लेखक की कलम

योगी ने जापान में फैलायी यूपी की शोहरत

योगी आदित्यनाथ का अपनी बात कहने का तरीका कुछ अलग रहता है। वह अपने वाणिज्यिक दक्ष साथियों को लेकर जापान और सिंगापुर की यात्रा पर गये। उनका उद्देश्य स्पष्ट था कि सिंगापुर और जापान के उद्यमियों को उत्तर प्रदेश मंे निवेश करने के लिए राजी करेंगे। इसमें योगी आदित्यनाथ सफल भी हुए हैं। जापान से 11 हजार करोड़ के निवेश के करार हुए हैं। यह करार कृषि यंत्र निर्माण, औद्योगिक मशीनरी निर्माण, जल और पर्यावरण, आटोमोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, औद्योगिक पिं्रटिंग व ग्राफिक्स, हास्पिटलिटी तथा रियल एस्टेट समेत अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने टोक्यो मंे जापान की अग्रणी वैश्विक ट्रेडिंग व निवेश कम्पनी मित्सुई एण्ड कम्पनी के मैनेजिंग आफिसर व चीफ आपरेटिंग आफिसर (इन्फ्रास्टक्चर प्रोजेक्ट्स विजनेस यूनिट) काजुकी शिमिजू से मुलाकात कर यूपी मंे निवेश के अनुकूल माहौल की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर व जापान दौरे मंे प्रमुख नेताओं, उद्यमियों, कंपनी प्रतिनिधियों व बच्चों को ओडीओपी योजना के तहत तैयार 500 से अधिक कलाकृतियां भेंट कीं। उधर, सिंगापुर मंे भी उत्तर प्रदेश के लिए एक लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। मुख्यमंत्री योगी के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन ही 60 हजार करोड़ के एमओयू हुए थे। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जर्मनी की यात्रा पर गये तो जर्मनी की कई कंपनियां यूपी को ड्रोन का हब बनाने को तैयार हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जर्मनी की अग्रणी ड्रोन निर्माण कम्पनी क्वांटम सिस्टम जीएमबीए के साथ बैठक की थी। इस प्रकार उत्तर प्रदेश मंे अगले महीनों मंे ही बड़े स्तर पर निवेश होगा और जाहिर है कि इससे युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार भी मिलेंगे।
जापान दौरे पर पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यामानाशी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदेश को निवेश के लिए देश का सबसे उपयुक्त राज्य बताया। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है और यहां निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने यूपी की प्राकृतिक सुंदरता और संसाधनों की तुलना जापान के यामानाशी प्रांत से करते हुए कहा कि जैसे यामानाशी प्राकृतिक रूप से समृद्ध है, वैसे ही यूपी भी विकास की नई गाथा लिख रहा है। योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बीते नौ वर्षों में प्रदेश की आर्थिक प्रगति बहुत तेजी से हुई है। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय लगभग तीन गुना बढ़ी है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि बड़े प्रदेश की चुनौतियां भी बड़ी हैं, लेकिन सरकार ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी के साथ द्विपक्षीय बैठक में औद्योगिक निवेश, तकनीकी सहयोग, कृषि प्रोसेसिंग और हरित ऊर्जा पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने पारस्परिक सहयोग को नई दिशा देने और निवेश को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। योगी आदित्यनाथ ने भारतीय समुदाय और निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब दीपोत्सव, महाकुंभ और वैश्विक निवेश का केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि पहले कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अब सड़कें बेहतर हैं और 24 घंटे बिजली सुनिश्चित की जा रही है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने यामानाशी हाइड्रोजन फैसिलिटी पी2जी का दौरा किया और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को समझा। पहले दिन ही टीम यूपी को लगभग 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। इस दौरान कुबोता कारपोरेशन, मिंडा कारपोरेशन, जापान एविएशन इलेक्ट्रानिक्स इंडस्ट्री सहित कई कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
इससे पूर्व उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के साथ सिंगापुर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सिंगापुर में लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि इनमें से 60 हजार करोड़ रुपये के एमओयू ‘इन्वेस्ट यूपी’ द्वारा संपन्न किए जा चुके हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह निवेश प्रदेश को एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया आज पूरी तरह पारदर्शी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को उत्तर प्रदेश में हो रही प्रत्येक गतिविधि की जानकारी है और यही कारण है कि कम समय में ही राज्य को इतना बड़ा निवेश प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि उनके साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर व जापान की यात्रा पर आया। सिंगापुर पहुंचने के बाद सुबह साढ़े आठ बजे से देर रात तक लगातार बैठकें चलीं और दूसरे दिन भी सुबह से ही कार्यक्रम जारी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो दिन में उन्होंने 100 से अधिक प्रतिनिधियों से भेंट की है। उन्होंने कहा कि सिंगापुर के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपप्रधानमंत्री, गृहमंत्री और ऊर्जा मंत्री के साथ भी उनकी सकारात्मक व सार्थक वार्ता हुई। उन्होंने बताया कि इसके अलावा प्रमुख फिनटेक कंपनियों के चेयरपर्सन व मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ भी बैठकें की गईं। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां पहले से भारत और उत्तर प्रदेश में निवेश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सिंगापुर दौरे के पहले दिन कुल 19,877 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी निवेशकों के समक्ष स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतिगत ढांचा, त्वरित स्वीकृतियां और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हस्ताक्षरित किए गए समझौता ज्ञापनों में एक बड़ा प्रस्ताव यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप की ओर से आया, जिसने ग्रुप हाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क और डेटा सेंटर परियोजनाओं में 6,650 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इन परियोजनाओं से शहरी विकास, औद्योगिक गतिविधियों और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसी क्रम में गोल्डन स्टेट कैपिटल (जीएससी) ने उत्तर प्रदेश में 100 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर की स्थापना के लिए 8,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की। यह परियोजना राज्य को देश के अग्रणी डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इसी तरह, प्राइवेट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ग्रुप (पीआईडीजी) ने नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और कृषि सह सोलर (एग्री-पीवी) परियोजनाओं में 2,500 करोड़ रुपये निवेश का समझौता ज्ञापन किया। इसके अतिरिक्त एवीपीएन लिमिटेड ने भी नवीकरणीय ऊर्जा और एग्री-पीवी क्षेत्र में 2,727 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इन पहलों से उत्तर प्रदेश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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