निष्कलंक हैं राम लला को हर बुरी नज़र से बचाने वाले चंपत जी

चंपत जी का अन्तर्मन साफ है निर्मल है। वे जानते हैं कि वे निष्कलंक हैं उन्हें उत्तर देने की जरूरत नहीं है। समय आने पर उत्तर उनके प्रभु राम लला देंगे। जहां उन्होंने यह अवश्य स्पष्ट किया है कि वे अयोध्या और अपने राम को छोड़कर कहीं नहीं जायेंगे। उनका अब तक का जीवन रामलला के साथ ही उनकी पूजा-अर्चना करते व्यतीत हुआ है अतः वे जीवन पर्यन्त अयोध्या में ही निवास करेंगे।
अपने राम लला से अटूट प्रेम करने वाले चंपत जी को अपने राम पर अगाध विश्वास है। ये अयोध्या नगरी है इसका इतिहास रहा है यहां सही और न्याय प्रिय व्यक्ति को ही कलंकित किया जाता है। यहीं राम को वनवास मिला और सीता माता को भी अपने को ही सही साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी। चढ़ावा चोरी का प्रकरण सामने आते ही चंपत राय जी ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दिया था।
6 जुलाई 2026 की ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा सर्व सम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से दूरी बना ली। मौन व्रत धारण कर लिया। हरिशयनी एकादशी के बाद उन्होंने अपने चातुर्मास में जाने की घोषणा सार्वजनिक कर दी। एक विरक्त संत की तरह अपने ईश्वर में विश्वास रखते हुए वे निस्वार्थ भाव से उनकी पूजा-अर्चना और तपस्या में लगे रहे। उन्हें विश्वास है कि जिस राम ने उन्हें इतने बड़े संकट में डाला है वही प्रभु उनका उद्धार भी करेगा। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों का कोई प्रतीकार नहीं किया। उनका मानना है कि समय अपने आप उत्तर देगा। चंपत राय जी को जो लोग निकट से जानते हैं उनका कहना है कि वे ईमानदार, परिश्रमी और सच्चे राम भक्त हैं। उनका इस्तीफा यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या अब कलियुग का वो समय आ गया है जब हमें अपने संस्थानों में ईमानदार, परिश्रमी, शिक्षित और निर्लोभी लोग नहीं चाहिये?
प्रभु श्रीराम के पटवारी कहे जाने वाले चंपत राय जी श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की नींव का वो मजबूत पत्थर हैं जिस पर मन्दिर की समस्त व्यवस्थाओं की विशाल भव्य इमारत खड़ी है। यही वजह रही है कि उन्होंने यह कहा कि ‘मुझे किसी पद का मोह नहीं है मेरी सेवा पूरी हो गई है, पर यह कलंक लेकर मैं अयोध्या से नहीं जाऊंगा। और वे वहीं परिसर में ही प्रभु के चरणों में रहकर समय का इन्तजार कर रहे हैं।
वर्तमान समय में नव निर्मित मन्दिर में प्रवेश करते समय प्रत्येक भक्त को वह समय भी याद आता है जब रामलला टैंट में थे। तब राम लला की अपने बच्चे की तरह रक्षा और सेवा करने के साथ ही यही चंपत राय जी अपनी जान पर खेलकर कोर्ट-कचहरी के चक्कर भी लगा रहे थे। अपनी युवावस्था का बहुमूल्य समय उन्होंने राम लला को भव्य मंदिर में विराजमान कराने का सपना देखने और उसे साकार करने में लगा दिया। वे तो वर्षों तक अपना निजी सब कुछ त्यागकर अपने प्रभु के साथ ही जीते रहे। ऐसे ईमानदार आस्थावान व्यक्ति के ऊपर चोरी, डकैती के आरोप लगाकर उसे आहत तो किया ही गया साथ ही उसकी गरिमा को भी ठेस पहुंचाई गई है। क्या यह न्याय संगत है? तमाम राम भक्त आज यह सवाल भी पूछ रहे हैं और उसके पीछे के कारण भी जानना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री के आदेश पर एसआईटी गठित करके जो जांच की गई थी उसकी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है अभी यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन इसके आधार पर सूत्रों से पता यह लगा है कि एसआईटी ने फाइनल रिर्पोट में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को लापरवाही का दोषी माना है। स्टेट बैंक को मुख्य रूप से लापरवाही का दोषी माना गया है। क्योंकि इसमें प्रोफेशनल लोगों को नहीं लगाया गया था। ट्रस्ट को विश्वास के आधार पर चलाया गया और जिन पर विश्वास किया गया उन्होंने ही विश्वासघात किया है। इस रिपोर्ट में बैंक को बहुत बड़ा जिम्मेदार माना गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर निर्माण और उसकी व्यवस्थाओं की देखभाल में किये गये चंपत जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। चंपत जी का पूरा जीवन निःस्वार्थ त्याग, तपस्या और रामभक्ति में बीता है। चंपत जी अपनी ईमानदार छवि के लिये ही जाने जाते रहे हैं। किसी भी संस्थान में ऐसे लोगों को एक बाधक के रूप में भी देखा जाता है।
मंदिर मंे चोरी का पता लगते ही चंपत जी एफआईआर कराने जा रहे थे लेकिन किसी पदाधिकारी ने उन्हें प्राथमिकी दर्ज कराने से भी रोक दिया और एफआईआर न कराना ही उनके इस्तीफे की मुख्य वजह भी बना। अपने इस्तीफे की घोषणा नैतिक आधार पर करने के बाद ही उन्होंने एक लेटर लिखा जिसमें उन्होंने एसआईटी की रिपोर्ट के आने के बाद ही अपना पक्ष रखने की बात कही थी। इसके बाद ही स्वयं सेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी। कुछ पदाधिकारी अयोध्या भी गये। चंपत जी के पत्र लिखने के बाद उन्हें नागपुर भी बुलाया
गया था लेकिन उन्होंने जांच पूरी होने तक अयोध्या में ही रहना उचित समझा।
चंपत जी आज भी शान्त है, गंभीर हैं और आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। वे जानते हैं कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में उठे सवालों और जिज्ञासाओं का समाधान अभी संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने कहा है कि रामलला बैठे हैं, इनके पास सभी का जवाब है। ईश्वर जो करता है ठीक करता है।
कवन सो काज कठिन जग माही।
जो नहीं होइ तात तुम पाही।।
अर्थात हे प्रभु इस दुनिया में ऐसा कौन सा काम है जो आपसे न हो सके।
वे सभी से संवाद कर रहे हैं। उनका अन्तर्मन साफ है निर्मल है। वे जानते हैं कि वे निष्कलंक हैं उन्हें उत्तर देने की जरूरत नहीं है। समय आने पर उत्तर उनके प्रभु राम लला देंगे। जहां उन्होंने यह अवश्य स्पष्ट किया है कि वे अयोध्या और अपने राम को छोड़कर कहीं नहीं जायेंगे। उनका अब तक का जीवन रामलला के साथ ही उनकी पूजा-अर्चना करते व्यतीत हुआ है अतः वे जीवन पर्यन्त अयोध्या में ही निवास करेंगे।
(कुमकुम शर्मा-हिफी फीचर)



