ओपी सिंह पर बड़ी जिम्मेदारी

सामान्य तौर पर हम सभी को जिम्मेदारियां मिली हुई हैं और कटु सत्य है कि हम उन कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाते नहीं हैं। हमारे देश में भगवत गीता का उदाहरण बात-बात पर दिया जाता है। जीवन के व्यवहार पक्ष की इससे अच्छी व्याख्या अन्य किसी ग्रंथ में मिलती भी नहीं है। फल की इच्छा न करते हुए कर्म करना बहुत कठिन भी है और बहुत सरल भी। अपने अंदर के अहं को अर्थात मैं को परे कर दीजिए। समाज शास्त्र में प्रस्थिति और भूमिका के बारे में पढ़ाया जाता है। स्थिति के अनुसार हमारी भूमिका बदल जाती है लेकिन हमारे दायित्व किसी को पीड़ा पहुंचाने वाले नहीं हो सकते। ऐसे कथित दायित्व स्वार्थ का एक रूप होते हैं। नौकरशाही में इस प्रकार स्वार्थ अब बढ़ने लगा है और हालात इतने वीभत्स हो गये कि किसी-किसी को आत्महत्या तक करने के लिए विवश होना पड़़ता है। यह कहना सिद्धांत रूप में सही है कि आत्म हत्या तो कायरता है, पाप है लेकिन इस तरह के हालात बनाने वाला तो उससे भी बड़ा पापी और कायर है। अभी पिछले दिनों हरियाणा से एक ऐसा ही दुखद मामला सामने आया था। वहां 2001 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को खुद को गोली मारकर आत्म हत्या कर ली थी। आईपीएस पूरन कुमार की पत्नी अमनीत पी. कुमार एक आईएएस अधिकारी हैं। स्व. वाई पूरन कुमार ने आठ पन्नों का एक सुसाइड नोट भी लिखा था जिसमें तत्कालीन डीजीपी शत्रुजीत कपूर और विजारनिया समेत 8 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर जाति आधारित भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया था। सरकार ने डीजीपी कपूर को जवरिया अवकाश पर भेजकर सीनियर आईपीएस ओम प्रकाश सिंह (ओपी सिंह) को डीजीपी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। इस मामले को लेकर राजनेता भी रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन ओपी सिंह पर यह बड़ी जिम्मेदारी है कि नौकरशाही में इस प्रकार के दबाव का अध्याय खत्म हो सके। विडम्बना है कि जिन अफसरों पर आम जनता के मान-सम्मान की रक्षा का दायित्व है, वे अपने मान-सम्मान की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। आईपीएस वाई पूरन कुमार की कथित आत्महत्या की जांच की जा रही है।
हरियाणा सरकार ने डीजीपी का अतिरिक्त कार्यभार सीनियर आईपीएस अधिकारी ओम प्रकाश सिंह (ओपी सिंह) को सौंप दिया है। ओम प्रकाश सिंह फिलहाल हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन में एमडी के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले हरियाणा सरकार ने डीजीपी शत्रुंजीत कपूर को छुट्टी पर भेज दिया था। यह घटना राज्य सरकार द्वारा रोहतक के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया का तबादला करने के कुछ दिनों बाद हुई।
हरियाणा के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली ने कहा कि हां सरकार ने डीजीपी को छुट्टी पर भेज दिया है। वाई पूरन कुमार द्वारा कथित तौर पर छोड़े गए आठ पन्नों के एक अंतिम नोट में उन्होंने कपूर और बिजारनिया सहित आठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों पर जाति-आधारित भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और अत्याचार का आरोप लगाया था। आईपीएस अधिकारी की पत्नी, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार ने मांग की कि कपूर और बिजारनिया का नाम उनके पति को आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने के आरोप में एफआईआर में दर्ज किया जाए। अधिकारी के परिवार ने अपनी मांगों पर ध्यान दिए जाने तक पोस्टमार्टम और दाह संस्कार के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया था। बता दें कि 2001 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी 52 वर्षीय वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को कथित तौर पर खुद को गोली मार ली थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने मामले की शीघ्र निष्पक्ष और गहन जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया। चंडीगढ़ पुलिस ने कहा कि वह मामले की निष्पक्ष, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच कर रही है।
