लेखक की कलम

गुजरात में कांग्रेस की परीक्षा

लगभग तीन दशक से गुजरात की सत्ता से दूर कांग्रेस को एक बार फिर सत्ता में वापसी का मौका मिल सकता है। इसके पहले उसे राज्य की उमरे सीट पर हो रहे उप चुनाव में विजय हासिल करनी होगी। इसी के साथ स्थानीय निकाय के चुनाव भी होने हैं। चुनाव की घोषणा हो चुकी है और राज्य में आदर्श संहिता भी लागू है। गुजरात के उप चुनाव में कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेता भृगुराज सिंह चैहान को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। आणंद जिले की यह विधानसभा सीट भाजपा विधायक गोविंद परमार के निधन से खाली हुई है। इस प्रकार पुश्तैनी अधिकार तो भाजपा का बनता है। भाजपा ने दिवंगत विधायक के पुत्र हर्षद परमार को टिकट दिया है। जातिगत संघर्ष में भृगुराज अगर बाजी मार लेते हैं तो कांग्रेस के लिए उम्मीदें जगेंगी। यहां पर ठाकुर-क्षत्रिय समुदाय के लगभग 54 फीसद मतदाता हैं। मतदान 23 अप्रैल को होना है और 4 मई को नतीजे घोषित हांेगे। कांग्रेस ने 15 महानगरों के लिए अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी कर दिया है।
छह राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान किया गया है। महाराष्ट्र की दो गुजरात की एक विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। वहीं, गोवा, नागालैंड और त्रिपुरा की एक-एक सीट पर उपचुनाव होना है। कर्नाटक में दो सीटों पर उपचुनाव होंगे। ये सभी सीटें तत्कालीन विधायकों के निधन से खाली हुई हैं। गुजरात की उमरेठ सीट पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस ने क्षत्रिय कार्ड चला है। कांग्रेस ने सीनियर पार्टी नेता भृगुराज सिंह चैहान को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उमरेठ उपचुनाव के लिए बीजेपी ने हर्षद परमार को टिकट दिया है। भाजपा के विधायक गोविंद भाई परमार के निधन के बाद उमरेठ में उप चुनाव हो रहा है। भृगुराज सिंह कांग्रेस के वफादार सिपाही और कद्दावर क्षत्रिय चेहरा हैं। क्षत्रिय नेता के जरिए कांग्रेस आणंद जिले का गणित साधने की कोशिश करेगी। भृगुराज सिंह चैहान ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भीतर कई संगठनात्मक पदों पर काम किया है। वह 2025 से जीपीसीसी के मध्य क्षेत्र के समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं और इससे पहले 2020 से 2025 के बीच प्रदेश प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुके हैं।
उन्हें 2026 के लिए नाडियाद, महुधा, ठसरा और गलतेश्वर विधानसभा सीटों का पीसीसी प्रभारी भी नियुक्त किया गया है। इससे पहले, उन्हें 2020 में मोरवा हडाफ उपचुनाव और 2019 में कर्जन उपचुनाव के दौरान पीसीसी प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। स्थानीय स्तर पर चैहान ने 2000 से 2015 तक लगातार तीन कार्यकाल के लिए उमरेठ तालुका पंचायत के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। उन्होंने आनंद में माही काठा विकास मंच के अध्यक्ष, अखिल गुजरात क्षत्रिय मंच के सचिव और अहिमा सेवा सहकारी मंडली के
अध्यक्ष के पद भी संभाले हैं। इससे पहले, पार्टी ने इस विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए चार पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे, जिन्हें चुनाव प्रचार के समन्वय, संगठनात्मक तैयारियों और जमीनी स्तर से फीडबैक लेने का काम सौंपा गया था। इन पर्यवेक्षकों से अपेक्षा की गई थी कि वे स्थानीय पार्टी इकाइयों के साथ मिलकर काम करेंगे और बूथ-स्तरीय गतिविधियों पर नजर रखेंगे। आनंद जिले की उमरेठ विधानसभा सीट, 6 मार्च को मौजूदा भाजपा विधायक गोविंद परमार के निधन के बाद खाली हो गई थी। भाजपा ने हर्षद परमार को अपना उम्मीदवार बनाया है।
