लेखक की कलम

राजनीतिक इस्लाम पर प्रहार

आजकल युवाओं मंे सबसे चर्चित कवि डा. कुमार विश्वास अक्सर यह कहते हैं कि राजनीति का धर्म होना चाहिए लेकिन धर्म की राजनीति नहीं होनी चाहिए। दुर्भाग्य से धर्म की राजनीति समाज में विघटन और विद्रोह पैदा करती है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत 22 अक्टूबर को गोरखपुर मंे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम मंे इसी धर्म की राजनीति से सचेत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक इस्लाम से आस्था पर सर्वाधिक कुठाराघात हुआ है। योगी ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारे देश में अंग्रेजों के शासन, ब्रिटिश उपनिवेश की चर्चा होती है पर राजनीतिक इस्लाम की कहीं चर्चा नहीं होती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर गोरखपुर विभाग द्वारा आयोजित विचार-परिवार, कुटुम्ब स्नेहमिलन एवं दीपोत्सव से राष्ट्रोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था राजनीतिक इस्लाम के खिलाफ भी हमारे पूर्वजों ने बड़ी-बड़ी लड़ाइयां लड़ी थीं। छत्रपति शिवाजी, गुरु गोविन्द सिंह और महाराणा प्रताप को हम इसी बात के लिए स्मरण करते हैं। योगी ने राजनीतिक इस्लाम का एक चर्चित उदाहरण येन केन प्रकारेण धर्मान्तरण कराने वाले बलरामपुर जिले के जलालुद्दीन उर्फ छांगुर के रूप मंे दिया। ध्यान रहे कि इस्लाम का राजनीतिकरण करके ही ‘हलाल उत्पादों’ का ठप्पा बनाया गया है। इस्लाम धर्म की अच्छी शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करने की जगह उनका राजनीतिक और सामाजिक दुरुपयोग किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक इस्लाम के इतिहास पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को इससे बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण में आरएसएस के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि आरएसएस के स्वयंसेवकों ने प्रतिबंध झेले और लाठीचार्ज का सामना किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इतिहास में अक्सर ब्रिटिश और फ्रांसीसी उपनिवेशवाद की चर्चा होती है, लेकिन राजनीतिक इस्लाम का बहुत कम उल्लेख है। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक इस्लाम ने सनातन धर्म को सबसे बड़ा झटका दिया है। योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आरएसएस की शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोबिंद सिंह, महाराणा प्रताप और महाराणा सांगा जैसे महान योद्धाओं ने राजनीतिक इस्लाम के खिलाफ लड़ाई लड़ी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास का यह पहलू काफी हद तक अनदेखा किया गया है। उन्होंने विचार-परिवार कुटुंब स्नेह मिलन और दीपोत्सव से राष्ट्रोत्सव कार्यक्रमों में कहा कि हमारे पूर्वजों ने राजनीतिक इस्लाम के खिलाफ बड़ी जंगें लड़ीं, फिर भी यह ऐतिहासिक सच छिपा रह गया।
योगी आदित्यनाथ ने आरएसएस की सराहना करते हुए कहा कि इस संगठन ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, हमारे पूर्वजों ने न केवल अंग्रेजों और फ्रांसीसियों से लड़ाई लड़ी, बल्कि राजनीतिक इस्लाम से भी लड़े। वीर शिवाजी और महाराणा प्रताप जैसे नायक इसके गवाह हैं। ब्रिटिश उपनिवेशवाद की बात होती है, फ्रांसीसी उपनिवेशवाद की बात होती है, लेकिन कहीं भी राजनीतिक इस्लाम की बात नहीं होती, जिसने आस्था को कमजोर किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरएसएस की 100 साल की यात्रा ने असंभव को संभव कर दिखाया। उन्होंने कहा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सदस्य राम मंदिर पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन आरएसएस के स्वयंसेवक इस संकल्प पर अडिग रहे कि मंदिर बनेगा। संघ ने प्रतिबंध झेले, और उसके स्वयंसेवकों ने लाठीचार्ज और गोलियां खाईं। आज, भव्य