संघर्ष-विराम के साए में भी टकराव

मध्य पूर्व एशिया एक बार फिर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, जहां संघर्षविराम के बावजूद इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में लेबनान के सशस्त्र संगठन हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजराइल की ओर रॉकेट और ड्रोन दागे, जिससे क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को झटका लगा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और लेबनान के बीच अहम वार्ता होने वाली है। इजराइली सेना ने इसे संघर्ष-विराम का “स्पष्ट उल्लंघन” बताया है। वहीं, हिज्बुल्लाह का कहना है कि उसने यह कदम इजराइल द्वारा लेबनानी नागरिकों पर हमले और घरों को नष्ट करने के जवाब में उठाया। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप यह संकेत देते हैं कि 10 दिन का संघर्षविराम जमीनी स्तर पर बेहद नाजुक स्थिति में है।
यह संघर्षविराम 16 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद लागू हुआ था। लेकिन इसके बावजूद इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में 5 से 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में तैनात है, जिसे वह “बफर जोन” बताती है। इजराइल का कहना है कि यह कदम उत्तरी सीमाओं को हिज्बुल्लाह के हमलों से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, लेबनान और हिज्बुल्लाह इस तैनाती को “कब्जा” मानते हैं। लेबनान की संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इजराइल अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखता है, तो उसे “हर दिन प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा।” यह बयान इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक प्रयासों के साथ जमीनी तनाव कम नहीं हो रहा। इजराइल ने हाल ही में अपनी सैन्य तैनाती की सीमा को “येलो लाइन” या “फॉरवर्ड डिफेंस लाइन” के रूप में परिभाषित किया है। इस क्षेत्र में इजराइली सेना लगातार कार्रवाई कर रही है, जिसमें गांवों में विस्फोट और गोलाबारी शामिल हैं। इजराइल का दावा है कि वह हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि लेबनानी मीडिया के अनुसार इन हमलों में नागरिक क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम के बीच, कूटनीति भी अपने स्तर पर सक्रिय है। अमेरिका एक बार फिर दोनों देशों के बीच वार्ता की मेजबानी कर रहा है। 14 अप्रैल को हुई बैठक दशकों में पहली उच्च-स्तरीय बातचीत थी। हालांकि हिज्बुल्लाह इस तरह की प्रत्यक्ष बातचीत का विरोध करता रहा है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और राष्ट्रपति मिशेल औन की सरकार जहां एक ओर इजराइल से सेना हटाने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण को लेकर भी आंतरिक दबाव का सामना कर रही है। दूसरी तरफ, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने स्पष्ट किया है कि हिज्बुल्लाह को निशस्त्र करना उनका अंतिम लक्ष्य है- चाहे वह सैन्य कार्रवाई से हो या कूटनीतिक माध्यमों से। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए कहा कि हिज्बुल्लाह को निरस्त्र करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य और संतुलित कूटनीति की आवश्यकता होगी।
स्पष्ट है कि इजराइल-लेबनान सीमा पर शांति अभी दूर की कौड़ी है। संघर्षविराम केवल एक अस्थायी विराम साबित हो रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में तनाव और अविश्वास लगातार गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीति इस संघर्ष को थाम पाती है या क्षेत्र एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ता है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



