महाराष्ट्र में अन्ना की तपस्या सफल

गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे देश को भ्रष्टाचार से पूरी तरह मुक्त कराना चाहते हैं। इसके लिए लगभग एक दशक पूर्व दिल्ली मंे जबर्दस्त आंदोलन हुआ था। उसी आंदोलन की उपज अरविन्द केजरीवाल हैं जिन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के नाम से राजनीतिक दल बनाया। अन्ना हजारे इसके खिलाफ थे। आज भी वह अपने आंदोलन को राजनीति से दूर रखना पसंद करते हैं। उनके प्रयास रुके नहीं, धीमें जरूर पड़ गये क्योंकि तपस्या सभी के वश की नहीं है। अन्ना हजारे की तपस्या महाराष्ट्र मंे सफल होती दिख रही है। अन्ना हजारे ने राज्य मंे लोकायुक्त कानून लागू कराने की मांग को लकेर 31 जनवरी 2026 से अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर रखी है। भाजपा के नेतृत्व वाली देवेन्द्र फडणवीस की सरकार ने राज्य में लोकायुक्त कानून लागू करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर दी है। विधान मंडल के दोनों सदनों मंे इस कानून को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी हस्ताक्षर कर दिये हैं। हालांकि इसे लगाू करने मंे दो वर्ष की देरी हुई है लेकिन अन्ना हजारे की तपस्या सफल हो गयी है। अब उन्हंे इस मामले पर भूख हड़ताल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
महाराष्ट्र सरकार राज्य में नया लोकायुक्त कानून लागू करने की तैयारी कर रही है। इस कानून को पहले ही दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है और राष्ट्रपति भी इस पर हस्ताक्षर कर चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने इसमें तीन अहम बदलावों का सुझाव दिया था। इन बदलावों के साथ अब नया लोकायुक्त कानून राज्य में लागू होने जा रहा है। इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने लंबे समय से प्रदर्शन किया है। कानून को लागू किए जाने में लगभग दो साल की देरी हुई है।
संशोधित कानून के तहत, पुराने अधिनियम के अंतर्गत नियुक्त वर्तमान लोकायुक्त का कार्यकाल नए कानून के लागू होते ही समाप्त हो जाएगा। प्रशासनिक असंतुलन से बचने के लिए, नए लोकायुक्त के कार्यभार संभालने तक मौजूदा लोकायुक्त अपने पद पर बने रहेंगे। दोनों सदनों से संशोधित विधेयक पारित हो जाने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाने के बाद, राज्य सरकार जल्द ही नए लोकायुक्त अधिनियम को लागू करने के लिए तैयार है, जो महाराष्ट्र में जवाबदेही और भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। राज्य विधानमंडल ने केंद्र सरकार द्वारा सुझाए गए संशोधनों को मंजूरी दे दी है। यह कदम अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की लगातार मांगों के जवाब में उठाया गया है, जिन्होंने अधिनियम के लागू न होने पर 31 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की थी।
मूल लोकायुक्त विधेयक विधानसभा द्वारा 28 दिसंबर 2022 को और विधान परिषद द्वारा 15 दिसंबर 2023 को पारित किया गया था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को मंजूरी दे दी, लेकिन राज्य को तीन महत्वपूर्ण संशोधन शामिल करने की सिफारिश की। इन सुझावों को औपचारिक रूप से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बता दिया गया था, जिन्होंने विधानमंडल को सूचित किया। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि केवल केंद्रीय कानूनों के तहत स्थापित प्राधिकरण स्वतः ही राज्य लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में नहीं आएंगे। हालांकि, यदि ऐसे निकायों में कार्यरत अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है, तो वे लोकायुक्त के दायरे में आएंगे। इसी प्रकार, यदि कोई संस्था केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई है, तब भी राज्य द्वारा नियुक्त अधिकारी लोकायुक्त अधिनियम के अधीन होंगे। संशोधनों में पुराने आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम संदर्भों की जगह केंद्र द्वारा पेश किए गए नए आपराधिक कोड भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के साथ संरेखित करने के लिए कानून में संदर्भों को भी अद्यतन किया गया है।
अगर महाराष्ट्र में एक मजबूत लोकायुक्त एक्ट लागू होता है, तो यह नया कानून राज्य के एंटी-करप्शन सिस्टम को मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में मुख्यमंत्री और कैबिनेट अब लोकायुक्त एक्ट के अधिकार क्षेत्र में आएंगे। इस एक्ट के अनुसार, लोकायुक्त हाईकोर्ट का पूर्व चीफ जस्टिस या सुप्रीम कोर्ट का पूर्व जज या बॉम्बे हाई कोर्ट का जज होगा। प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, जो पहले 1971 के एक्ट में नहीं था, अब लोकायुक्त के दायरे में आ गया है।
इस प्रकार महाराष्ट्र में सशक्त लोकायुक्त कानून लागू करवाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। समाजसेवी अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान कर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया था। रालेगन सिद्धि में होने वाला यह अनशन न केवल राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा था, बल्कि लोकायुक्त कानून की अधूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठा रहा था। अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजी गई चिट्ठी में स्पष्ट लिखा है कि वे महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के दिन आमरण अनशन पर बैठेंगे। उनका कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने लोकायुक्त बिल को भले ही विधानमंडल से पारित करा लिया हो, लेकिन उसे लागू करने में अब तक अनावश्यक देरी की गई है। उन्होंने याद दिलाया कि 28 दिसंबर 2022 को विधानसभा और 15 दिसंबर 2023 को विधान परिषद से लोकायुक्त कानून पारित हुआ था, परन्तु दो वर्ष बीतने के बाद भी इसे अमल में नहीं लाया गया। अन्ना हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ कई बार बैठकों के बावजूद केवल आश्वासन मिले, कार्यान्वयन नहीं। उन्होंने कहा कि देश कानून से चलता है और राज्य में एक मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था की आवश्यकता अत्यंत जरूरी है। अपनी दृढ़ स्थिति को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यदि राज्य में सशक्त लोकायुक्त कानून लागू नहीं किया गया, तो जीवन जीने की इच्छा भी शेष नहीं रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि उनका संपूर्ण जीवन समाज और देशहित के लिए समर्पित रहा है। स्वयं के लिए कुछ न रखने वाले अन्ना हजारे ने दोहराया कि जब तक प्राण हैं, वे जनता की भलाई के लिए कार्य करते रहेंगे। गांधीवादी विचारों से प्रेरित अन्ना का कहना है कि महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शुरू होने वाला यह अनशन उनके आदर्शों को समर्पित होगा और कानून लागू होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसने जन लोकपाल बिल की मांग को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना दिया था। रामलीला मैदान का वह ऐतिहासिक अनशन भारतीय राजनीति में एक नई जनभागीदारी की शुरुआत माना गया था। अब एक बार फिर अन्ना का यह कदम राज्य सरकार को कठिन स्थिति में डाल सकता है और लोकायुक्त कानून के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।
अन्ना हजारे ने कहा है कि महाराष्ट्र में तुरंत एक मजबूत लोकायुक्त एक्ट लागू किया जाए। उनका कहना है कि विधानसभा-परिषद में मंजूरी, राज्यपाल की मंजूरी के बावजूद बिल लागू नहीं हुआ है। इसलिए भ्रष्टाचार रोकने के लिए आमरण अनशन जरूरी है। महाराष्ट्र सरकार ने 28 दिसंबर 2022 को विधानसभा और 15 दिसंबर 2023 को विधान परिषद से लोकायुक्त बिल पास किया था लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



