ट्रम्प के बयान पर ब्रिटेन व इटली भड़के

डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नाटो गठबंधन की नींव पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्विट्जरलैंड के दावोस में उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि अगर कभी अमेरिका पर हमला हुआ तो नाटो के देश उसके साथ खड़े होंगे। अफगानिस्तान युद्ध का हवाला देते हुए ट्रंप ने दावा किया कि सहयोगी देशों की सेनाएं ‘फ्रंट लाइन से थोड़ा पीछे’ रहीं और असली बोझ अमेरिका ने उठाया। हालांकि इसे लेकर नाटो के अन्य सहयोगी भड़के हुए हैं। ब्रिटेन के प्रिंस हैरी और ब्रिटिश पीएम कीयर स्टार्मर ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वहीं ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस के खिलाफ इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी मैदान में आ गई हैं लेकिन उनके लिए नोबेल की मांग करने की बात कही है।
ट्रंप के दावे को आंकड़े भी अधूरा साबित करते हैं। अफगानिस्तान में 20 साल चले युद्ध में करीब 3,500 नाटो सैनिक मारे गए, जिनमें 2,456 अमेरिकी थे, लेकिन सैकड़ों ब्रिटिश और दर्जनों डेनमार्क जैसे छोटे देशों के 40 सैनिक भी मारे गए। ब्रिटेन और डेनमार्क की सेनाएं तालिबान के गढ़ हेलमंद प्रांत में सबसे आगे थीं और वहीं उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। जब अमेरिका पर मुसीबत आई तो सहयोगी खड़े हुए लेकिन ट्रंप उसका अहसान नहीं मान रहे। इसी वजह से इसे अपमानजनक माना जा रहा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इन्हें ‘अपमानजनक और बेहद गलत’ कहा और साफ कहा कि ऐसे बयान शहीद सैनिकों के परिवारों को चोट पहुंचाते हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने ट्रंप से उनके बयान के लिए माफी मांगने का अनुरोध किया। ब्रिटिश सेना के जरिये अफगानिस्तान में सेवा दे चुके प्रिंस हैरी ने कहा कि युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों के बलिदानों के बारे में ‘सच्चाई और सम्मान के साथ बात की जानी चाहिए।’ उधर, नाटो महासचिव मार्क रुटे ने भी ट्रंप को सामने बैठकर याद दिलाया कि यूरोप ने न सिर्फ अमेरिका का साथ दिया, बल्कि हर दो अमेरिकी सैनिकों के बदले एक सैनिक किसी दूसरे नाटो देश से जान गंवाकर लौटा।



