पश्चिम बंगाल में भाजपा की किलेबंदी (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) वैसे तो इस साल होने जा रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव मंे भगवा फहरा कर दक्षिण-पूर्व भारत मंे भी मजबूत पकड़ बनाना चाहती है लेकिन सबसे जयादा ताकत पश्चिम बंगाल मंे झोंकी जा रही है। वहां भाजपा को सीधे ममता बनर्जी से मुकाबला करना है जबकि ममता बनर्जी को भाजपा के साथ वामपंथी दलों और संभवतः कांगे्रस से भी मुकाबला करना पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों मंे 2021 के चुनाव में भाजपा को सिर्फ 77 सीटों पर कब्जा मिल पाया था जबकि तृणमूल कांगे्रस ने 213 सीटों पर विजश्री हासिल की थी। उस साल 292 सीटों पर ही चुनाव हुए थे। इसलिए भाजपा इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक देना चाहती है। पार्टी ने आगामी 1 मार्च से 9 अलग-अलग स्थानों से परिवर्तन यात्राएं निकालने की तैयारी कर रखी है। इन यात्राओं के समापन पर एक बड़ी रैली की जाएगी जिसको प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधित करेंगे। इस रैली से पहले ही भाजपा ने पूर्व एनएसजी दीपांजन चक्रवर्ती, सीआरपीएफ के पूर्व डीएसपी विप्लव विश्वास और पूर्व सीपीएम कैबिनेट मंत्री खिती गोस्वामी की बेटी कस्तूरी गोस्वामी को अपने पाले मंे खड़ा कर लिया है। इस प्रकार भाजपा पश्चिम बंगाल मंे अपनी सियासी किलेबंदी को सृदढ़ कर रही है। हालांकि भाजपा को तृणमूल कांग्रेस के विरोध का कई स्तर पर सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी 1 मार्च से राज्य में परिवर्तन यात्राएं शुरू करेगी। ये यात्राएं पश्चिम बंगाल में 9 अलग-अलग जगहों से शुरू होंगी। यात्राओं के अंत में एक बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को संबोधित करेंगे। इन परिवर्तन यात्राओं में गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई बड़े नेता शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले प्रदेश की राजनीति में बड़े उलटफेर होने शुरू हो गए हैं। पिछले दिनों कोलकाता में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में कुछ जाने-माने लोग भारतीय जनता (भाजपा) में शामिल हुए। इनमें पूर्व छैळ कमांडर और अंडरकवर एजेंट रहे दीपांजन चक्रवर्ती, सीआरपीएफ के पूर्व डीएसपी बिप्लब बिस्वास और पूर्व कद्दावर वामपंथी मंत्री खिती गोस्वामी की बेटी कस्तूरी गोस्वामी शामिल हैं।
इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी के निलंबित विधायक और जनता उन्नयन पार्टी के मुखिया हुमायूं कबीर पर विस्फोटक आरोप लगाए। सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने से पहले हुमायूं कबीर 7 दिनों तक बांग्लादेश में थे। हुमायूं कबीर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट से पैसे ले रहे हैं, उस अकाउंट में बांग्लादेश से पैसे आ रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए।
बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं। पिछले 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने एकतरफा जीत हासिल की थी। कुल 294 में 292 सीटों पर हुए चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। इस चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर लगभग 48 फीसद रहा। वहीं, बीजेपी राज्य में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी और उसने 77 सीटों पर कब्जा जमाया।पश्चिम बंगाल में फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, लेकिन चुनाव से पहले माहौल गर्म है। तृणमूल पर भ्रष्टाचार, हिंसा और तुष्टिकरण के आरोप लग रहे हैं। सूबे में बीजेपी मजबूती से उभर रही है, जो बेरोजगारी, औद्योगीकरण और विकास जैसे मुद्दों पर जोर दे रही है। पार्टी शिक्षित, शहरी और पेशेवर वर्ग को जोड़ने की कोशिश कर रही है, जो टीएमसी की योजनाओं से इतने खुश नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के
नेतृत्व में तृणमूल एक बड़ी ताकत है, लेकिन हुमायूं कबीर का पार्टी से अलग जाना, बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे जनता में बीजेपी को एक मजबूत आधार दे सकते हैं।
2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने शानदार जीत हासिल की और 215 सीटें जीतकर सरकार बनाई। ममता बनर्जी की अगुवाई में पार्टी ने 48 प्रतिशत वोट पाए लेकिन बीजेपी ने भी विधानसभा चुनावों का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 2016 की 3 सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीतीं और 38 प्रतिशत वोट हासिल किए। इसके साथ ही पार्टी सूबे में पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनी। वहीं, 2021 में लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन को करारी हार मिली, और इनके हाथ कोई सीट नहीं लगी। इन चुनावों में जीत के साथ ममता पहले से भी मजबूत बनकर उभरीं, लेकिन 2026 में उनके लिए चुनौती आसान नजर नहीं आ रही है। दोनों दलों मंे टकराव होता रहता है। बर्धमान के नीलपुर इलाके में भाजपा के प्रचार कार्यक्रम को लेकर तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि पूर्व भाजपा युवा नेता और वर्तमान तृणमूल नेता श्यामल राय की तरफ से कथित ‘धमकी’ दिए जाने के बाद भाजपा जिला अध्यक्ष अभिजीत को इलाके से हटना पड़ा। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया और एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा का आरोप है कि प्रचार के दौरान तृणमूल नेता की मौजूदगी में खुलेआम धमकी का माहौल बनाया गया, जिससे स्थिति असहज हो गई और जिला अध्यक्ष को वहां से जाना पड़ा। वहीं, तृणमूल नेता श्यामल राय ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है, कहीं कोई धमकी नहीं दी गई। इलाके के आम लोगों ने भाजपा जिला अध्यक्ष से कुछ सवाल पूछे थे, हम भी उस समय मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि 2021 और 2024 के चुनाव में इस इलाके के लोगों ने भाजपा को वोट दिया था। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को 82 हजार 915 वोट मिले थे, लेकिन उसके बाद क्षेत्र में उनकी सक्रियता नजर नहीं आई। इसी को लेकर लोगों ने सवाल उठाए। श्यामल राय का आरोप है कि चुनाव से पहले ‘हिंदू-हिंदू भाई-भाई’ जैसे नारों के जरिए विभाजन की राजनीति की जा रही है, जिस पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। उनके मुताबिक, सवालों का संतोषजनक जवाब न दे पाने के कारण भाजपा नेता वहां से चले गए। तृणमूल के प्रवक्ता देवु टुडू ने कहा कि भाजपा नेता चुनाव से पहले लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पकार भाजपा को विरोध का जबर्दस्त सामना करना पड़ रहा है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



