मुंबई में भी धर्म पूछकर हमला

पहलगाम के हमले को हम अब तक भुला नहीं पाये और संभवतः भूल भी नहीं सकेंगे जहां धर्म पूछकर 26 निर्दोर्षों को गोली मारी गयी थी। अब मुंबई के मीरा रोड स्थित नया नगर इलाके में हुई हालिया हिंसक घटना ने एक बार फिर समाज के भीतर पनप रही कट्टरता, असहिष्णुता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में 31 वर्षीय जैब जुबेर अंसारी को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर आरोप है कि उसने दो सुरक्षा गार्डों से उनका धर्म पूछने के बाद उन पर चाकू से हमला किया। यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाली एक चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर संकेत करती है।
जुबैर अंसारी एक साइंस ग्रेजुएट है। वह कई साल तक अमेरिका में रह चुका है। भारत लौटने के बाद वह मीरा रोड में अकेले रह रहा था और ऑनलाइन केमिस्ट्री पढ़ाने का काम कर रहा था। बताया जा रहा है कि नौकरी नहीं मिलने और अकेलेपन के दौरान वह धीरे-धीरे ऑनलाइन कट्टरपंथी कंटेंट की तरफ झुक गया। जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए ऐसे कंटेंट के संपर्क में आया, जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देता है। पुलिस के मुताबिक आरोपी जुबैर पहले मौके पर पहुंचा और मस्जिद का रास्ता पूछकर वहां से चला गया। कुछ देर बाद वह फिर लौटा और इस बार उसने गार्ड से उसका धर्म पूछा और फिर कथित तौर पर ‘कलमा’ पढ़ने को कहा। जैसे ही गार्ड ने ऐसा करने से इनकार किया। आरोपी ने अचानक चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद वह सिक्योरिटी केबिन में घुसा जहां मौजूद दूसरे गार्ड पर भी इसी तरह हमला किया गया।
घटना 27 अप्रैल तड़के करीब 4 बजे की है, जब एक निर्माणाधीन इमारत के पास तैनात दो गार्ड- राजकुमार मिश्रा और सुब्रोतो सेन- अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे। तभी आरोपी वहां पहुंचा और कथित तौर पर उनसे ‘कलमा’ पढ़ने को कहा, जो इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से एक है। जब गार्ड ऐसा नहीं कर पाए या उन्होंने मना किया, तो आरोपी ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। यह हमला न केवल क्रूर था, बल्कि यह धार्मिक पहचान के आधार पर की गई हिंसा का एक उदाहरण भी है।
हमले में दोनों गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गए। राजकुमार मिश्रा किसी तरह खुद अस्पताल पहुंचने में सफल रहे, जबकि सुब्रोतो सेन को एक स्थानीय निवासी नयाब शेख की मदद से अस्पताल ले जाया गया। नयाब शेख का यह मानवीय कदम इस अंधकारमय घटना के बीच उम्मीद की एक किरण की तरह सामने आता है, जो यह दिखाता है कि समाज में इंसानियत अभी भी जीवित है।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के करीब 90 मिनट के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसकी पहचान की गई और उसे हिरासत में लिया गया। आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास और दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच में राज्य की एंटी-टेरर स्क्वॉड (ए टी एस) भी शामिल हो गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस घटना को केवल एक सामान्य आपराधिक मामला नहीं माना जा रहा।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे और भी चिंताजनक हैं। सूत्रों के अनुसार आरोपी के पास से ‘आईएसआईएस’, ‘लोन वुल्फ’, ‘जिहाद’ और ‘गाजा’ जैसे शब्दों से जुड़े नोट्स मिले हैं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि वह किसी प्रकार की ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री से प्रभावित हुआ हो सकता है। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह हमला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या एक अकेली घटना।
यह घटना आधुनिक समय में इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रही कट्टरता के खतरे को भी उजागर करती है। आज के डिजिटल युग में जहां सूचना तक पहुंच आसान हो गई है, वहीं भ्रामक और उग्र विचारधाराएं भी तेजी से फैल रही हैं। यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर या अस्थिर स्थिति में हो, तो वह ऐसे विचारों से आसानी से प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि साइबर निगरानी और डिजिटल साक्षरता आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
इस मामले में एक और पहलू
ध्यान देने योग्य है- वो है आरोपी की पृष्ठभूमि। बताया जा रहा है कि जैब जुबेर अंसारी कई वर्षों तक अमेरिका में रहा, लेकिन वहां उसे स्थायी रोजगार नहीं मिल पाया और वह भारत लौट आया। यह अनुभव उसके मानसिक और सामाजिक व्यवहार पर क्या प्रभाव डालता है, यह जांच का विषय है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्तिगत असफलता या निराशा का समाधान हिंसा नहीं हो सकता।
घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी फैलाने से बचें। यह अपील बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस तरह की घटनाएं अक्सर सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। यदि अफवाहें फैलती हैं, तो यह स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकती हैं।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी सामाजिक संरचना इतनी कमजोर हो गई है कि धर्म के आधार पर हिंसा को अंजाम दिया जा सके? भारत जैसे बहुलतावादी देश में, जहां विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं, इस तरह की घटनाएं हमारी साझा विरासत के लिए खतरा हैं। हमारी साझा विरासत भी दरकनी नहीं चाहिए। उसे भी मजबूत रखने की जरूरत है। इसी मामले में देखने को मिला कि किस समुदाय के भ्रमित युवक ने दो हिन्दुओं पर जानलेवा हमला किया। उसी समुदाय के एक युवक ने गंभीर रूप से घायल गार्ड को अस्पताल पहुंचाकर जान बचाई।
साथ ही, यह भी जरूरी है कि कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए और ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की
जाए। इससे न केवल पीड़ितों को न्याय मिलेगा, बल्कि समाज में एक स्पष्ट संदेश भी जाएगा कि किसी भी प्रकार की कट्टरता या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अंततः, इस घटना को केवल एक अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक चेतावनी के रूप में समझना होगा। यह चेतावनी है कि हमें अपने समाज में सहिष्णुता, संवाद और समझ को बढ़ावा देना होगा। शिक्षा, जागरूकता और संवेदनशीलता के माध्यम से ही हम इस तरह की घटनाओं को रोक सकते हैं।
मुंबई जैसे महानगर, जो विविधता और सह-अस्तित्व का प्रतीक है, वहां इस तरह की घटना होना और भी अधिक चिंताजनक है लेकिन इसी शहर में नयाब शेख जैसे लोग भी हैं, जो यह साबित करते हैं कि इंसानियत हर हाल में जीवित रहती है। यही उम्मीद हमें आगे बढ़ने की ताकत देती है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