वह दिवंगत विधायक के पुत्र हैं
और वर्तमान में चिखोदरा ग्राम पंचायत के सरपंच तथा आनंद तालुका सरपंच संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों का ऐलान भी हो गया है। राज्य में कुल 9992 सीटों के लिए 26 अप्रैल को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा जबकि मतगणना 28 अप्रैल को होगी। आवश्यकता पड़ने पर 27 अप्रैल को पुनर्मतदान भी किया जाएगा। पूरी चुनाव प्रक्रिया 30 अप्रैल से पहले समाप्त कर ली जाएगी। गुजरात की सत्ता में करीब 3 दशक से काबिज बीजेपी के सामने कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के रूप में नई चुनौती खड़ी हो रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के लिए ये चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही 1 अप्रैल की शाम से आचार संहिता लागू कर दी गई है। राज्य में कुल 34 जिला पंचायतों में चुनाव होंगे, जिनमें नया बना वाव-थराड जिला भी शामिल है। इनमें से 26 जिला पंचायतों में नई डिलिमिटेशन लागू की गई है। इस बार गुजरात की कुल 17 नगर निगमों में से
15 में चुनाव होंगे। जूनागढ़ और गांधीनगर नगर निगम को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। वहीं, 84 नगर पालिकाओं में चुनाव होंगे, जिनमें 7 नई नगर पालिकाएं शामिल हैं और 14 में नई सीमांकन प्रक्रिया लागू की गई है।
गुजरात विधानसभा चुनावों की आहट के बीच, गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति ने राज्य के 15 महानगरों के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और वडोदरा सहित प्रमुख शहरों में वरिष्ठ नेताओं ने इसे “कांग्रेस का कमिटमेंट” बताते हुए लॉन्च किया। कांग्रेस का कहना है कि ये महज परंपरागत वादे नहीं बल्कि जनता की उम्मीदों का दस्तावेज है , पूर्व केंद्रीय मंत्री भरत सिंह सोलंकी ने ये भी कहा कि यह कोई साधारण चुनावी घोषणापत्र नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों की आशाओं का ब्लूप्रिंट है। इसे ‘जनमंच’ अभियान के तहत सीधे लोगों से संवाद कर तैयार किया गया है। कांगे्रस ने वादा किया है कि हर वार्ड में आधुनिक डिजिटल स्कूल, लाइब्रेरी, फ्री वाई-फाई जोन और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग। साथ ही, नगर निगमों में खाली पदों पर तत्काल स्थायी भर्ती। वार्ड स्तर पर 24 घंटे चलने वाले आधुनिक हेल्थ सेंटर और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल। बुजुर्गों के लिए मुफ्त चिकित्सा जांच। महिलाओं को संपत्ति और वाहन टैक्स में छूट, ‘पिंक पार्किंग’, ‘पिंक टॉयलेट’ और कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टल बनेंगे।
गंदे पानी और वर्षा जल निकासी के लिए आधुनिक सिस्टम, गड्ढामुक्त सड़कें और पारदर्शी ‘पब्लिक ऑडिट’ व्यवस्था की जाएगी। ‘पहले पुनर्वास, फिर विध्वंस’ की मानवीय नीति के तहत गरीबों को किफायती आवास दिये जाएंगे।
कांग्रेस नेताओं ने एक सुर में कहा कि सत्ता में आने पर इन वादों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को कानूनी मान्यता देने और वेंडर जोन बनाने का भी वादा किया गया है। भरत सिंह सोलंकी कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, कांग्रेस का यह ‘जनता मेनिफेस्टो’ स्पष्ट रूप से स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है, जिससे पार्टी शहरी मतदाताओं के बीच अपनी खोई हुई पकड़ वापस पाने की कोशिश कर रही है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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