विश्व-लोक

लाल सागर में सऊदी अरब का सुरक्षा गठबंधन

लाल सागर, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है इस बार विवाद का केन्द्र बन गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर लगातार हमले, समुद्री नाकेबंदी और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल) लगाने की चेतावनी के बाद सऊदी अरब ने एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा गठबंधन बनाने की घोषणा की है। इस गठबंधन का उद्देश्य लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित होने से बचाना है।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस गठबंधन में शामिल होने के लिए दुनिया के कई देशों को आमंत्रित किया गया था। शुरुआती चरण में 13 देशों ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई है, जबकि अन्य देशों के लिए भी इसके द्वार खुले रखे गए हैं। गठबंधन का मुख्यालय रियाद में स्थापित किया जाएगा। हालांकि अमेरिका ने अभी तक औपचारिक रूप से अपनी सदस्यता की घोषणा नहीं की है, लेकिन उसके इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल में रुचि दिखाई है, क्योंकि पहले से ही यूरोपीय संघ का एस्पाइड्स नामक नौसैनिक मिशन लाल सागर में सक्रिय है। यह गठबंधन ऐसे समय में बनाया जा रहा है जब हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा कर दी थी। हूतियों का दावा है कि यह कदम सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान और यमन पर लंबे समय से लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है। इसके बाद कई सऊदी तेल टैंकरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले किए गए। हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि उनके लड़ाकों ने बैलिस्टिक मिसाइलों से एक सऊदी तेल टैंकर को निशाना बनाया, जिससे उसे अपना मार्ग बदलना पड़ा।
लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बाब-अल-मंदेब केवल लगभग 29 किलोमीटर चैड़ा है और यही मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी तथा हिंद महासागर से जोड़ता है। विश्व के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। वर्ष 2024 में लगभग 4.1 अरब बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरे थे। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के कारण होरमुज जलडमरूमध्य में पहले से ही तनाव बना हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में खाड़ी देशों के अधिकांश तेल निर्यात इसी मार्ग से होते हैं, लेकिन मौजूदा संकट के कारण सऊदी अरब ने अपने तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा लाल सागर के रास्ते यनबू बंदरगाह की ओर मोड़ दिया है। अब यदि लाल सागर भी असुरक्षित हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दोहरा संकट खड़ा हो सकता है। हूती विद्रोहियों द्वारा बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने की योजना ने भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। यदि ऐसा होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ माना जाएगा। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार प्राकृतिक जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से सामान्य परिस्थितियों में टोल नहीं लिया जा सकता। हालांकि कुछ विशेष सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है, लेकिन किसी सशस्त्र समूह द्वारा इस प्रकार का नियंत्रण स्थापित करना वैश्विक व्यापार के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा।

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