरी की मिसाइलों के इस्तेमाल से सबक लेते हुए भारत अपनी सीमाओं को और मजबूत करना चाहता है। भारत के पास पहले से रूस की ै-400, इजरायल की बराक प्रणाली और स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम है लेकिन वो इसे और विस्तार देना चाहता है।

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