असली व नकली तृणमूल कांग्रेस

महाराष्ट्र में जिस तरह शिवसेना को लेकर असली और नकली पार्टी की लड़ाई शुरू हुई थी, उसी तरह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में असली और नकली की कहानी शुरू हो गयी है। तृणमूल कांग्रेस को बनाने वाली ममता बनर्जी अपने साथ बचे खुचे लोगों की पार्टी को ही असली टीएमसी बता रही है जबकि ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने विधायक अरूप राॅय को अध्यक्ष चुना है। बागी गुट के नेता कहते हैं कि उन्होंने टीएमसी के तीन बैंक खातों के लेन-देन पर भी रोक लगवा दी है। इन बैंक खातों में 440 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है। उधर, ममता बनर्जी ही अपने साथ के लोगों को असली पार्टी बता रही हैं। ध्यान रहे पार्टी के 80 विधायकों में से 58 विधायक खुलेआम बागीगुट में आ गये हैं। इसी प्रकार टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सदस्य भी बागी होकर तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गये हैं। इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी आफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने की घोषणा भी कर दी है।
तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की कोशिश में विपक्ष के नेता ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने 22 जून को विधायक अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना। यह पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के प्राधिकार को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा से शुरू हुई और बाद में संसद तक फैली बगावत अब पार्टी के संगठनात्मक गढ़ तक पहुंच गई है। यहां बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। अरूप बिस्वास और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष चुना गया। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास और विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जबकि रीताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव बनाया गया। इस नये ढांचे के जरिये बागी गुट ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद से प्रभावी रूप से हटा दिया है। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। बैठक के बाद बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, तृणमूल कांग्रेस नेताओं और सदस्यों के विशेष सत्र में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। बागी गुट के नेता ने इस प्रक्रिया को वैध ठहराने की कोशिश करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही पार्टी के संविधान के अनुसार की गई है और विशेष सत्र का विवरण निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा, यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की जानकारी निर्वाचन आयोग को देंगे। बनर्जी ने कहा, हमने पार्टी के नियमों के अनुसार काम किया है और यह विशेष सत्र आहूत किया है। क्या सही है और क्या गलत, इसका फैसला निर्वाचन आयोग करेगा। उन्होंने बताया कि नवगठित नेतृत्व जल्द ही विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे का गठन शुरू करेगा। ऋतव्रत बनर्जी ने कहा, हम जल्द ही जिला समितियों, प्रदेश इकाई और प्रवक्ताओं के एक पैनल का गठन करेंगे। इस बीच, पुलिस ने बागी विधायकों की शिकायत पर पार्टी के तीन बैंक खातों में मौजूद करीब 440 करोड़ रुपये के लेन-देन पर भी रोक लगा दी है। ये शिकायतें वित्तपोषण के स्रोत को लेकर की गई थीं। कुछ ही दिन पहले पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने विपक्ष के नेता पद के लिए ऋतव्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था और पार्टी नेतृत्व की पसंद को खारिज कर दिया था। बागी गुट का दावा है कि इसके बाद उनकी संख्या और बढ़ गई है।
हाल में पार्टी को संसद में एक और झटका तब लगा जब उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्य तृणमूल संसदीय दल से अलग हो गए और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया, साथ ही भाजपा-नेतृत्व वाले राजग को समर्थन देने की घोषणा की। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पश्चिम बंगाल में स्थित एक प्रमुख भारतीय राजनीतिक दल है। लगभग 26 से अधिक वर्षों तक कांग्रेस में रहने के बाद, ममता बनर्जी ने इससे अलग होकर 1 जनवरी 1998 को टीएमसी की स्थापना की। पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिन्ह जोड़ा घास फूल है। एआईटीसी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक अलग हुए गुट के रूप में शुरू हुई और बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से प्रमुखता हासिल की। एआईटीसी ने पश्चिम बंगाल राज्य पर शासन किया और बनर्जी ने 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। यह पार्टी 2011 के चुनावों में वाम मोर्चे को हराकर पहली बार राज्य में सत्ता में आई । इसके बाद, पार्टी ने 2016 और 2021 के चुनावों में जीत हासिल की। हालाँकि, यह 2026 के चुनाव में बहुमत हासिल करने में विफल रही और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हार गई।
ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था लेकिन अब उन्हें ही बागी विधायकों ने अध्यक्ष पद से हटा दिया है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) का जन्म ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक जन आंदोलन से हुआ, जो लगातार आम नागरिकों के हितों की वकालत करती रही हैं। अन्याय के खिलाफ वर्षों के अथक संघर्ष ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि बंगाल को एक स्वतंत्र मंच की आवश्यकता है, जो कांग्रेस की सीमाओं से मुक्त हो और सीपीआई (एम) के दीर्घकालिक शासन को चुनौती देने के लिए पर्याप्त मजबूत हो। तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के साथ वह सपना साकार हुआ। जब भारत 11वीं से 12वीं लोकसभा में प्रवेश कर रहा था, तब ममता बनर्जी, जो पहले से ही एक अनुभवी सांसद थीं, ने जनता की नब्ज को भांप लिया। साहस और जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव के बल पर, उन्होंने उस भावना को बंगाल के लिए नई आशा में बदल दिया। तृणमूल कांग्रेस अपनी स्थापना के बाद से ही बंगाल की जनता के साथ मजबूती से खड़ी रही है।
वर्ष 2006-07-नंदीग्राम आंदोलन-जब जबरन भूमि अधिग्रहण के कारण 70,000 से अधिक ग्रामीणों को विस्थापन का सामना करना पड़ा, तब तृणमूल ने प्रतिरोध का नेतृत्व किया। 14 मार्च, 2007 को हुई पुलिस की गोलीबारी में 14 ग्रामीणों की मौत ने सीपीआई (एम) शासन की क्रूरता को उजागर कर दिया। तृणमूल ने टाटा मोटर्स परियोजना के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। ममता बनर्जी ने बंगाल के अडिग रवैये का प्रतीक बनते हुए 26 दिनों की भूख हड़ताल की। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप टाटा मोटर्स को परियोजना से हटना पड़ा और 2011 में तृणमूल सरकार ने किसानों को 400 एकड़ जमीन वापस कर दी। तृणमूल कांग्रेस का उदय बंगाल की बदलती राजनीतिक नब्ज की कहानी है सन् 2009 लोकसभा चुनाव में बंगाल में 19 सीटें जीतीं और 2011 विधानसभा चुनाव में 184 सीटों के साथ 34 वर्षों के वामपंथी शासन का अंत किया।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



