कारोबार

इन्फाॅसिस का नया चैप्टर

भारत की सबसे बड़ी आईटी कपंनियों में से एक इन्फाॅसिस लिमिटेड में एक नया चैप्टर शुरू होने वाला है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है लेकिन दुनिया भर में इसकी मौजूदगी है। अनुसंधान के मामले में इन्फाॅसिस ने एक मुख्य पहल आर एण्ड डी कारपोरेट बनाकर की है जो साफ्टवेयर इंजीनियरिंग तथा प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला कहलाती है। अब देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस में लीडरशिप का एक नया चैप्टर शुरू होने जा रहा है। कंपनी ने अपने दिग्गज अधिकारी आशीष कुमार दाश को अपना मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। आशीष 1 अप्रैल 2027 को मौजूदा सीईओ सलिल पारेख की जगह लेंगे। पारेख का 9 साल का सफल कार्यकाल उस वक्त पूरा हो रहा है।
आशीष कुमार दाश इन्फोसिस के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। उन्होंने इस कंपनी में तीन दशक (30 साल) से ज्यादा का वक्त बिताया है। आशीष की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर से ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्लोबल लीडरशिप प्रोग्राम और लंदन बिजनेस स्कूल से सीनियर एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम भी पूरा किया है। आशीष फिलहाल अमेरिका के लॉस एंजिल्स में तैनात हैं। लेकिन सीईओ की कुर्सी संभालने से पहले वो वापस भारत लौट आएंगे। फिलहाल वे कंपनी में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल हेड (सर्विसेज, यूटिलिटीज, रिसोर्सेज, एनर्जी और एंटरप्राइज सस्टेनेबिलिटी) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे फॉर्च्यून 500 और ग्लोबल 2000 कंपनियों को नई डिजिटल तकनीक और एआई अपनाने में मदद करते हैं।
इन्फोसिस के बोर्ड की नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश के बाद आशीष को सीईओ डेजिग्नेट नियुक्त किया गया है। शेयरधारकों की मंजूरी के बाद 1 अप्रैल 2027 से उनका 5 साल का कार्यकाल शुरू होगा, जो 31 मार्च 2032 तक चलेगा। आशीष ऐसे समय में कमान संभालने जा रहे हैं, जब ग्लोबल टेक इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है। उनके सामने कई बड़े चैलेंज होंगे, जैसे अब क्लाइंट्स सिर्फ आउटसोर्सिंग नहीं, बल्कि अपने बिजनेस में ठोस नतीजे चाहते हैं. इन्फोसिस को आईएक्स की रेस में सबसे आगे रखना आशीष का पहला टास्क होगा. कंपनी की पहली तिमाही की कमाई में 8. 2 फीसद हिस्सा एआई सर्विसेज से ही आया है। उन्हें नए एआई टैलेंट को तराशने और उभरती तकनीकों में निवेश बढ़ाने पर फोकस करना होगा।
इसके साथ ही रिटेल और कम्युनिकेशंस जैसे सेक्टर्स अभी धीमे चल रहे हैं। वहां ग्रोथ वापस लाना और दुनियाभर की कंपनियों के घटते टेक-बजट के बीच इन्फोसिस का प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना उनकी लीडरशिप का असल इम्तिहान होगा। इतना ही नहीं दुनिया भर में छाई आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका की सख्त वीजा पॉलिसी और देशों के बीच जियो-पॉलिटिकल टेंशन भी आईटी सेक्टर के लिए बड़ा सिरदर्द बने हुए हैं, जिनसे आशीष को निपटना होगा।
हाल ही में इन्फोसिस ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट 12.2 फीसद बढ़कर 7769 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता को देखते हुए कंपनी ने पूरे साल की रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान थोड़ा घटाकर 1.5 फीसद से 3 फीसद के बीच कर दिया है.
