वृंदावन में नाव हादसा

अभी बिहार के नालंदा के देवी मंदिर धर्मस्थल पर भगदड़ में नौ श्रद्धालुओं की मौत का मामला ठंडा भी नही हुआ कि उत्तर प्रदेश के बड़े तीर्थ स्थल मथुरा के निकट वृंदावन में नाव हादसे का बेहद दुखदायी हादसा सामने आया है, जिसमें इन पंक्तियों के लिखे जाने तक करीब 18 श्रद्धालुओं के मरने की खबर थी। तेरह के शव निकाले जा चुके थे जबकि पांच की तलाश जारी थी। आए दिन कभी पवित्र नदियों के स्नान पर्व पर, कभी मंदिरों में दर्शन अवसर पर तो कभी तीर्थ यात्रा और तीर्थ स्थलों कभी शोभा यात्रा पुरी रथयात्रा रामलीला मेलों या गणेश मूर्ति विसर्जन के मौके पर हो रहे हादसों में सैकड़ों हजारों श्रद्धालुओं की जान जा रही है। हर हादसे के बाद जांच की खाना पूर्ति की जाती है। हर बार जिम्मेदार आयोजकों और प्रशासन प्रबंधन की खामियां लापरवाही सामने आती है लेकिन कोई बदलाव नहीं आता इससे पहले अगला हादसा हो जाता है। वृंदावन हादसे मंे भी लापरवाही का मामला सामने आ रहा है।
आपको बता दें वृंदावन एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां लाखों ही लोग जाते हैं। यहां भगवान कृष्ण जी ने अपना बचपन गुजारा। उनका जन्म मथुरा में हुआ। वृंदावन में सैकड़ों मंदिर हैं। यमुना के किनारे बसा होने के कारण यहां अनेक ही घाट हैं। यहां भगवान कृष्ण की याद में बना बांके बिहारी मंदिर लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बना रहता है। पंजाब से भी कुछ दर्जन श्रद्धालु यहां गए थे और लुधियाना, मुक्तसर एवं जगराओं के लगभग 37 श्रद्धालु यमुना में एक मोटर बोट पर सवारी कर रहे थे।
गहरे पानी में बने पांटून पुल, जिसे अब हटाया जा रहा था, से श्रद्धालुओं की नाव टकरा गई, जिस कारण यह हादसा हो गया, परन्तु नजदीक के नाव वालों और गोताखोरों ने इनमें से कई व्यक्तियों को बचा लिया। इससे पहले भी देश भर में ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए पूरे प्रबन्ध न किये जाने के कारण अक्सर हादसे हो जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग मौत के शिकार हो जाते हैं। इस तरह के प्रत्येक बड़े हादसे के बाद विशेष रूप से मेलों और धार्मिक स्थलों पर एकत्रित हुए श्रद्धालओं संबंधी पुख्ता प्रबन्ध करने की योजनाएं बनाने का दावा किया जाता है। इन प्रबन्धों का कुछ प्रभाव भी पड़ता है। फिर भी स्थानीय प्रशासन द्वारा इन प्रबन्धों में त्रुटियां रह जाने के कारण या प्रबन्धकों की लापरवाही के कारण ऐसे दुखद हादसे घटित हो जाते हैं। ऐसा कुछ न घटित हो, इसकी जिम्मेदारी संबंधित राज्यों पर भी आती है। उनकी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रत्येक पक्ष से सचेत होकर प्रबन्ध करें, जिनसे श्रद्धालुओं की बड़ी से बड़ी संख्या को भी नियंत्रित किया जा सके, ताकि ऐसे हादसे न घटित हों। यमुना नदी की सैर करते हुए अथवा यहां एक से दूसरे स्थान पर नावों द्वारा जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन को सचेत होने की जरूरत है। जिस समय यह हादसा घटित हुआ, उस समय मोटर बोट में 31 श्रद्धालु थे, जिनमें से किसी ने भी लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। यह बात सुनिश्चित है कि यदि मोटर बोट के प्रबन्धकों या प्रशासन की ओर से नाव में बैठने वालों के लिए लाइफ जैकेट पहनना जरूरी किया जाता तो मरने वालों में ज्यादातर का बचाव होने की बड़ी सम्भावना थी।
