अमेरिकी सैनिकों ने खोली ट्रम्प की पोल

ईरान से सीजफायर होते ही अमेरिकी सैनिकों ने ट्रंप प्रशासन की पोल खोलनी शुरू कर दी है। जंग के दौरान कुवैत बेस पर तैनात सैनिकों ने अमेरिकी मीडिया सीबीएस को एक इंटरव्यू दिया है। इंटरव्यू देने वाले वही सैनिक हैं, जो कुवैत बेस पर हुए हमले में बाल-बाल बच गए थे। मार्च 2026 में कुवैत बेस पर ईरान ने हमला करके अमेरिका के 6 सैनिकों की हत्या कर दी थी। इस हमले को अमेरिका ने कभी भी हार की तरह नहीं स्वीकारा। सीबीएस को दिए गए इंटरव्यू में सैनिकों ने अपनी हार स्वीकार की है।
सैनिकों का कहना है कि इस एयरस्ट्राइक को ईरान ने पूरी योजना के साथ अंजाम दिया था। हम चाहकर भी नहीं बच पाए। ईरानियों की यह बड़ी सफलता थी। हम जंग में बुरी तरह उस दिन पिट गए थे। पीट हेगसेथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह दावा किया था कि जो बेस था, वो किलेबंद था। वहां पर एक ड्रोन गलती से पहुंच गया, जिसके कारण कुछ हताहत हुए। ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। हम जांच कर रहे हैं कि कैसे वहां ड्रोन पहुंच गया। घायल सैनिकों ने इसी को लेकर इंटरव्यू दिया है। हालांकि, सैनिकों के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। कुवैत के इस बेस पर अमेरिकी सेना के 103वीं सस्टेनमेंट कमांड को तैनात किया गया था। इसके एक जवान ने सीबीएस न्यूज को बताया- हम लोगों को इस हमले की जानकारी बहुत पहले से थी। खुफिया रिपोर्ट में यह कहा गया था कि ईरान इसे निशाना बना सकता है, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
इस जवान के मुताबिक सुबह उठकर जब हम गोला-बारूद के बारे में डेटा इकट्ठा कर रहे थे, तभी यहां शाहेद ड्रोन से ताबड़तोड़ हमला हो गया। हमला इतना भयावह था कि यहां 6 जवान मौके पर ही मर गए। 20 जवान घायल हो गए। चारों तरफ आग की ऊंची लपटें थीं। यह हमला 1 मार्च को तब हुआ था, जब अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या कर दी थी। एक अन्य सैनिक ने अखबार को बताया- रक्षा मंत्री ने किलेबंदी की जो बात कही है, वो झूठी है। वहां पर एक दीवार जरूर था, जो आमने-सामने की गोलीबारी में काम आ सकता था। हवाई हमले की स्थिति में छिपने के लिए वहां कुछ नहीं था। हम 60 सैनिक वहां पर खुले मैदान में थे। बटालियन के मुताबिक यह बेस कुवैत के दक्षिणी छोड़ पर स्थित है। जो ईरान की रडार पर शुरू से रहा है। यह बेस अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।



