चिंता बढ़ा रहें सड़क हादसे

देश की सड़क बेगुनाहों के खून से लाल हो रही हैं। देश में सड़क हादसों के कारण हर साल करीब
1.80 लाख लोगों की मौत होती है। सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, एक साल में देशभर में 4.80 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें हर घंटे औसतन 20 लोगों की जान चली जाती है।
भारत में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 1,77,175 लोगों की मौत हुई है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश में औसतन हर दिन लगभग 485 लोग और हर घंटे 20 से अधिक लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं
भारत में पिछले कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ा है-
देशभर में 4,87,707 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इन हादसों में 1,77,175 लोगों ने जान गंवाई, जो 2023 (1,72,890 मौतें) के मुकाबले 2.5 फीसदी अधिक है। साल 2024 में इन दुर्घटनाओं के कारण 4,71,441 लोग घायल हुए हैं।
विश्व में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में विशेष रूप से गरीब और विकासशील देशों के लोगों की संख्या में अविश्वसनीय वृद्धि हुई है और इनमें से भी प्रत्येक 5 में से 1 मौत भारत में होती है।
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में हर घंटे होने वाली लगभग 56 सड़क दुर्घटनाओं में 20 लोगों की जान जाती है। इसी कारण ‘भारत को सड़क दुर्घटनाओं की राजधानी’ भी कहा जाने लगा है। स्थिति की गंभीरता पिछले मात्र दो तीन दिन की अखबारों में प्रकाशित हादसों की खबरों से अन्दाजा लगाया जा सकता है- गत 5 जून को वैष्णो देवी से श्रद्धालुओं को लेकर आ रही एक पिक-अप गाड़ी और ट्रक की टक्कर में 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। गत 6 जून को फिरोजपुर-फाजिल्का रोड पर गांव जंगाला मोड़ के निकट एक पिकअप गाड़ी तथा घोड़ा ट्राले में टक्कर के परिणामस्वरूप 10 लोगों की मौत तथा अनेक घायल हो गए। 7 जून को रोपड़ (पंजाब) जिले में भारतगढ़ के निकट एक कार सड़क के किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी जिससे 3 लोगों की मौत हो गई। 7 जून को ही शाहाबाद-पिपली जी.टी. रोड पर एक बेकाबू ट्राले ने एक मोटरसाइकिल को चपेट में ले लिया जिससे उस पर सवार मोहाली नगर निगम के 2 कर्मचारियों की मृत्यु हो गई। 8 जून को औरंगाबाद (बिहार) में 4 सड़क दुर्घटनाओं में 9 लोगों की जान चली गई तथा अनेक घायल हो गए। 8 जून को ही फगवाड़ा में एक मोटरसाइकिल, 2 कारों और एक ट्रक की टक्कर में मोटरसाइकिल सवार और उसकी 7 वर्षीय बेटी की घटनास्थल पर ही मौत तथा उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई।
9 जून को शंभू (राजपुरा, पंजाब) में एक ट्रक ड्राइवर ने 2 लोगों को रौंद डाला जिनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। 9 जून को ही चहेड़ (फगवाड़ा, पंजाब) में एक्टिवा पर सवार 2 युवकों को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी जिससे दोनों की मौत हो गई। 9 जून को ही लुधियाना (पंजाब) में एक कंटेनर के चालक ने तेज रफ्तार से उसे बैंक करने की कोशिश में एक मजदूर को रौंद दिया। 10 जून को देहरादून (उत्तराखंड) में झाड़पानी क्षेत्र में एक कार के गहरी खाई में गिर जाने से उसमें सवार 4 लोगों की मौत हो गई। 10 जून को ही बेगोवाल (पंजाब) में सड़क दुर्घटना में एक कार बेकाबू हो कर पेड़ से टकरा गई जिससे एक दम्पति की मृत्यु हो गई। 10 जून को ही भीखी (पंजाब) में एक ट्राले की टक्कर से बाइक रेहड़े पर सवार 2 दोस्तों की जान चली गई।
11 जून को पुणे (महाराष्ट्र) में नवाले पुल से नीचे उतरते समय एक सीमेंट मिक्सर ट्रक बेकाबू होकर मोटरसाइकिल पर जा रहे एक डिलीवरी ब्वाय से टकरा गया जिससे उसकी मौत हो गई। 11 जून को ही गाँडा (उत्तर प्रदेश) में 2 मोटरसाइकिलों की टक्कर में घायलों की मदद करने पहुंचे लोगों को तेज रफ्तार एसयूवी ने रौंद दिया जिससे 4 लोगों की मौत व 5 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। 11 जून को ही फिरोजपुर (पंजाब) में मोटरसाइकिल पर जा रहे 3 युवकों को तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी जिससे उनकी मौत हो गई। 11 जून को ही पोत्थरैड्डीपालम (आंध्र प्रदेश) में एक कार बेकाबू होकर एक मकान से जा टकराई जिससे कार में सवार 5 मैडिकल के छात्रों सहित 6 लोगों की जान चली गई। 11 जून को ही बुलढाणा (महाराष्ट्र) में ईंटों से लदे एक ट्रक तथा बस में आमने-सामने टक्कर में 4 लोगों की मौत हो गई। 11 जून को ही फरीदकोट (पंजाब) में एक कार और मोटरसाइकिल की टक्कर में मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति व उसकी 2 बेटियों की मौत हो गई। अब 11 जून को ही चमोली में एक कार खाई में गिर जाने से उसमें सवार 4 लोगों की मौत हो गई।
हमारे देश में वाहनों की रफ्तार में वृद्धि के साथ दुर्घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। अतः यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि यह सिलसिला आखिर कब थमेगा। सड़क हादसे का एक बड़ा कारण सड़कों में गड्डे, हैड लाइटों का आधा काला नहीं होना, शहरी, ग्रामीण सड़कों या प्रादेशिक व राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए गति सीमा निर्धारित न होना, वाहन चालकों द्वारा शराब पीकर, मोबाइल पर बात करते हुए और बिना आराम किए लम्बे समय तक वाहन चलाना आदि प्रमुख हैं।
इसके लिए प्रशासन भी जिम्मेदार है। लोगों को ड्राइविंग लाइसैंस जारी करने में भारी अनियमितताएं होती हैं। रिश्वत के बल पर लोग विधिवत ड्राइविंग टैस्ट दिए बिना ही ड्राइविंग लाइसैंस हासिल कर लेते हैं।
अतः इस सम्बन्ध में लापरवाही बरतने वाले ट्रैफिक पुलिस के स्टाफ और लापरवाह वाहन चालकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के साथ-साथ लोगों द्वारा वाहन चलाने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)



