ग्रीनलैण्ड को लेकर कनाडा अमेरिका से करेगा युद्ध

ग्रीनलैंड के लिए कनाडा अमेरिका के खिलाफ युद्ध लड़ने को तैयार है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर बढ़ती आक्रामकता के बीच मजबूत रुख अपनाते हुए यह संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा नाटो के अनुच्छेद 5 के तहत डेनमार्क (और ग्रीनलैंड) की रक्षा के लिए तैयार है, जिसका मतलब अमेरिका के साथ संभावित सैन्य टकराव भी हो सकता है। हालांकि कार्नी ने स्पष्ट रूप से युद्ध घोषणा शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन उनके बयानों और नाटो प्रतिबद्धताओं को लेकर विशेषज्ञों ने इसे अमेरिका के खिलाफ युद्ध की तैयारी के रूप में बताया है। कार्नी ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद कहा, ष्हम डेनमार्क के साथ नाटो साझेदार हैं, और हमारी पूरी साझेदारी कायम है। अनुच्छेद 5 और अनुच्छेद 2 की हमारी जिम्मेदारियां अटल हैं, और हम इनका पूर्ण समर्थन करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता का फैसला केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों का है, न कि अमेरिका का। कार्नी ने ट्रंप से ग्रीनलैंड पर पीछे हटने की अपील की और कहा कि नाटो सहयोगी अपने वादों का सम्मान करें। ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए कहा था कि यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प है। उन्होंने उन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी जो उनके ग्रीनलैंड प्लान का विरोध करेंगे। ट्रंप की धमकी से नाटो में तनाव बढ़ गया है, क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाएगा। कनाडा के पूर्व सैन्य कमांडर ने चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा नाटो का अंत हो सकता है। कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। कार्नी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिक्सन से मुलाकात में कनाडा की डेनमार्क (ग्रीनलैंड) की संप्रभुता के प्रति अटूट समर्थन दोहराया। कार्नी की चीन यात्रा के दौरान ग्रीनलैंड पर दृष्टिकोणों में काफी समानता बताई गई, जो अमेरिका के खिलाफ नई रणनीतिक साझेदारी का संकेत है।



