भारत-इजराइल रिश्तों का नया अध्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि नई दिल्ली और यरुशलम के संबंध अब केवल भावनात्मक निकटता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ठोस नतीजों की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इजराइल के वित्त मंत्रालय के मुख्य अर्थशास्त्री शमुएल अब्रामजोन ने इसे “नेक्स्ट लेवल” का चरण बताया- एक ऐसा दौर जहाँ साझेदारी का फोकस प्रतीकवाद से हटकर परिणामों पर है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा उनके 2017 के ऐतिहासिक दौरे की निरंतरता मानी जा रही है। तब दोनों देशों ने मित्रता और रणनीतिक साझेदारी का विजन तय किया था। अब उसे जमीन पर उतारने का समय है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत और इजराइल के रिश्ते विश्वास, नवाचार और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं। हमारा सहयोग मानवता की भलाई के लिए है।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “दोनों देश शांति में विश्वास रखते हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध भी हैं।”सबसे अधिक चर्चा भारत-इजराइल मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव और नए व्यापार समीकरणों के बीच इजराइल इस समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने के पक्ष में है। अब्रामजोन ने संकेत दिया कि वार्ताएँ प्रगति पर हैं और दोनों पक्षों में उत्साह है, हालांकि समय-सीमा पर सतर्कता बरती जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा, “हम आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों तक ले जाना चाहते हैं। व्यापार और निवेश हमारे संबंधों का सशक्त स्तंभ बनेगा।”तकनीक, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सहयोग का अगला बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है। हाल के एआई शिखर सम्मेलन में इजराइली भागीदारी उल्लेखनीय रही। इजराइल नवाचार और अनुसंधान में अग्रणी है, जबकि भारत के पास पैमाना और विनिर्माण क्षमता है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत का पैमाना और इजराइल की नवाचार क्षमता मिलकर वैश्विक समाधान दे सकती है।” कृषि, जल प्रबंधन, सेमीकंडक्टर और नागरिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी के नए अवसर दिख रहे हैं। रक्षा सहयोग, जो दशकों से दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार रहा है, अब और अधिक संरचित रूप ले सकता है। यद्यपि विशिष्ट परियोजनाओं पर सार्वजनिक चर्चा सीमित है, परंतु यह स्पष्ट है कि रणनीतिक तालमेल गहरा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा, “हमारा रक्षा सहयोग हमारी साझा सुरक्षा चिंताओं की समझ पर आधारित है।”
इजराइल की नजर भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर भी है। विशेषकर वित्तीय प्रौद्योगिकी और डिजिटल भुगतान प्रणालियाँकृजिनमें भारत का एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) मॉडल विश्व स्तर पर चर्चा में है- इजराइल के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। विनिर्माण क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की पहल को भी सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। यरुशलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया विशेष सम्मान दोनों लोकतंत्रों के बीच राजनीतिक विश्वास का प्रतीक है। यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है- भारत और इजराइल अब साझेदारी को परिणामों में बदलने के लिए तैयार हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में यह संबंध नवाचार, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग की नई परिभाषा गढ़ सकता है। प्रतीकात्मक रोशनी से आगे बढ़ते हुए, अब दोनों देश ठोस उपलब्धियों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)