राम मंदिर उनके अटूट समर्पण का प्रमाण है। योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि राजनीतिक इस्लाम को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां विभिन्न रूपों में आज भी जारी हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि उत्तर प्रदेश ने हलाल-प्रमाणित उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे उत्पादों की बिक्री से होने वाले मुनाफे का इस्तेमाल धर्मांतरण, लव जिहाद और आतंकवाद के लिए किया जा रहा था। आरएसएस की शताब्दी वर्ष की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए, योगी आदित्यनाथ ने पांच प्रमुख परिवर्तनों पर प्रकाश डाला- सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्य, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी वस्तुओं के माध्यम से आत्मनिर्भरता और नागरिक जिम्मेदारी। उन्होंने इन्हें एक विकसित भारत की नींव बताया। उन्होंने कहा, एक विकसित समाज और एक विकसित राष्ट्र के लिए, समाज को आगे बढ़ना चाहिए, और सरकार को उसका अनुसरण करना चाहिए।
श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने लड़ाई लड़ी। उन्होंने ताउम्र अन्याय, अधर्म, अत्याचार और दमन के खिलाफ तलवार उठाई। गुरू जी की तीन पीढ़ियों ने देश धर्म की रक्षा के लिए महान बलिदान दिया। आज देश अपनी स्वतंत्रता की 75वी वर्षगांठ ’’आजादी के अमृत महोत्सव’’ के रूप में मना रहा है, ऐसे में पूरे देश में स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों, बलिदानियों को याद किया जा रहा है। गुरु गोबिन्द सिंह सिक्खों के दसवें गुरु थे। वे एक महान दार्शनिक, प्रख्यात कवि, निडर एवं निर्भीक योद्धा, युद्ध कौशल, महान लेखक और संगीत के पारखी भी थे। उनका जन्म 1666 में पटना में हुआ। वे नौवें सिख गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के इकलौते बेटे थे, जिनका बचपन का नाम गोबिंद राय था। सन् 1699 ई0 में बैसाखी के दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना कर पांच व्यक्तियों को अमृत चखा का ’पांच प्यारे’ बना दिए। इन पांच प्यारों में सभी वर्गो के व्यक्ति थे। इस प्रकार से उन्होंने जात-पात मिटाने के उद्देश्य से अमृत चखाया। बाद में उन्होंने स्वयं भी अमृत चखा और गोबिंद राय से गोबिंद सिंह बन गए।
गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पूत्र थे, जिनका नाम साहिबजादे अजीत सिंह, साहिबजादे जुझार सिंह, साहिबजादे फतेह सिंह, साहिबजादे जोरावर सिंह था। उन्होंने अपने चारों पुत्र धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान किए। मुगल शासक द्वारा दो पुत्र जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहिंद में दीवार में चुनवा दिया गया। दो पुत्र अजीत सिंह और जुझार सिंह युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पुत्रों की शहादत में कहा था-
सब पुत्रन के कारन वार दिए पुत चार ।
चार मुुए तो क्या हुआ, जीवित कई हजार ।।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन में आनंदपुर, भंगानी, नंदौन, गुलेर, निर्मोहगढ, बसोली, चमकोर, सरसा व मुक्तसर सहित 14 युद्ध किए। इन जंगों में पहाड़ी राजाओं एवं मुगल सूबेदारों ने हर बार मुंह की खाई। गुरू गोबिन्द सिंह ने कभी स्वार्थ व निजहित के लिए लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि उन्होंने उत्पीड़न व अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
अक्तूबर 1708 में महाराष्ट्र के नांदेड़ साहिब में गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आखिरी सांस ली। इस प्रकार से पहले पिता गुरु तेग बहादुर सिंह, फिर चारों पुत्रों ने और बाद में श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने स्वयं बलिदान देकर धर्म की रक्षा की।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button