इन्फोसिस लिमिटेड एक बहुराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कम्पनी है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु, (भारत) में स्थित है। यह भारत की एक सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक है जिसके पास 30 जून 2008 को (सहायकों सहित) 94,379 से अधिक पेशेवर हैं। इसके भारत में 9 विकास केन्द्र हैं और दुनिया भर में 30 से अधिक कार्यालय हैं। वित्तीय वर्ष 2007-2008 के लिए इसका वार्षिक राजस्व 4 बिलियन से अधिक है, इसकी बाजार पूंजी 30 बिलियन से अधिक है। 24 अगस्त 2021 को, इन्फोसिस बाजार पूंजीकरण में $100 बिलियन तक पहुँचने वाली चैथी भारतीय कंपनी बन गई।
इन्फोसिस की स्थापना 2 जुलाई, 1981 को पुणे में एन आर नारायण मूर्ति के द्वारा की गई। इनके साथ छह अन्य लोग थे। नंदन निलेकानी, एन. एस. राघवन, क्रिस गोपालकृष्णन, एस. डी. शिबुलाल, के. दिनेश और अशोक अरोड़ा। राघवन के साथ आधिकारिक तौर पर कंपनी के पहले कर्मचारी रहे। मूर्ति ने अपनी पत्नी सुधा मूर्ति से 10,000 आई एन आर लेकर कम्पनी की शुरुआत की। कम्पनी की शुरुआत उत्तर मध्य मुंबई में माटुंगा में राघवन के घर में इन्फोसिस कंसल्टेंट्स प्रा.लि. के रूप में हुई, जो एक पंजीकृत कार्यालय था।
2001 में इसे बिजनिस टुडे के द्वारा भारत के सर्वश्रेष्ठ नियोक्ता की श्रेणी में रखा गया। इन्फोसिस ने वर्ष 2003, 2004 और 2005, के लिए ग्लोबल मेक (सर्वाधिक प्रशंसित ज्ञान एंटरप्राइजिज) पुरस्कार जीता। यह पुरस्कार जीतने वाली यह एकमात्र कम्पनी बन गई और इसके लिए इसे ग्लोबल हॉल ऑव फेम में प्रोत्साहित किया गया। 1996 में, इन्फोसिस ने कर्नाटक राज्य में अपना एक संस्थान बनाया, जो कि स्वास्थ्य सामाजिक पुनर्वास और ग्रामीण उत्थान, शिक्षा, कला और संस्कृति के क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। तब से, यह संस्थान भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओड़िशा और पंजाब राज्यों तक फैल गया है। इन्फोसिस संस्थान का नेतृत्व श्रीमती सुधा मूर्ति कर रही हैं, जो अध्यक्ष नारायण मूर्ति की पत्नी हैं।
2004 के बाद से, इन्फोसिस ने (अकैडमिक आंटांट) नामक कार्यक्रम के अंतर्गत, दुनिया-भर में अपने अकादमिक रिश्तों को मजबूत और औपचारिक बनाने की पहल की है। कम्पनी मामले का अध्ययन लेखन, शैक्षणिक सम्मेलनों और विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों में भाग लेना,
अनुसंधान में सहयोग, इन्फोसिस विकास केन्द्रों के लिए अध्ययन यात्राओं की मेजबानी करना और इन्स्टेप ग्लोबल इंटर्नशिप कार्यक्रम चलाना आदि के माध्यम से महत्वपूर्ण दावेदारों के साथ संचार करती है।
इन्फोसिस का ग्लोबल इंटर्नशिप कार्यक्रम जो इनस्टेप के नाम से जाना जाता है, अकादमिक एंटिटी पहल के मुख्य अवयवों में से एक है। यह दुनिया भर में विश्वविद्यालयों से इन्टर्नज के लिए लाइव परियोजनाएँ प्रस्तुत करता है। इनस्टेप व्यापार, तकनीक और उदार कला विश्वविद्यालयों से स्नातक, अधो स्नातक और पीएचडी विद्यार्थियों की भर्ती करता है, जो किसी भी एक इन्फोसिस ग्लोबल कार्यालय में 8 से 24 सप्ताह की इंटर्नशिप में भाग लेते हैं। इनस्टेप इन्टर्नस को इन्फोसिस में करियर में भी अवसर प्रदान किए जाते हैं।
1997 में, इन्फोसिस ने कैच देम यंग प्रोग्रैम की शुरुआत की, जिसमें गर्मी की छुट्टियों के कार्यक्रम के एक आयोजन द्वारा शहरी युवाओं को सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया के लिए आगे बढ़ने का मौका दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कंप्यूटर विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी के बारे में समझ
और रुचि विकसित करना। इस कार्यक्रम में श्रेणी आईएक्स के स्तर के छात्रों को लक्ष्य बनाया गया। इस प्रकार नये सीईओ आशीष कुमार दाश को इन्फाॅसिस की गरिमा को बरकरार
रखते हुए नई ऊँचाइयां स्थापित करनी होंगी।
(अखिलेश पाठक-हिफी फीचर)

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