ईरान का प्रतिशोध और भड़का

सुरक्षा प्रमुख की मौत के बाद ईरान अंगारे उगल रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष अपने चरम पर है। इस घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। ईरान के सेना प्रमुख आमिर हातिमी ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी की मौत पर कहा लारिजानी की हत्या का जवाब निर्णायक और अफसोसजनक होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, अली लारिजानी की मौत एक लक्षित हवाई हमले में हुई, जिसे इजराइल की कार्रवाई माना जा रहा है। यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान की रणनीतिक और प्रशासनिक संरचना पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। लारिजानी लंबे समय तक ईरान की सुरक्षा नीति और विदेश मामलों के अहम चेहरा रहे थे, इसलिए उनकी अनुपस्थिति से सत्ता के भीतर असंतुलन पैदा होने की आशंका है। इस घटना के बाद मसूद पेजेश्कियन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि ईरान इस हमले का जवाब देगा। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है। पहले ही दोनों देशों के बीच हमलों और जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है, जिसने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के लक्षित हमले आधुनिक युद्ध की नई रणनीति का हिस्सा हैं, जहां दुश्मन के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाकर उसकी निर्णय क्षमता को कमजोर करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इसका उल्टा असर भी हो सकता है, क्योंकि इससे प्रतिशोध की भावना और अधिक तीव्र हो जाती है।इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया का यह तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी प्रभाव डाल रहा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, इस संघर्ष के कारण खतरे में है। यदि यहां किसी प्रकार का व्यवधान आता है, तो इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कई देश संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। एक तरफ सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है, तो दूसरी तरफ संवाद की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।अंततः, अली लारिजानी की मौत केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक संकट का संकेत है। यह घटना बताती है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष अब केवल सीमित युद्ध नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यापक शक्ति संघर्ष में बदल चुका है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या वैश्विक शक्तियां इस संकट को शांत कर पाएंगी या दुनिया एक और बड़े टकराव की ओर बढ़ रही है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)



