विश्व-लोक

बीएनपी ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई

बांग्लादेश के आम चुनावों में शानदार जीत हासिल करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर मुकदमा चलाने के लिए उनके भारत से प्रत्यर्पण की अपनी मांग दोहराई है। बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा, विदेश मंत्री पहले ही उनके प्रत्यर्पण के पक्ष में तर्क दे चुके हैं, और हम भी इसका समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा, हमने हमेशा ही कानून के अनुसार उनके प्रत्यर्पण पर जोर दिया है। यह दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों का मामला है। हमने भारत सरकार से भी उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने का आग्रह किया है ताकि वह वहां मुकदमे का सामना करें। अहमद ने इस बात पर जोर दिया कि भारत समेत सभी पड़ोसी देशों के साथ बांग्लादेश सामान्य संबंध चाहता है, लेकिन केवल बराबरी के आधार पर। उन्होंने कहा, हमें भारत समेत सभी देशों के साथ परस्पर सम्मान और समानता पर आधारित मैत्रीपूर्ण संबंध चाहिए। उनकी यह टिप्पणी 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी की शानदार जीत के तुरंत बाद आई। अगस्त 2024 में हुए जन विद्रोह के बाद यह पहला चुनाव है। इस विद्रोह के चलते शेख हसीना को बांग्लादेश से भारत आने के लिए मजबूर होना पड़ा था। सत्ता से बेदखल होने के बाद से नयी दिल्ली में निर्वासन में रह रहीं शेख हसीना को नवंबर 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने मौत की सजा सुनाई थी। विद्रोह के दमन से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए उनकी अनुपस्थिति में उन्हें यह सजा सुनाई गई थी। अहमद ने हिंसा की जांच के कारण अवामी लीग के चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबंध लगने के बाद, चुनाव की समावेशिता पर उठ रही आलोचनाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देते हुए कहा, देश के लोग जानते हैं कि यह एक बहुत ही समावेशी चुनाव है। अगर आप अवामी लीग आदि को चुनाव से बाहर रखने का जिक्र करना चाहते हैं, तो जनता ने अगस्त 2024 के जन विद्रोह के माध्यम से इसे खारिज कर दिया है। अवामी लीग को चुनाव से बाहर रखने का फैसला मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने लिया था, जिसने विद्रोह के दौरान पार्टी के बर्ताव की जांच के बीच, 2025 में इसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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