इस संबंध में सरकार का भी यह कर्तव्य बनता है कि वह किसी भी धार्मिक या अन्य त्यौहार पर अथवा यदि किसी स्थान पर भारी जनसमूह जमा होने की सम्भावना हो, तो वह विशेष प्रबंध किए जाने के निर्देश दे और स्थानीय सरकारों द्वारा किए गए प्रबन्धों पर निगरानी के लिए केन्द्र सरकार से संबंधित अधिकारियों द्वारा सम्पर्क बनाए रखना जरूरी होना चाहिए। चाहे प्रधानमंत्री द्वारा और पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा भी प्रभावित परिवारों के लिए राहत की घोषणा की गई है परन्तु ऐसे हादसों के कारण लम्बी अवधि तक संबंधित परिवारों को बड़ी त्रासदी भोगनी पड़ती है। समाज के सभी वर्गों और प्रशासनों को यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि भविष्य में ऐसा कुछ घटित न हो? वहीं श्रद्धालुओं को भी पर्याप्त सावधानी और उत्साह के अतिरेक से बचना चाहिए। एक ही दिन एक ही अवसर पर क्षमता से अधिक लोगों का एक स्थान पर स्नान पूजा मेला कथा शोभायात्रा में जमावड़ा करना और संयम खो कर धक्का-मुक्की कर व्यवस्था बिगाड़ना कौन सी धार्मिकता का परिचय देता है? हर आयोजन में दो चार फीसदी ऐसे उच्छृंखल लोगों की मौजूदगी रहती है जो अनावश्यक टकराव और अराजकता फैलाने का काम करते हैं। ऐसे लोग न भक्त हो सकते हैं न श्रद्धालु। ये सिर्फ धार्मिक चोला पहन कर उन्माद मचाने का काम करते हैं और सच्चे श्रद्धालुओं के जीवन के लिए खतरा पैदा करने का काम करते हैं। ऐसे ही लोग कांवड़ियों के वेश में भी शामिल होकर उपद्रव करने का प्रयास करते हैं।सभी श्रद्धालुओं का कर्तव्य है कि वह व्यवस्था बना रही पुलिस मंदिर कमेटी के स्वयंसेवकों के निर्देशानुसार संयमित व्यवहार करें आपाधापी लाइन तोड़ कर आगे बढने की स्वार्थी प्रवृति से बचना चाहिए। वही धार्मिक उपदेशक कथावाचक भी अपने अनुयायियों को इन अवसरों पर नैतिकता संयम बनाने के लिए आगाह कर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। कोई भी हादसा अनेक जीवन खासकर महिलाओं बच्चों के जीवन को खत्म कर परिवार को न भूलने वाला दुख देता है, इसको टाला जा सकता है।
मथुरा के वृंदावन में केसी घाट पर 10 अप्रैल को हुए मोटरबोट हादसे के लिए मोटरबोट चालक और रिवर फ्रंट का काम करा रहे ठेकेदार की लापरवाही को जिम्मेदार माना गया है। पुलिस की ओर से दोनों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी मांट थाने में दर्ज कराई गई है, जबकि संबंधित विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को अनदेखा कर दिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। केसी घाट पर श्रद्धालुओं से भरी मोटरबोट पांटून पुल से टकराने के बाद पलट गई थी। हादसे में तत्काल 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि 8 घायल हुए थे। पांच श्रद्धालु लापता थे, जिनमें से एक का शव 11 अप्रैल को नदी से बरामद कर लिया गया। इस तरह 11 लोगों की मौत की घटना के लिए प्रथम दृष्टया नाविक पप्पू उर्फ दाऊजी और मांट के मिरताना निवासी ठेकेदार नारायण शर्मा को जिम्मेदार माना गया है। एसआई आकाश चैहान ने दर्ज कराई प्राथमिकी में कहा है कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस समय पांटून पुल को जेसीबी की मदद से रस्सी से खींचा जा रहा था। इस कार्य के लिए कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के ठेकेदार ने यमुना में नावों का संचालन बंद नहीं कराया। बिना अनुमति के ही पुल को हटाने और जोड़ने का काम किया जा रहा था। साथ ही श्रद्धालुओं के मना करने के बाद भी नाविक ने मोटरबोट को नहीं रोका और पुल से टकराने के बाद बोट दुर्घटनाग्रस्त हो गई। प्राथमिकी में दोनों को हादसे का जिम्मेदार मानते हुए गैर इरादतन हत्या का अभियोग दर्ज कराया गया है। पुलिस ने पप्पू उर्फ दाऊजी और ठेकेदार नारायण शर्मा को गिरफ्तार कर लिया था।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)



