यूएन में उठा ब्लूचिस्तान में प्रताड़ना का मामला

बलूच वीमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की सेंट्रल ऑर्गनाइजर शाली बलूच ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान बलूचिस्तान भर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। इनमें पाकिस्तानी सेना द्वारा लोगों को जबरदस्ती गायब करना और बिना किसी कानूनी कार्रवाई के हत्याएं करना शामिल है। गंभीर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार बलूच नागरिकों को आतंकवादी बताकर उन्हें निशाना बना रहा है और उनकी हत्याएं कर रहा है।
वर्चुअली इस सत्र को संबोधित करते हुए शाली ने कहा कि पाकिस्तान के शासन के अधीन स्थित बलूचिस्तान गंभीर मानवाधिकार हनन का सामना कर रहा है, जिसमें हाल के दिनों में बलूच महिलाओं और बच्चों पर सीधे हमले भी शामिल हैं। जबरन गायब किए जाने से लेकर गैर-न्यायिक हत्याओं तक, देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियां (सेना और अर्धसैनिक बल भी शामिल) इन सबमें लिप्त हैं। उन्होंने बताया कि अकेले 2025 में ही जबरन गायब किए जाने के लगभग 1355 मामले सामने आए हैं, जिनमें 18 महिलाएं और 225 हत्याएं शामिल हैं। बलूच कार्यकर्ता ने आगे कहा कि पाकिस्तान लगातार आम नागरिकों को निशाना बनाने और उनकी हत्या करने में लगा हुआ है, और उन्हें आतंकवादी करार दे रहा है। स्थानीय लोगों की गवाहियां सरकार के दावों से बिल्कुल अलग हैं।
बलूचिस्तान पाकिस्तानी सेनाओं के लगातार अत्याचारों से जूझ रहा है, जिसमें बलूच नागरिकों को जबरन गायब किया जाना और उनकी गैर-न्यायिक हत्याएं अभूतपूर्व स्तर पर हो रही हैं।
बलूच वॉइस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने बताया कि 28 मार्च को केच जिले के तुरबत इलाके में इसरार बलूच का गोलियों से छलनी शव मिला। इसरार को लगभग चार महीने पहले जबरन गायब कर दिया गया था। अधिकार संगठन ने कहा कि हिरासत में रहने के पूरे समय के दौरान इसरार के परिवार को उसके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, जबकि हिरासत में मारे जाने के बाद उसके शव को फेंक दिया गया।



