नीतीश को मोदी का प्रशस्ति पत्र

एक मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री का लिखित रूप में धन्यवाद देना राजनीति के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि होती है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पत्र लिखकर उनकी तारीफ की है। नीतीश कुमार अब राज्य सभा के सदस्य हो गये हैं और बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री शीघ्र ही कुर्सी संभाल लेगा। इससे पहले ही 22 मार्च को बिहार दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परम्परागत संदेश देते हुए बिहार के ऐतिहासिक गौरव, सांस्कृतिक विरासत और विकास यात्रा के साथ ही नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में हुए बदलावों का विशेष रूप से जिक्र किया है। नीतीश कुमार की सरकार की तारीफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई बार चुनाव रैलियों और कार्यक्रमों में की है लेकिन इस बार उन्होंने नीतीश कुमार को तीन पन्नों का पत्र लिखा है। माना जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी ने 2014 में जब से प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली है तब से पहली बार नीतीश कुमार को व्यक्तिगत पत्र लिखा है। इसीलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस पत्र को सोशल मीडिया पर साझा कर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया है। नीतीश कुमार ने यह भी कहा है कि बिहार का विकास केन्द्र और राज्य की साझेदारी से ही संभव है। नीतीश कुमार बिहार की राजनीति से दूर नहीं रहना चाहते हैं, इसीलिए राज्यसभा का चुनाव जीतने के बाद बेटे निशांत से गले मिलकर वह भावुक भी दिख रहे हैं।
बिहार दिवस (22 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तीन पन्नों का पत्र लिखा जो राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इस पत्र में पीएम मोदी ने न केवल बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विरासत की सराहना की, बल्कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में सुशासन, सामाजिक कल्याण और राज्य के परिवर्तन की खुलकर प्रशंसा की। खास बात यह रही कि नीतीश कुमार ने भी तुरंत आभार जताया और केंद्र के सहयोग का जिक्र किया। दरअसल, यह पत्राचार राजनीतिक दृष्टिकोण से तब और महत्वपूर्ण लगता है जब नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य की सत्ता से राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ रहे हैं। राजनीति के जानकारों की नजर में यह बिहार की राजनीति की दृष्टि से खास मैसेज देता है। दरअसल, बिहार दिवस जैसे
सांस्कृतिक अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन इस बार इसकी टाइमिंग और भाषा पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में बिहार के ऐतिहासिक गौरव, सांस्कृतिक विरासत और विकास यात्रा की सराहना की, साथ ही नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए बदलावों को भी रेखांकित किया। यह उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के वर्षों में केंद्र और बिहार सरकार के रिश्ते कई बार राजनीतिक उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। ऐसे में अब जब नीतीश कुमार बिहार से राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख कर रहे हैं ऐसे में पीएम मोदी की ओर से सार्वजनिक रूप से प्रशंसा का यह स्वर एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस पत्र की बड़ी विशेषता इस रूप में भी देख सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का यह पत्र 2014 में केंद्र की राजनीति में उनके पदार्पण के बाद नीतीश कुमार को लिखा गया पहला विस्तृत व्यक्तिगत संदेश है। इसमें भगवान बुद्ध, चाणक्य-चंद्रगुप्त की कूटनीति से लेकर स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण तक बिहार की भूमिका का जिक्र है। पीएम ने पटना और पूर्णिया एयरपोर्ट टर्मिनल, आउंटा-सिमरिया पुल, राष्ट्रीय मखाना बोर्ड जैसे विकास कार्यों का उल्लेख किया। सबसे महत्वपूर्ण, उन्होंने नीतीश पर सीधे प्रकाश डालते हुए लिखा, “आपके नेतृत्व में बिहार ने गहन परिवर्तन देखा है। सुशासन और समाज के सभी वर्गों के कल्याण के प्रति आपकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ने राज्य में विश्वास, स्थिरता और प्रगति की नई लहर शुरू की है।” पीएम ने 2014 के बाद केंद्र से बढ़ी सहायता और वैश्विक बिहारी प्रवासियों की भूमिका भी सराही। साफ है कि भारत की सत्ता के शीर्ष की ओर से लिखा गया यह पत्र नीतीश कुमार के दो दशकों के सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधारों को मान्यता देता हुआ प्रतीत हो रहा है।
नीतीश कुमार ने पत्र को सोशल मीडिया पर साझा कर प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “बिहार की पूरी जनता की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार। आपके मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग से बिहार के मेहनती और प्रतिभाशाली लोग राज्य और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।” सीएम नीतीश कुमार का यह जवाब उनकी पुरानी रणनीति को मजबूत करता है कि बिहार का विकास केंद्र-राज्य साझेदारी से ही संभव है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए केंद्र के सहयोग का जिक्र किया। यह प्रतिक्रिया भी राजनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि इसमें टकराव की बजाय तालमेल का संकेत मिलता है। नीतीश कुमार का यह रुख बताता है कि वे एक संतुलित रणनीति पर काम कर रहे हैं। खासकर तब, जब उनकी भूमिका राज्य से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर होने जा रही है।
राजनीति के जानकारों की दृष्टि में पीएम मोदी का यह पत्र कई अन्य मायनों में भी महत्वपूर्ण है। यह नीतीश कुमार के शासन रिकॉर्ड को सार्वजनिक रूप से मान्यता देता है, ताकि उनकी विदाई को ‘झटका’, ‘धक्का’ या फिर बिहार और बिहारवासियों के संदर्भ में ‘सदमा’ न माना जाए। पीएम मोदी की इस सार्वजनिक प्रशंसा से जेडीयू कार्यकर्ता और ईबीसी-महादलित आधार को आश्वासन मिलता है कि नीतीश कुमार की विरासत सुरक्षित है। वहीं, भाजपा के लिए यह गठबंधन की वफादारी को मजबूत करता है। राजनीति के जानकारों का विशेष रूप से मानना है कि पीएम मोदी, नीतीश कुमार को राष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक भूमिका देने का संकेत दे रहे हैं, न कि कोई सेवानिवृत्ति का संकेत है। एक और खास बात यह कि पिछले गठबंधन बदलावों के विपरीत, यहां कोई तनाव नहीं दिखता जो एनडीए की परिपक्वता दर्शाता है। पीएम मोदी के पत्र से यह भी संकेत और बिहार की जनता को एक तरह से आश्वासन मिलता है कि सत्ता का सुकून भरा हस्तांतरण होगा, नीतीश कुमार के जाने के बाद शासन में भाजपा की प्राथमिकताएं तो बढ़ेंगी, लेकिन नीतीश युग की कल्याण योजनाएं बनी रहेंगी।
नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों में 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं। अब राज्यसभा की ओर कूच कर रहे हैं और अपेक्षा है कि 30 मार्च तक विधान परिषद से इस्तीफा देकर अप्रैल के बाद राज्यसभा सदस्य बन जाएंगे।
नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव में जीत की खबर मिलते ही पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर उत्सव का माहौल बन गया। एक ओर जहां जदयू नेताओं और समर्थकों ने उन्हें बधाई दी, वहीं जश्न के बीच एक भावुक पल भी सामने आया। यह खास पल तब लोगों ने अपनी नजरों से देखा जब
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अपने पिता के पास पहुंचे। इसमें विशेष यह कि आमतौर पर राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार भी इस मौके पर काफी खुश नजर आए। उन्होंने इस पल पर आगे बढ़कर अपने पिता को जीत की बधाई दी और गले लगा लिया। नीतीश कुमार के अगले
कदम को लेकर भी अटकलें तेज हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, वे
जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि 8 या 9 अप्रैल के आसपास इस्तीफा दिया जा सकता है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



