जापान भी तैनात करेगा लम्बी दूरी की मारक मिसाइलें

जापान अपनी पहली स्वदेशी विकसित लंबी दूरी की मिसाइलों का पहला बैच तैनात करने की तैयारी में है। इन मिसाइलों के लॉन्चर सोमवार की सुबह सेना के कैंप में पहुंचाए गए हैं। ऐसा इस वजह से किया गया है क्योंकि जापान क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के जवाब में अपनी स्ट्राइक क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है। पीएम ताकाइची के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने बताया कि अपग्रेडेड टाइप-12 ग्राउंड-टू-शिप मिसाइलों को मार्च के अंत तक दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रीफेक्चर के कैंप केंगुन में तैनात कर दिया जाएगा।सेना की गाड़ियां लॉन्चर और अन्य उपकरण लेकर गोपनीय मिशन पर सुबह-सुबह पहुंचीं लेकिन इस दौरान कैंप के बाहर लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। विरोधियों ने पारदर्शिता की कमी को लेकर शिकायत की और कहा कि इस तैनाती से क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा, मिसाइलें दुश्मन के हमलों का निशाना बन सकती हैं। पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने मिसाइल तैनाती के शेड्यूल को एक साल आगे बढ़ा दिया था। जापान का यह कदम मुख्य रूप से चीन द्वारा ताइवान के आसपास बढ़ाए जा रहे तनाव के जवाब में है। बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।जापान को 1947 के बाद पहली बार, यानी कि 78 साल बाद पहली बार महिला प्रधानमंत्री मिलने की संभावना तेज हो गई है। सत्ताधारी पार्टी ने 64 साल की ताकाइची को अपना नेता चुना है। उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले ही चीन की टेंशन बढ़ गई है क्योंकि वह चीन को अपना दुश्मन समझती हैं। ताकाइची एक रूढ़िवादी राष्ट्रवादी हैं। वह मार्गरेट थैचर को अपना आदर्श मानती हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी सहयोगी रही हैं, जिनकी 2022 में हत्या हो गई। उनके राष्ट्रवादी विचारों से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। ऐसा माना जा रहा है कि वे जापान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन के साथ तनाव बढ़ा सकती हैं। ताकाइची ने आबे की तरह ऐतिहासिक मुद्दों पर सख्त हैं। ताकाइची का ‘जापान फर्स्ट’ नीति पर जोर देती हैं। ताकाइची सोशल कंजर्वेटिव भी हैं। वह समलैंगिक विवाह का विरोध करती हैं। उन्होंने दिसंबर 2020 में सरकार की जेंडर इक्वालिटी योजना को उन्होंने परिवार इकाई पर आधारित सामाजिक संरचना को नष्ट करने वाला बताया था। वहीं, उनकी विदेश नीति की बात करें तो ताकाइची चीन विरोधी मानी जाती रही हैं। वह चीन पर बौद्धिक संपदा चोरी की आलोचना करती हैं।