हरियाणा पुलिस के अधिकारी वाई पूरन कुमार द्वारा कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने के एक दिन बाद उनकी पत्नी ने दावा किया कि पूरन की मौत उच्च पदस्थ अधिकारियों की ओर से सुनियोजित उत्पीड़न किए जाने के कारण हुई। पूरन की पत्नी अमनीत पी. कुमार ने शिकायत दर्ज कराई और अनुरोध किया कि चंडीगढ़ पुलिस रोहतक के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक उच्च अधिकारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करे। उन्होंने अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी की भी मांग की। कई बार प्रयास करने के बावजूद अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका। वरिष्ठ नौकरशाह अमनीत जापान के आधिकारिक दौरे से वापस लौटीं, जहां वह मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के साथ गई थीं। वाई. पूरन कुमार 2001 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी थे और वह चंडीगढ़ स्थित अपने आवास में मृत पाए गए थे। हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी समेत कुछ वरिष्ठ नौकरशाहों ने अमनीत कुमार के यहां पहुंचने पर उनसे मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि कुमार (52) ने कथित आठ पन्नों के टाइप और हस्ताक्षर वाले अपने ‘सुसाइड नोट’ में अपने करियर के दौरान आई कई समस्याओं का जिक्र किया है। कई कारणों ने उन्हें यह आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर किया होगा। सूत्रों के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि कुछ अधिकारियों द्वारा उन्हें ‘मानसिक प्रताड़ना’ दी गई। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता गीता भुक्कल समेत अन्य लोग सेक्टर 24 स्थित अमनीत कुमार के सरकारी आवास पर संवेदना व्यक्त करने पहुंचे थे।
पूरन कुमार ने सेक्टर 11 स्थित अपने घर में यह कदम उठाया था। भुक्कल ने कहा, ‘‘जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें न्याय मिलना चाहिए। सरकार को गहन जांच करनी चाहिए।’’ पूरन कुमार को हाल ही में रोहतक के सुनारिया में पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीसी) के महानिरीक्षक के रूप में तैनात किया गया था। उनका शव सेक्टर 11 स्थित घर के बेसमेंट स्थित एक कमरे में मिला और उन्हें गोली लगी हुई थी। पुलिस ने बताया कि केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) की एक टीम ने कुछ साक्ष्य जुटाए जिसमें पूरन कुमार द्वारा कथित तौर पर खुद को गोली मारने के लिए प्रयुक्त किया गया हथियार भी शामिल था। उसने बताया कि घटनास्थल से एक वसीयत और एक आखिरी नोट भी मिला है जिसे जब्त कर लिया गया। इस बीच, रोहतक में एक शराब ठेकेदार ने एक हेड कांस्टेबल के खिलाफ उससे रिश्वत मांगे जाने की शिकायत दर्ज करवाई थी।हेड कांस्टेबल सुशील कुमार को रोहतक पुलिस ने रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। शराब ठेकेदार ने आरोप लगाया था कि हेड कांस्टेबल ने पूरन कुमार के नाम पर ढाई लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। पुलिस ने कहा कि वह मामले की जांच कर
रही है। पूरन कुमार इससे पहले
रोहतक रेंज के महानिरीक्षक (आईजी) पद पर तैनात थे और हाल ही में उनका तबादला सुनारिया में हुआ
था। अंबाला, रोहतक और कुरुक्षेत्र सहित हरियाणा के कई जिलों में
सेवा दे चुके आईपीएस अधिकारी पूरन ने इंजीनियरिंग से स्नातक किया था और वह मई 2033 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। बहरहाल, अब नये डीजीपी ओपी सिंह को सच्चाई सामने लानी होगी। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



