गुजरात में भगवा की धमक बरकरार

आज हम योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को भी देश का माॅडल राज्य कह सकते हैं क्योंकि कई मामलों में यह प्रदेश नम्बर एक पर है लेकिन पहले गुजरात माॅडल राज्य हुआ करता था। भाजपा की केन्द्र मंे 2014 मंे जब सरकार बनी तब गुजरात की भूमिका बहुत बड़ी रही थी। उससे पूर्व नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और लगातार चार बार उनके नेतृत्व मंे सरकार बनी थी। गुजरात में आज भी भगवा की धमक बरकरार है और स्थानीय निकाय चुनाव मंे मिली बम्पर जीत अगले विधानसभा चुनाव की नींव भी मजबूत कर रही है। भाजपा ने सूरत, राजकोट, बड़ोदरा और अहमदाबाद समेत सभी 15 महानगर पालिकाओं में शानदार जीत दर्ज की है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को नगर पालिकाओं, तहसील पंचायतों और जिला पंचायतों मंे मामूली सफलता मिली है। इनमंे भी भाजपा ही आगे है। कुछ स्थानों पर अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और असदउद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने भी सफलता हासिल की है। दिन्द्रोल ताल्लुका पंचायत में एआईएमआईएम उम्मीदवार ने कांग्रेस और भाजपा को पछाड़कर जीत दर्ज की है। इसी प्रकार सिद्धपुर पंथक मंे पहली बार ओवैसी की पार्टी का खाता खुला है।
गुजरात में एक बार फिर भाजपा का परचम लहराया है। सूरत, राजकोट, वडोदरा और अहमदाबाद समेत राज्य की सभी 15 महानगरपालिकाओं में भारतीय जनता पार्टी को शानदार जीत मिली है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अहमदाबाद में विजयोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा मौजूद थे।
अहमदाबाद महानगरपालिका की कुल 192 सीटों में भाजपा ने 99 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस को 9 सीटें मिली हैं। आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम को यहां कोई सफलता नहीं मिली। सूरत महानगरपालिका की 120 सीटों में से भाजपा ने 75 सीटों पर कब्जा जमाया है। कांग्रेस को सिर्फ 1 सीट मिली है, जबकि आम आदमी पार्टी को 4 सीटों पर जीत हासिल हुई है। राजकोट महानगरपालिका की कुल 72 सीटों में भाजपा ने 65 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को यहां 7 सीटें मिली हैं। वडोदरा महानगरपालिका की 76 सीटों में से भाजपा ने 49 सीटें जीती हैं, कांग्रेस को 6 सीटें मिली हैं, जबकि 1 सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। इस प्रकार निकाय चुनावों में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने जीत का परचम लहराया है और राज्य की सभी 15 महानगरपालिकाओं में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी है, वहीं आम आदमी पार्टी को इस बार बड़ा झटका लगा है। पिछली बार सूरत में आम आदमी पार्टी को 27 सीटें मिली थीं और वह मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी, लेकिन इस बार पार्टी को कोई खास सफलता नहीं मिली। इसके अलावा राज्य की नगरपालिकाओं, तहसील पंचायतों और जिला पंचायतों में भी भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए ज्यादातर जगहों पर जीत दर्ज की है। हालांकि कुछ स्थानों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को भी सफलता मिली है।
बीजेपी को वडोदरा जिले की डभोई नगर पालिका में 9 वार्ड की कुल 36 सीटों पर 15 और कांग्रेस को 21 सीटों पर जीत मिली। यह इलाके गुजरात के पूर्व सीएम चिमनभाई पटेल के क्षेत्र संखेड़ा से लगा हुआ है। उनके बेटे सिद्धार्थ पटेल यहां से विधायक रह चुके हैं।
गुजरात निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने शानदार एंट्री मारी है। दिंद्रोल तालुका पंचायत सीट में उनके उम्मीदवार ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों को पछाड़कर जीत दर्ज की है। वहीं सिद्धपुर पंथक में पहली बार एआईएमआईएम का खाता खुला है। अब्बास अलीमद असामी 1877 वोटों से दिंद्रोल तालुका पंचायत सीट जीते हैं।
आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं ने सत्ताधारी दल पर अटूट भरोसा जताया है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कुल 9992 सीटों में से 8068 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिसमें भाजपा ने 6161 सीटों पर जीत दर्ज कर 76.4 प्रतिशत का जबरदस्त स्ट्राइक रेट हासिल किया है। महानगरपालिकाओं में भाजपा का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है। यहां 1044 में से 890 सीटों के नतीजे आए हैं, जिनमें से 804 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया है। इस क्षेत्र में पार्टी का स्ट्राइक रेट 90 फीसद से भी ऊपर रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस को मात्र 74 सीटों से संतोष करना पड़ा है, जो शहरी क्षेत्रों में उसकी कमजोर होती पकड़ को दर्शाता है। अहमदाबाद नगर निगम के खाडिया वार्ड में इस बार ऐतिहासिक नतीजे सामने आए हैं। कांग्रेस ने यहां चारों सीटों पर जीत दर्ज कर नया रिकॉर्ड बना दिया। पहली बार ऐसा हुआ है जब खाडिया वार्ड में कांग्रेस के सभी उम्मीदवार एक साथ विजयी हुए हैं। यह नतीजा स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय से इस क्षेत्र में कड़ा मुकाबला देखने को मिलता रहा है, लेकिन इस बार मतदाताओं ने स्पष्ट जनादेश दिया।
नगरपालिकाओं और जिला पंचायतों में भी भाजपा ने अपनी बढ़त बनाए रखी है। नगरपालिकाओं की 2624 सीटों में से भाजपा को 1829 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस 402 सीटों पर सिमट गई है। जिला पंचायतों में भाजपा ने 82।3ः के स्ट्राइक रेट के साथ 723 सीटें जीती हैं। तालुका पंचायतों में भी 5234 सीटों में से भाजपा ने 2805 सीटें जीतकर अपनी जमीनी मजबूती का प्रदर्शन किया है।
इस चुनाव में अन्य दलों और निर्दलीयों ने भी कुछ क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। कुल मिलाकर ‘अन्य’ के खाते में 592 सीटें गई हैं, जिनका स्ट्राइक रेट 7.3 फीसद रहा है। तालुका पंचायतों में निर्दलीयों ने 380 सीटों पर जीत हासिल की है, जो बताता है कि कुछ स्थानीय मुद्दों पर मतदाताओं ने मुख्य दलों से हटकर भी विकल्प चुने हैं। समग्र रूप से यह नतीजे राज्य की राजनीति में भाजपा की एकतरफा जीत और विपक्षी दलों के लिए आत्ममंथन का संकेत हैं।
राजकोट नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 7 कर ली है। वार्ड 16 में कांग्रेस ने सभी 4 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि वार्ड 15 में उसे 3 सीटें मिलीं। वहीं भाजपा ने वार्ड 17, 18 और 3 में जीत हासिल कर अपना दबदबा बनाए रखा। वश्रराम सगठिया, जो पहले कांग्रेस छोड़कर आप में गए थे और फिर लौटे थे, वार्ड 15 से चुनाव हार गए। उन्हें भाजपा के उम्मीदवार निलेश राम हेरभा ने हराया। यह मुकाबला काफी चर्चा में रहा।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



