नजाकत अली की इंसानियत को सलाम

22 अप्रैल 2025 का दिन भारत के लिए एक दर्दनाक याद बन गया, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरान वैली जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है में आतंकियों ने निर्दोष पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई और पूरी घाटी चीख-पुकार और अफरा-तफरी से गूंज उठी। खुले मैदान में फंसे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे, लेकिन कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं था।
इसी भयावह माहौल के बीच एक नाम उम्मीद बनकर सामने आयाकृनजाकत अली। लगभग 30 वर्षीय नजाकत, जो पेशे से एक टूरिस्ट गाइड और शॉल व्यापारी हैं, उस दिन छत्तीसगढ़ से आए 11 पर्यटकों के साथ बेसरान वैली में मौजूद थे। वह बच्चों के साथ जिपलाइन एग्जिट प्वाइंट के पास इंस्टाग्राम रील बना रहे थे, जब अचानक गोलियों की आवाज गूंजने लगी।
शुरुआत में नजाकत को लगा कि यह सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ है लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आ गई, जब आतंकियों ने सीधे पर्यटकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उस पल, नजाकत ने घबराने की बजाय हिम्मत दिखाई। उन्होंने तुरंत अपने साथ मौजूद पर्यटकों को जमीन पर लेटने को कहा और कुछ ही मिनटों में अपने अनुभव और इलाके की गहरी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए उन्हें सुरक्षित रास्ते की ओर ले जाने लगे।
करीब सात किलोमीटर तक घने जंगलों और मुश्किल रास्तों से गुजरते हुए नजाकत ने सभी 11 पर्यटकों को सुरक्षित पहलगाम पहुंचाया लेकिन उनकी बहादुरी यहीं खत्म नहीं हुई। जब उन्हें पता चला कि दो महिलाएं पीछे जंगल में छूट गई हैं, तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना वापस उसी खतरे के इलाके में जाने का फैसला किया। नजाकत ने उन दोनों महिलाओं को ढूंढकर सुरक्षित बाहर निकाला। यह कदम उनकी अदम्य साहस और इंसानियत का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया। इस हमले ने नजाकत के निजी जीवन को भी गहरा जख्म दिया। उनके मामा के बेटे, सैयद आदिल शाह, इस आतंकी हमले में शहीद हो गए। व्यक्तिगत क्षति के बावजूद, नजाकत ने दूसरों की जान बचाने को प्राथमिकता दी जो उनके चरित्र की महानता को दर्शाता है। हमले की पहली बरसी पर जब नजाकत ने उस दिन को याद किया, तो उनके शब्दों में दर्द भी था और गर्व भी। हाल ही में छत्तीसगढ़ के रायपुर में उन्हें सम्मानित किया गया, जहां उन्हें एक मंत्री द्वारा फूल और पदक देकर सम्मान दिया गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद थे।
नजाकत अली की यह कहानी केवल बहादुरी की नहीं, बल्कि इंसानियत, जिम्मेदारी और कश्मीर की असली तस्वीर की कहानी है। उन्होंने कहा, “सिर्फ एक नहीं, बल्कि सैकड़ों नजाकत यहां मौजूद हैं, जो पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं।” यह बयान उस भरोसे को मजबूत करता है कि आतंक का साया चाहे जितना गहरा क्यों न हो, इंसानियत की रोशनी हमेशा उससे ज्यादा चमकदार
होती है।
कार्रवाई से हो या कूटनीतिक माध्यमों से।प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए कहा कि हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य और संतुलित कूटनीति की आवश्यकता होगी।
स्पष्ट है कि इजराइल-लेबनान सीमा पर शांति अभी दूर की कौड़ी है। संघर्षविराम केवल एक अस्थायी विराम साबित हो रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में तनाव और अविश्वास लगातार गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीति इस संघर्ष को थाम पाती है या क्षेत्र एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ता है।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



