इतिहास से जुड़ने भारत से 250 लोग पहुंचे इजरायल

भारत से एक खास समुदाय के 250 लोग एक लंबे सफर के बाद इजरायल पहुंचे हैं। घूमने के लिए नहीं, हमेशा-हमेशा के लिए वहां बसने। ये लोग खुद को बहुत पुराने समय की एक खोई हुई ऐसी जाति का वंशज मानते हैं, जिसका जिक्र बाइबिल में आता है। जब ये लोग तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने खुद को गाना गाते, झंडा लहराते और खुशी में झूमते लोगों के बीच पाया। यह सिर्फ यात्रा नहीं है, बल्कि अपने इतिहास और पहचान से जुड़ने की कोशिश है। खास बात है कि खुद इजरायल सरकार ने इस पूरे समुदाय को धीरे-धीरे वहां बसाने की योजना बनाई है और इसी के पहले चरण में 250 लोगों का यह जत्था इजरायल पहुंचा है। यह घटना इतिहास, धर्म और इंसानी भावनाओं से जुड़ी एक खास कहानी है।
गत 23 अप्रैल को बनेई मेनाशे समुदाय के 250 से ज्यादा भारतीय तेल अवीव एयरपोर्ट पर पहुंचे। यह एक सरकारी योजना के तहत उन्हें इजरायल लाने का हिस्सा था। बनेई मेनाशे का मतलब है “मेनाशे के बेटे”। ये 250 लोग इस समुदाय के पहले लोग हैं, जो नवंबर में इजरायली सरकार के फैसले के बाद इजरायल पहुंचे हैं। इजरायली सरकार ने भारत के मणिपुर राज्य से इस समुदाय के करीब 4,600 लोगों को लाने के लिए पैसा देने का फैसला किया है। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत नीले और सफेद रंग के गुब्बारों के गेट के नीचे किया गया, जो इजरायल के झंडे के रंग हैं। वहां मौजूद लोगों ने पारंपरिक यहूदी गीत गाकर उनका स्वागत किया। शावेई इजरायल नाम की संस्था इन खोई हुई जातियों के वंशजों को खोजती है। उसने बताया कि 1990 के दशक से अब तक लगभग 4,000 बनेई मेनाशे इजरायल आ चुके हैं, जबकि करीब 7,000 लोग अभी भी भारत में रहते हैं। इस समुदाय की कहानी के अनुसार, उन्होंने कई सदियों तक फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन से पलायन झेला है लेकिन इस दौरान उन्होंने यहूदी धर्म की कुछ परंपराएं, जैसे खतना, जारी रखीं। मेनाशे लोगों को उत्तरी इजरायल में बसाया जाएगा, ऐसा इजरायल के इंटीग्रेशन मंत्रालय ने बताया है। इजरायल का नागरिक बनने के लिए उन्हें धर्म परिवर्तन करना होगा। इमिग्रेशन मंत्री ओफिर सोफेर ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया।



