ट्रम्प ने भारत व चीन जैसे देशों को बताया नरक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण अंतरराष्ट्रीय विवादों के केंद्र में हैं। इस बार ट्रंप ने भारत जैसी उभरती शक्ति के खिलाफ नरक शब्द का इस्तेमाल कर एक ऐसी लक्ष्मण रेखा लांघ दी है, जिसने भारत के साथ-साथ अमेरिका के भीतर भी गुस्से की लहर पैदा कर दी है। ट्रंप ने एक विवादास्पद पॉडकास्ट को रीपोस्ट किया जिसमें भारत और चीन जैसे देशों को नरक बताया गया था। इस गलती ने ट्रंप के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक मोर्चे पर मुश्किलें खड़ी कर दी हैं और वे अब चारों तरफ से घिरते नजर आ रहे हैं।
भारत के प्रति इस अपमानजनक टिप्पणी ने उन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है, जिनमें ट्रंप खुद को भारत का सच्चा दोस्त बताते रहे हैं। अमेरिका में भारतीय प्रवासियों और नेताओं ने इसे ट्रंप की घोर अज्ञानता बताया है। कैलिफोर्निया से भारतीय मूल के सांसद एमी बेरा ने ट्रंप को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह टिप्पणी उस पद की गरिमा के खिलाफ है जिस पर ट्रंप बैठे हैं। उन्होंने साफ किया कि प्रवासियों ने अमेरिका को कमजोर नहीं बल्कि और अधिक शक्तिशाली बनाया है। सांसद एमी बेरा ने ट्रंप की सोच को सीधे चुनौती देते हुए अपनी पारिवारिक विरासत का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता भारत से कानूनी तरीके से अमेरिका आए थे। उनकी मां ने 35 साल तक पब्लिक स्कूल में शिक्षिका के रूप में सेवा दी और पिता ने इंजीनियर के तौर पर देश के निर्माण में योगदान दिया। बेरा के अनुसार, ट्रंप यह समझने में पूरी तरह विफल रहे हैं कि अमेरिका की नींव ही प्रवासियों के खून-पसीने पर टिकी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की भाषा न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह उन लाखों भारतीय-अमेरिकियों के योगदान का निरादर करती है जो आज अमेरिका की अर्थव्यवस्था और तकनीक जगत की रीढ़ हैं।
ट्रंप के इस बयान ने भारतीय मूल के 40 लाख से ज्यादा लोगों के बीच एक असुरक्षा और गुस्से का भाव पैदा कर दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप द्वारा साझा की गई इन टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय ने बेहद सधे हुए लेकिन सख्त शब्दों में कहा कि ये टिप्पणियां पूरी तरह से गलत जानकारी पर आधारित, अनुचित और खराब मानसिकता का परिचायक हैं।



