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इथेनॉल मिश्रित ईंधन की बढ़ती भूमिका

भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की सरकारी नीति एक बार फिर चर्चा में है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का समर्थन करते हुए कहा कि इथेनॉल का उपयोग केवल सामान्य वाहनों में ही नहीं, बल्कि रेसिंग कारों में भी किया जाता है। उनके अनुसार, इथेनॉल इंजन की गति बढ़ाने, बेहतर एक्सेलरेशन देने और नॉकिंग (इंजन में होने वाली अनियमित कंपन) को कम करने में सहायक होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अधिक इथेनॉल मिश्रण से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन इसके कई अन्य लाभ इस कमी की भरपाई करते हैं।
मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई, जिसका सीधा असर भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर पड़ा। सरकार के अनुसार, जून 2026 तक पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लागत से कम कीमत पर बेचने के कारण तेल कंपनियों को लगभग 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में कुल अंडर-रिकवरी 1.88 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई।
ऐसी परिस्थितियों में सरकार का मानना है कि पेट्रोल में इथेनॉल का अधिक मिश्रण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यदि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जाती है तो कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी और आयात बिल में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह एक नवीकरणीय और अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन है। इसके उपयोग से कार्बन डाइऑक्साइड सहित कई प्रदूषक गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रहे हैं।
हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई भी निर्णय व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही लेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में ई-20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध है। यदि भविष्य में इसे बढ़ाकर ई-25 किया जाएगा तो उससे पहले भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग , ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया तथा अन्य संबंधित संस्थाओं से व्यापक परामर्श और तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे।
हाल के दिनों में यह आशंका भी जताई गई थी कि अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के उपयोग से वाहनों का बीमा प्रभावित हो सकता है। इस पर मंत्री ने कहा कि बीमा कंपनियां पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि ऐसी कोई समस्या नहीं है। उन्होंने अफवाहों से बचने और प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
सरकार का दृष्टिकोण यह भी है कि भारत की परिवहन व्यवस्था केवल एक तकनीक पर आधारित नहीं होगी। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में इलेक्ट्रिक वाहन, इथेनॉल मिश्रित ईंधन वाले वाहन, हाइब्रिड वाहन और सीएनजी वाहन सभी के लिए पर्याप्त स्थान है। भारत जैसे विशाल देश में ऊर्जा परिवर्तन एक बहु-आयामी प्रक्रिया होगी, जिसमें विभिन्न प्रकार की स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का समानांतर विकास आवश्यक है।
वैश्विक स्तर पर भी इथेनॉल मिश्रण को व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है। अमेरिका में ई-10 व्यापक रूप से उपयोग में है और ई-15 का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वहां लाखों फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ई-85 तक के मिश्रण पर चल सकते हैं। ब्राजील इस क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश माना जाता है, जहां ई-27 अनिवार्य है और बड़ी संख्या में वाहन 100 प्रतिशत इथेनॉल पर भी चलने में सक्षम हैं। कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों ने भी अपने ईंधन मिश्रण कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक अपनाया है।
भारत का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भी पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से आगे बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में जहां इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 38 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष हो चुकी है। इसी प्रकार इथेनॉल मिश्रण का स्तर 1.5 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर 2025 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो सरकार की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस कार्यक्रम से अब तक भारत को 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। किसानों को इथेनॉल उत्पादन के लिए 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। इसके अलावा 310 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का आयात टाला जा सका है और लगभग 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। इससे स्पष्ट है कि यह योजना केवल ऊर्जा नीति नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से भी सीधे जुड़ी हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इथेनॉल मिश्रण के विस्तार के साथ कुछ चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा। अधिक इथेनॉल मिश्रण के लिए अनुकूल इंजन तकनीक, पर्याप्त उत्पादन क्षमता, जल संसाधनों का संतुलित उपयोग तथा खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर निरंतर निगरानी रखनी होगी। यदि इन चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान किया जाता है तो भारत स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
अंततः, हरदीप सिंह पुरी का बयान केवल इथेनॉल की तकनीकी विशेषताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का भी संकेत देता है। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच इथेनॉल मिश्रित ईंधन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रहा है। यदि सरकार, उद्योग, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर इस दिशा में संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण, किसानों की आय में वृद्धि और विदेशी मुद्रा की बचत जैसे अनेक लक्ष्यों को भी एक साथ प्राप्त कर सकेगा। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)

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