लेखक की कलम

विधायकों का डेरा या सीएम का घेरा!

अब कांग्रेस के पास गिनती की राज्य सरकारें हैं लेकिन उनको भी पार्टी नेतृत्व संभाल नहीं पा रहा है। दक्षिण भारत में कांग्रेस ने कर्नाटक में भाजपा से सत्ता छीन ली लेकिन अंदरूनी कलह ने आज भी पीछा नहीं छोड़ा है। सिद्धारमैया मुख्यमंत्री की कुर्सी से चिपके हैं और डीके शिवकुमार पार्टी नेतृत्व से अपना वादा निभाने का दबाव अलग-अलग तरीके से डाल रहे हैं। बीते साल के समापन पर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को वार्ता की मेज पर बैठाकर फिर आश्वासन दिया गया था। उस समय दोनों नेताओं का बयान आया था कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है लेकिन नये साल अर्थात 2026 में यह असंतोष सड़कों पर दिखने लगा। सन् 2023 में जब कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनी थी तब मुख्यमंत्री पद के लिए ढाई-ढाई साल की डील हुई बताई जाती है। इस लिहाज से सिद्धारमैया का कार्यकाल पूरा हो गया है। इसलिए डीके शिवकुमार के समर्थक पार्टी नेतृत्व पर इस बात के लिए दबाव डाल रहे हैं। इसी कड़ी में गत 12 अप्रैल को पार्टी के 30 वरिष्ठ नेता (विधायक) दिल्ली पहंुचे। घोषित रूप से कहा जाता है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मंत्रिमण्डल विस्तार करना चाहते हैं, इसलिए विधायकों ने वहां डेरा डाल दिया है लेकिन राजनीतिक जानकारों के अनुसार डीके शिवकुमार के समर्थकों ने इसी बहाने पार्टी नेतृत्व का घेराव किया है। वे कह रहे हैं कि हमारे नेता ने राहुल गांधी के आश्वासन पर इतने दिनों तक इंतजार किया लेकिन अब डेडलाइन घोषित होनी चाहिए।
कर्नाटक में कांग्रेस के बीच चल रही कलह रुकने का नाम नहीं ले रही है।सीएम सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है।इस बीच पार्टी के लिए एक नया सिरदर्द पैदा हो गया है। पार्टी के कई विधायक राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की मांग को लेकर दिल्ली पहुंच गए हैं।
कर्नाटक कांग्रेस के करीब दर्जन भर विधायक पार्टी आलाकमान से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं। कर्नाटक में लंबे समय से अटके मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंचे हैं। इन विधायकों में कई मंत्री पद के दावेदार हैं। सीएम सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल करना चाहते हैं लेकिन डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के वीटो के कारण कांग्रेस आलाकमान इसकी हरी झंडी नहीं दे रहा। डीके शिवकुमार खुद सीएम बनना चाहते हैं जिसके लिए सिद्धारमैया तैयार नहीं हैं। दोनों गुट की तरफ से इसको लेकर बीते साल के अंत में खूब प्रेशर पॉलिटिक्स हुई थी जब कर्नाटक सरकार के ढाई साल पूरे हुए थे। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस आलाकमान कर्नाटक को लेकर कोई फैसला ले सकता है।इसी वजह से कांग्रेस विधायक सक्रिय हो गए हैं।इनका कहना है कि वो सीएम बदलने या नहीं बदलने की मांग नहीं कर रहे बल्कि यह मांग कर रहे हैं कि कैबिनेट विस्तार हो और उन्हें मौका मिले। पार्टी आलाकमान से मिलने के लिए ये विधायक अभी कुछ दिन दिल्ली में रुकेंगे। कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं। कैबिनेट फेरबदल की मांग कर रहे 40 विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाला हुआ है। कांग्रेस के ये विधायक पार्टी हाईकमान से मिलकर मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को मौका देने की मांग करेंगे। इनमें तीन से ज्यादा बार विधायक बन चुके करीब 40 विधायकों की मांग है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का समय मिल चुका है, इसलिए अब सीनियर विधायकों को मौका दिया जाए। सीनियर विधायकों के साथ ही पहली बार चुने गए 38 कांग्रेस विधायक भी एक्टिव हो गए हैं। नए विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर कम से कम 5 नए विधायकों को मंत्री बनाने की मांग की है।
सूत्रों के मुताबिक 4 मई को पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनाव नतीजों के बाद और मानसून सत्र से पहले कांग्रेस पार्टी काफी संख्या में मंत्रिमंडल से मंत्रियों की छुट्टी कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक यह आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है। दरअसल, अभी कर्नाटक में 34 मंत्री है, इसमें कई लोगों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी और साथ ही कई विधायक काफी लंबे समय से मंत्री है। ऐसे में सरकार में नए चेहरों को जगह देकर कोशिश की जाएगी कि सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी को कम किया जाए। इसी वजह से कांग्रेस विधायक एक्टिव हो गए हैं। इनका कहना है कि वो सीएम बदलने या नहीं बदलने की मांग नहीं कर रहे बल्कि यह मांग कर रहे हैं कि कैबिनेट विस्तार हो और उन्हें मौका मिले। कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की मंजूरी है। फिलहाल दो मंत्री पद पहले से खाली हैं। इनमें एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर केएन राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। ऐसे में विधायकों की मांग है कि इन पदों को भरने के साथ व्यापक फेरबदल किया जाए।
दिल्ली पहुंचे नेताओं में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई विधायक शामिल हैं। ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खऱगे, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। कर्नाटक कांग्रेस विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बंटवारे के समय रणदीप सुरजेवाला ने सभी को मौका देने का भरोसा दिया था, लेकिन कुछ लोग चैथी बार भी मंत्री बने। विधायक किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी नेतृत्व को उसका पुराना वादा याद दिला रहे हैं। इस बीच डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी कहा था कि यदि मुख्यमंत्री ने फेरबदल के संकेत दिए हैं तो हर विधायक का मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा था- इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर कोई कोशिश कर सकता है। कर्नाटक कांग्रेस में यह हलचल ऐसे समय तेज हुई है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान जारी है।
2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी। अब सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच रही है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका संकेत यह माना जा सकता है कि सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
सन् 2023 विधानसभा चुनाव के बाद दोनों नेताओं में तीखी प्रतिस्पर्धा थी। उस समय ढाई-ढाई साल के रोटेशन फॉर्मूले की चर्चा थी, जिसके मुताबिक शिवकुमार 2.5 साल बाद सीएम बन सकते थे, लेकिन कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया कहते हैं कि जब हाईकमान कहेगा, तब डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा, लेकिन हाईकमान उनसे कुर्सी छोड़ने को कह नहीं पा रहा है। डीके का संयम भी टूट रहा है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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