नेपाल सरकार को भारत ने बताया अपना रुख

नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सीमा मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से साफ और एक जैसा रहा है और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए करने के लिए भारत तैयार है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के संबंध में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साफ तौर पर लिखा- ‘इस मामले में भारत का रुख हमेशा से साफ और एक जैसा रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना और इस्तेमाल में रहा रास्ता है और इस रास्ते से यह यात्रा कई दशकों से चलती आ रही है। यह कोई नई बात नहीं है।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां तक सीमा से जुड़े दावों का सवाल है, भारत हमेशा यह कहता आया है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। इस तरह से एकतरफा तरीके से सीमा बढ़ाने के दावे स्वीकार नहीं किए जा सकते। भारत, नेपाल के साथ अपने रिश्तों के सभी मुद्दों पर बातचीत और सहयोग के लिए हमेशा तैयार है, जिसमें सीमा से जुड़े लंबित और सहमत मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल करना भी शामिल है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 3 मई को आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी नेपाल का अविभाज्य हिस्सा हैं। यह क्षेत्र महाकाली नदी के पूर्व में स्थित है, इसलिए 1816 के सुगौली संधि के अनुसार नेपाल का है। नेपाल सरकार का इस पर स्पष्ट और अडिग रुख है। 2020 के संशोधन के बाद नेपाल के आधिकारिक नक्शे और संविधान में भी इन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है।



