विदेश

भारत-कनाडा रिश्तों में फिर तनाव के आसार

कनाडा और भारत के बीच कूटनीतिक संबंध एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर दिखाई दे रहे हैं। इसी सप्ताह कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे और संभावित व्यापार वार्ता से पहले एक सिख नेता को मिली सुरक्षा चेतावनी ने दोनों देशों के रिश्तों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।सिख फेडरेशन ऑफ कनाडा के प्रमुख मोनिंदर सिंह को वैंकूवर पुलिस विभाग ने “ड्यूटी टू वॉर्न” नोटिस जारी कर उनके जीवन पर “विश्वसनीय खतरे” की सूचना दी। सिंह के अनुसार, इस बार खतरे में उनके परिवार को भी शामिल बताया गया है। यह पहली बार है जब पुलिस ने उनकी पत्नी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कनाडा और भारत के संबंध पहले से ही खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और 2023 में हुए एक चर्चित हत्याकांड को लेकर विवादों में रहे हैं।
2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में सिख कार्यकर्ता हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने आरोप लगाया था कि इस हत्या के पीछे भारतीय एजेंसियों की भूमिका हो सकती है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था और उन्हें निराधार बताया था। कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि भारत से जुड़े कुछ आपराधिक गिरोह, विशेष रूप से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह, कनाडा में राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने में शामिल हो सकते हैं। इस संदर्भ में गैंग लीडर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि भारत सरकार ने ऐसे सभी आरोपों को राजनीतिक और असत्य करार दिया है। मोनिंदर सिंह का आरोप है कि उन्हें उनके राजनीतिक विचारों और खालिस्तान आंदोलन के समर्थन के कारण निशाना बनाया जा रहा है। वे लंबे समय से भारत में मानवाधिकार मुद्दों पर मुखर आलोचक रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कनाडा सरकार भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ा रही है, तो उसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा और सिख समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
दूसरी ओर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ऐसे समय भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के कारण कनाडा अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाना चाहता है। भारत एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति है और कनाडा के लिए बड़ा संभावित बाजार भी।भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कनाडा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “साबित करने का दायित्व आरोप लगाने वाले पर होता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ठोस सबूत सामने आते हैं तो भारत कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत की एजेंसियों की अपनी रिपोर्टें हैं, जिनमें कनाडा पर भारत में अलगाववादी गतिविधियों को समर्थन देने के आरोप लगाए गए हैं। दोनों देशों के बीच यह टकराव केवल दो सरकारों का विवाद नहीं है, बल्कि यह प्रवासी समुदाय, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जटिल समीकरणों से जुड़ा हुआ है। कनाडा में बड़ी संख्या में सिख समुदाय रहता है, जो इन घटनाओं को लेकर संवेदनशील है। वहीं भारत अपनी संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाता रहा है।ऐसे में मार्क कार्नी की भारत यात्रा केवल व्यापारिक समझौतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की परीक्षा भी होगी। जब तक सुरक्षा और कूटनीतिक आरोपों के मुद्दे स्पष्ट रूप से सुलझ नहीं जाते, तब तक व्यापारिक वार्ताएँ भी विवादों की छाया से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाएंगी।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)

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